| Name: | शारदा माई मंदिर, मैहर, सतना, मध्य प्रदेश (Maihar Devi Mandir) – Maa Sharda Temple, Maihar |
| Location: | Maihar – Banshipur Road, Maihar, Madhya Pradesh 485771 India |
| Deity: | Sharada (Goddess of learning) |
| Affiliation: | Hinduism |
| Completed: | 502 A.D. |
| Architecture: | – |
इस मंदिर में रात बिताने से मौत की आगोश में आ जाता है हर इंसान?
जिला सतना की मैहर तहसील के समीप त्रिकूट पर्वत पर मैहर देवी का मंदिर है। मैहर नगरी से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर शारदा माई मंदिर है। इस मंदिर से संबंधित बहुत सारी विख्यात कथाएं हैं। हर रोज रात को मंदिर बंद कर दिया जाता है, माना जाता है कि प्रतिदिन रात्रि के समय आल्हा और उदल नाम के दो चिरंजीवी मां के दर्शनों के लिए आते हैं। यदि कोई व्यक्ति रात के समय यहां रूकने की चेष्टा करता है तो वह अगली सुबह नहीं देख पाता। मौत के आगोश को प्राप्त हो जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शारदा माता के बहुत बड़े भक्त आल्हा और उदल वो शख्स हैं जिन्होंने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। उन दोनों ने इस मंदिर की खोज की थी। आल्हा ने इसी मंदिर में 12 सालों तक तप कर देवी से अमरत का वर प्राप्त किया था। आल्हा मां को शारदा माई नाम से पुकारता था इसलिए मंदिर का नाम भी शारदा माई के नाम से विख्यात हो गया। माना जाता है की आज भी माता शारदा के दर्शन प्रतिदिन सर्वप्रथम आल्हा और उदल करने आते हैं। मंदिर की पीठ पर पहाड़ों के तले एक तालाब है, जिसे आल्हा तालाब के नाम से जाना जाता है। तालाब से 2 किलोमीटर की दूरी पर एक अखाड़ा है कहा जाता है कि इस स्थान पर आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे।
रात को कोई भी व्यक्ति मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता क्योंकि वहां के लोगों का मानना है कि रात को दोनों भाई मंदिर में आकर मां का श्रृंगार करते हैं अौर पूजा अर्चना करते हैं। इसी दौरान यदि कोई व्यक्ति मंदिर में रुकने की कोशिश करता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है। त्रिकूट पर्वत पर माता शारदा देवी के मंदिर के साथ ही काल भैरवी, भगवान हनुमान, देवी काली, देवी दुर्गा, गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमती माता, ब्रह्म देव अौर जालपा देवी के मंदिर भी हैं।
स्थानीय परंपराओं की मानें तो लोग माता के दर्शन के साथ-साथ दो महान योद्धाओं आल्हा और ऊदल, जिन्होंने पृथ्वी राज चौहान के साथ भी युद्ध किया था, का भी अवश्य दर्शन करते हैं। अगर कोई व्यक्ति रात के समय यहां रूकने की चेष्टा करता है तो वह अगली सुबह नहीं देख पाता, बल्कि मौत के आगोश को प्राप्त हो जाता है।
कथाएं प्रचलित हैं कि आल्हा और ऊदल दोनों ने ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी। जिसके बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 सालों तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था। तदोपरांत माता ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था। ऐसा लोक मत है क आल्हा माता को शारदा माई कह कर पुकारा करता था, जिस कारण ये मंदिर भी माता शारदा माई के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
तो अ्न्य कुछ किवदंतियों के अनुसार आज भी सबसे पहले आल्हा और ऊदल ही मां के दर्शन करने आते हैं। मान्यता ये भी है कि यहां मां के चरणों में नारियल, सिंदूर, पान, चुनरी पान और सुपारी चढ़ाता है उसकी हर इच्छा पूरी होती है। साथ ही साथ मंदिर के पीछे स्थान पर मन्नत की डोर भी बांधी जाती है।
कैसे पहुंचें शारदा माई मंदिर मैहर:
- वायु मार्ग
मैहर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर, खजुराहो और इलाहाबाद है। इन हवाई अड्डों से आप ट्रेन, बस या टैक्सी से आसानी से मैहर तक पहुंच सकते हैं। जबलपुर से मैहर दूरी 150 किलोमीटर खजुराहो से मैहर दूरी 130 किलोमीटर इलाहाबाद से मैहर दूरी 200 किलोमीटर - ट्रेन द्वारा
आम तौर पर सभी ट्रेनों में मैहर स्टेशन पर रोक नहीं होती है, लेकिन नवरात्र उत्सवों के दौरान ज्यादातर ट्रेनें मैहर पर रुकती हैं। सभी ट्रेनों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जंक्शन – सतना स्टेशन से मैहर स्टेशन की दूरी 36 किलोमीटर है मैहर स्टेशन से कटनी स्टेशन की दूरी 55 किलोमीटर है - सड़क मार्ग
मैहर शहर अच्छी तरह से राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के साथ सड़क से जुड़ा हुआ है . आप आसानी से निकटतम प्रमुख शहरों से मैहर शहर के लिये नियमित बसें पा सकते हैं।
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