Tag Archives: Motherland Hindi Poems

Suryakant Tripathi ‘Nirala’ Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनी

Suryakant Tripathi 'Nirala' Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनि

Here is an old classic by the famous poet Suryakant Tripathi Nirala. This lovely composition in chaste Hindi is a pleasure to sing loudly for its sheer rhythm and zing. On this Independence Day, this national poem should be shared by all. वर दे वीणावादिनी! वर दे। प्रिय स्वतंत्र–रव अमृत–मंत्र नव, भारत में भर दे। काट अंध–उर के बंधन–स्तर, बहा …

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पंद्रह अगस्त: 1947 – गिरिजा कुमार माथुर की देश प्रेम हिंदी कविता

पंद्रह अगस्त: 1947 - गिरिजा कुमार माथुर

Here is a famous poem that was written by the well known poet Girija Kumar Mathur at the time when India got independence. The poem is still relevant today. पंद्रह अगस्त: 1947 – गिरिजा कुमार माथुर आज जीत की रात पहरुए सावधान रहना! खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना! प्रथम चरण है नए स्‍वर्ग का है मंज़िल का …

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स्वामी विवेकानंद के भाषण पर प्रेरणादायक कविता

Swami Vivekananda

शिकागो धर्म सम्मेलन,1893 में दिया गया भाषण अमरीकी भाई बहनो कह, शुरू किये जब उद्बोधन। धर्म सभा स्तब्ध हुई थी, सुनकर उनका सम्बोधन॥आया उस प्राचीन देश से, जो संतो की है नगरी। पाया हूँ सम्मान यहाँ जो, भरी हर्ष से मन गगरी॥मेरा है वो धर्म जिसे सब, कहते धर्मो की माता। धरा गगन में होने वाली, हर हलचल की वो ज्ञाता॥करता हूँ नत …

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झाँसी की रानी: सुभद्रा कुमारी चौहान की वीर रस कविता

Subhadra Kumari Chauhan Veer Ras Hindi Poem झाँसी की रानी

Subhadra Kumari Chauhan has authored a number of popular works in Hindi poetry. Her most famous composition is Jhansi Ki Rani, an emotionally charged poem describing the life of Rani Lakshmi Bai. The poem is one of the most recited and sung poems in Hindi literature. This and her other poems, Veeron Ka Kaisa Ho Basant, Rakhi Ki Chunauti, and …

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15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस पर प्रेरणादायक देशभक्ति बाल-कविता

15 अगस्त - मीनाक्षी भालेराव

भारत में स्वतंत्रता दिवस, सभी धर्म, परंपरा और संस्कृति के लोग पूरी खुशी से एक साथ मनाते हैं। 15 अगस्त 1947 से ही ये हर साल इसी दिन मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन लगभग 200 साल बाद भारत को ब्रिटिश हुकुम़त से आजादी मिली थी। इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित किया गया साथ ही सभी …

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15 अगस्त 1947: सुमित्रानंदन पंत जी की देश भक्ति कविता

15 अगस्त 1947 - सुमित्रानंदन पंत

सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनका जन्म अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में मई 20, 1900 को हुआ। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला पोसा। शिशु का नाम रखा गया …

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वीरों का कैसा हो वसंत: सुभद्रा कुमारी चौहान की वीर रस हिंदी कविता

Republic Day Parade

Here is an old classic poem by Subhadra Kumari Chauhan, who also wrote the evergreen poem – Jhansi Ki Rani. Her writing career unfortunately came to an early end as she died at the age of 42, in a road accident. That happened before the country attained freedom. That explains the last stanza of this poem where she says that …

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माँ तुझे सलाम – वन्दे मातरम्: महबूब ख़ान

माँ तुझे सलाम - वन्दे मातरम्: महबूब ख़ान

ओ ओ… वन्दे मातरम् x 8 यहाँ वहां सारा जहाँ देख लिया है कहीं भी तेरे जैसा कोई नहीं है अस्सी नहीं सौ दिन दुनिया घूमा है नहीं कहीं तेरे जैसा कोई नहीं मैं गया जहाँ भी बस तेरी याद थी जो मेरे साथ थी मुझको तड़पाती रुलाती सबसे प्यारी तेरी सूरत प्यार है बस तेरा प्यार ही माँ तुझे …

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राणा प्रताप की तलवार: श्याम नारायण पाण्डेय जी का वीर रस काव्य

Maharana Pratap Jayanti

श्याम नारायण पाण्डेय (1907 – 1991) वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। वह केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस काव्य के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे। आरम्भिक शिक्षा के बाद आप संस्कृत अध्ययन के लिए काशी चले आये। यहीं रहकर काशी विद्यापीठ से आपने हिन्दी में साहित्याचार्य किया। द्रुमगाँव (डुमराँव) में अपने घर पर रहते …

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हल्दीघाटी: झाला का बलिदान – श्याम नारायण पांडेय

Haldighati Poem on Maharana Pratap हल्दीघाटी: झाला का बलिदान

It is said that the Mughals were humbled in victory that day at Haldighati and Rana obtained a glorious defeat. Man Singh narrowly escaped the spear of Rana. Mughals by far out numbers Rana’s men. Tired and wounded Rana was headed for a certain death. At that juncture, a valiant warrior in Rana’s army, named Jhala came to his rescue. …

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