क्यों त्रिभुजाकार है ‘केदारनाथ शिवलिंग’
केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनोखा है। मंदिर में शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है। यह एक विशाल चट्टान का हिस्सा है, जिसको स्वयंभू माना जाता है।
शिव पुराण में 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग जगहों पर स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव की शक्ति का केंद्र माना जाता है। वहीं 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ भी शामिल है।
केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनोखा है। मंदिर में शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है। यह एक विशाल चट्टान का हिस्सा है, जिसे स्वयंभू माना जाता है।
Kedarnath Temple
| Name: | केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Temple) |
| Location: | Kedarnath, Uttarakhand 246445 India |
| Deities: | Shiva |
| Affiliation: | Hinduism |
| Festival: | Maha Shivaratri |
| Architecture: | North-Indian Himalayan Architecture (कत्यूरी शैली) |
| www: | badrinath-kedarnath.gov.in |
| Elevation: | 3,583 m (11,755 ft) |
| Constructed By: | Pandavas |
त्रिभुजाकार शिवलिंग का कारण
एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों को अपने कुल के लोगों की हत्या करने के बाद पछतावा हुआ।
पांडव इस पाप से छुटकारा पाना चाहते थे इसलिए उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद चाहिए था लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे। वह उनको दर्शन नहीं देना चाहते थे इसलिए महादेव ने बैल का रूप धारण कर लिया। लेकिन भीम बेहद शक्तिशाली थे। भीम ने भगवान शिव को पहचान लिया।

जब महादेव भीम से बचने के लिए धरती में समाने लगे, तो भीम ने शिवजी को पकड़ने की कोशिश की। बैल का पूरा हिस्सा धरती में धंस गया, लेकिन पीठ का हिस्सा वहीं रह गया, आज वही त्रिकोणीय शिवलिंग भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है।
आदि शंकराचार्य ने करवाया था मदिंर का निर्माण
केदारनाथ मंदिर विशाल पठार के बीच में बना है। 8वीं शताब्दी में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ के वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी बैल की एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, इस मंदिर का शिवलिंग त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है।
दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
केदारनाथ में शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में दर्शन करने से भक्तों के मन को शांति मिलती है। स्कंद पुराण के केदारखंड में केदारनाथ के त्रिभुजाकार शिवलिंग के बारे में वर्णन मिलता है।
इस बार 22 अप्रैल, 2026 से केदारनाथ मंदिर की शुरू हुई यात्रा नवम्बर तक जारी रहेगी जब मंदिर के कपाट सर्दियों के लिए बंद हो जाएंगे।
बता दें कि केदारनाथ सहित भगवान शिव के अंग जिन अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए, उन्हें आज ‘पंचकेदार’ के नाम से जाना जाता है। ये हैं – केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मदमहेश्वर, कल्पेश्वर।
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