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हिमा दास

हिमा दास: भारत की नई उड़नपरी कि मेहनत और हिम्मत

Hima Das (born 9 January 2000) is an Indian sprinter. She comes from the state of Assam, which is in the North-East region of India. She became the first Indian to win a Gold medal in a track event at the World Junior Athletics Championships in 2018.

वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली हिमा दास ने दिखाया है कि कड़ी मेहनत और हिम्मत से प्रयास किए जाएं तो आप पूरी दुनिया पर छा सकते हो।

हिमा दास ने इस तरह रचा इतिहास:

400 मीटर दौड़ की फाइनल दौड़ के 35वें सैंकेंड तक हिमा टॉप तीन में भी नहीं थी लेकिन अंतिम 100 मीटर तक पहुंचने के बाद उसने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि अन्य सभी धविकएं तो उसके करीब भी नहीं आ सकी और स्वर्ण पदक अपने नाम करके उसने देश के खेल इतिहास में अपना नाम भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवा लिया। पहली बार है कि भारत को IAAF की ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मैडल हासिल हुआ है। इससे पहले देश की कोई महिला ख़िलाड़ी जूनियर या सीनियर स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड नहीं जीत सकी थी। हिमा ने यह दौड़ 51.46 सैकेंड में पूरी की।

पदक समारोह के वक्त जब भारत का राष्ट्रगान बजा तो उसकी आंखों में आंसू छलक पड़े। जीत के बाद उसने कहा, “मैं अपने परिवार की हालत जानती हूं कि हमने किस तरह से संघर्ष किए हैं लेकिन ईश्वर के पास सभी के लिए कुछ न कुछ होता है। मैं पॉजिटिव सोच रखती हूं और जिंदगी में आगे के बारे में सोचती हूं। मैं अपने माता-पिता और देश के लिए कुछ करना चाहती हूं। मेरा अब तक का सफर एक सपने की तरह रहा है। मैं अब वर्ल्ड जूनियर चैम्पियन हूं।

गरीब किसान की बेटी है हिमा दास:

खास बात है कि हिमा ने केवल दो साल पहले ही रेस ट्रैक पर कदम रखे थे। उससे पहले तो उसे ढंग के जूते भी नसीब नहीं थे। उससे पहले तो उसे ढंग के जूते भी नसीब नहीं थे। परिवार में 5 बच्चों में सबसे छोटी हिमा चावल के खेतों में पिता की मदद करती थी।

नौगांव जिले के एक छोटे से गांव में उनके किसान पिता रंजित दास के पास दो बीघा जमीन है जबकि मां जुनली घरेलू महिला हैं। जमीन यह छोटा-सा टुकड़ा ही  परिवार की रोजी-रोटी का जरिया है। हिमा बताती है, “10वीं क्लास में मुझे खेतों में ट्रैक्टर चलाना बड़ा अच्छा लगता था। मैंने बैलों से भी खेतों की जुताई की है।”

फुटबॉल मैंचों में कमाया था नाम:

वह अपने धान के खेतों के पास लडकों के साथ फुटबॉल खेलती थीं। आसपास के गांवों में फुटबॉल मैंचों में गोल पर गोल करके नाम कमा चुकी हिमा पर कोच निपुन दास की नजर पड़ी और वह मैदान पर उसकी गति देख कर हैरान थे। इसके उन्होंने ही उसे एथलेटिक्स में हिस्सा लेने को कहा।  वही उनके परिवार को मना कर हिमा को गांव से 140 कि.मी. दूर गुवाहाटी ले आए जहां उन्हें इंटरनैशनल स्टैंडर्ड के ‘स्पाइक्स’ (दौड़ प्रतियोगिताओं में पहने जाने वाले विशेष जूते) पहनने को मिले।  इसके बाद हिमा ने एक के बाद एक दौड़ प्रत्योगिताओं में जीत दर्ज की और पीछे मुड़कर नहीं देखा।

तोड़ी थीं शराब की दुकानें:

बेशक आज वह पुरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन गई हो लेकिन उसका गांव पहले से ही उसका फैन है। असम के छोटे से गांव ढिंग में रहने वाले हिमा के पड़ोसियों की मानें तो रेस ट्रैक तक पहुंच कर ख्याति पाने से पहले वह बुराई के खिलाफ आवाज बुलंद कर अपने गांव में मौजूद शराब  की दुकानों को भी तोड़ चुकी हैं।

उनके अनुसार वह केवल विश्व स्तरीय एथलीट ही नहीं, अपने आसपास हो रही बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाना भी जानती हैं। गांव में शराब की दुकानें थीं जिन्हें हिमा ने लोगों के साथ मिलकर ध्वस्त करवाया था।  वह लड़की कुछ भी कर सकती है। वह गलत के खिलाफ बोलने से नहीं डरती।  वह हमारे और देश के लिए रोल मॉडल बन चुकी है। स्थानीय लोग हिमा को ‘ढिंग एक्सप्रैस‘ कहते हैं।

पिता की प्रेरणा:

उनके पिता रंजित दास ने बताया कि स्वर्ण पदक जितने के बाद हिमा ने उन्हें फोन करके कहा कि आप लोग सो रहे थे, तब मैने इतिहास रच दिया।  हमने कहा कि कोई नहीं सोया था और सब जागकर टी.वी. पर उसकी रेस देख रहे थे। यह सुनकर वह भावुक होकर रोने लगी। वह अपनी बेटी का साहस देखकर हैरान रह जाते थे। उन्होंने कहा, “वह बिलकुल पर्वत की तरह सख्त है। मुझे गांव से बाहर उसे अकेले ट्रेन में भेजने में डर लगता था लेकिन वह कहती थी चिंता मत करो। उसे देखकर मुझे प्रेरणा मिलती थी।”

2019: More Gold For Hima Das

  • She won 200m Gold in Poznan Athletics Grand Prix in Poland, on July 2, 2019, with a time of 23.65 seconds.
  • After that, she won 200m gold at the Kutno Athletics Meet, also in Poland, on July 7, 2019, with a time of 23.97 seconds.
  • In the same year, on July 13, she won 200m gold at the Kladno Athletics Meet in the Czech Republic with a time of 23.43 seconds.
  • She also bagged the gold medal in the 200m race at the Tabor Athletics Meet, on July 17, 2019, Wednesday, in the Czech Republic with a time of 23.25 seconds.
  • On 20 July 2019, She roared to her fifth gold of the month July’19 in her 400-meter race in Nove Mesto, Czech Republic on Saturday, recording 52.09 seconds on the clock.
  • In July 2019, She bagged a total of 5 gold medals in a month.

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