नंगे पांव दौड़ने वाली गरीब बख्शो देवी बनना चाहती है उड़नपरी

नंगे पांव दौड़ने वाली गरीब बख्शो देवी बनना चाहती है उड़नपरी

माइनस जीरो डिग्री सेल्सियस तापमान और अपने पक्के इरादो को लेकर मैदान पर दौड़ती एक गरीब घर की उड़नपरी हिमाचल के जिला ऊना के तहत हरोली तहसील के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ईसपुर की 10वी कक्षा की 15 वर्षीय छात्रा बक्शो देवी बिना किसी प्रशिक्षक और बिना किसी साधन के 5 किलोमीटर यानी 5000 मिटर की दौड़ के लिए तत्पर थी। इंदिरा स्टेडियम में खून जमा देने वाली सर्दी के बीच जब इस छात्रा ने सरकारी स्कूल की वर्दी में नंगे पाँव दौड़ना शुरू किया तो इस छात्रा के प्रदर्शन से हर कोई दांत तले उंगली दबाने को मजबूर था।

दरअसल जब भी कोई ऐसा दौड़ प्रतियोगिता होती है तो उसके लिए पहले से ट्रेक सूत या ऐसी वर्दी दी जाती है जिससे दौड़ने वाले को कोई मुश्किल पेश न आये। इंदिरा स्टेडियम के उबड़-खाबड़ मैदान के ट्रेक पर दौड़ती हुई इस छात्रा ने दौड़ के लिए सपोर्टर्स शूट पहन कर दौड़ रहे बच्चो को पछाड़ कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया और 5 हजार मिटर रेस में पहला स्थान पाकर युवा एवं खेल विभाग द्वारा रखी गई 6 हजार रुपय के पुरष्कार की राशि को अपने नाम किया। दौड़ पूरी करने के बाद इसके चेहरे पर गजब की मुस्कान थी। मुस्कान जीत की नही बल्कि इस बात की थी कि जो राशि वह जीतेगी उसे वह उस माँ के हवाले करेगी जो बड़ी मुश्किल से घर का खर्चा चला रही है।

युवा सेवा एवं खेल विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय लम्बी व् मध्यम वर्गीय दौड़ प्रतियोगिता में अव्वल आने वाली इस छात्रा की प्रतिभा से हर कोई हैरान है। बख्शो देवी के सर पर पिता का साया नही है। 5 भाई-बहनो में से एक बख्सो की माँ मुश्किल से घर का गुजारा चलती। बख्शो पढ़ाई में तो अव्वल ही है खेलकूद प्रतियोगिताओ में भी न केवल हिस्सा लेती है बल्कि उनमे आगे रहती है। घर के हर कार्य के साथ खेती में हाथ बाँटने वाली बख्शो का सपना पढाई व् खेलो में आगे बढ़ने का है। दिक्क़ते तो कही है न तो कोई मार्गदर्शन करने वाला है और न इतने आर्थिक संसाधन की आगे आसानी से कोई प्रशिषण हासिल कर सके परन्तु बक्शो देवी हौसला नही हारना चाहती है। आर्थिक तंगी के चलते बख्शो देवी के भाई-बहन 10+2 से आगे नही पढ़ पाए है लेकिन यह किसी भी तरह न केवल उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती है बल्कि खेतो में भी ऊचा स्थान हासिल लकरने का जज्बा रखती है। वह अपने 10 वर्षीय भाई को भी पढ़ाना चाहती है।

अभी भी झोपड़ीनुमा मकान में रहने वाली बख्शो देवी अब धर्मशाला में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी। यह उसके लिए एक सपने के साकार होने जैसा है। स्कूल से घर और घर से स्कूल में ही अपने सपने बुनने वाली बख्शो देवी अब घर की दहलीज को लांघ धर्मशाला जाएगी जो उसके लिए यह एक नया अनुभव होगा। महज 1300 रुपय की नौकरी करने वाली बख्शो देवी की माँ विमला देवी भी अपनी इस बेटी के बुलंद हौसलों से काफी प्रसत्र हैं।

बख्शो देवी के प्रदर्शन और विपरीत परिस्थियों में किए गए प्रदर्शन के चलते अनेक लोग इस छात्रा की मदद के लिए अब आगे आने लगे है। समाज खुलकर इस बेटी को अपना आर्थिक सहयोग देने लगा है। बख्शो देवी भी पी.टी. उषा की तरह एथलीट बनकर अपना और क्षेत्र का नाम रोशन करना चाहती है।

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