टिम्बकटू भई टिम्बकटू,मैं तो हरदम हँसता हूँ।
ठीक शाम को चार बजे जब,
आया नल में पानी।
छोड़ दिया नल खुला हुआ,
की थोड़ी सी शैतानी।
पानी फ़ैल गया आँगन में,
नैया उसमे तैराऊं।
पुंछ हिलाता मुहं बिचकाता,
आया नन्हा बन्दर।
उसे खिलाई मैंने टाफी,
आलू और चुकंदर।
मै लेटा तो मेरे सर से,
बन्दर लगा ढूंढने जूं।
खोला फ्रीज़ तो देखा मैंने,
रसगुल्ले खा चुपके से,
कोल्ड ड्रिंक पी डाला।
फिर मम्मी ने डांट पिलाई,
बड़े मज़े से डांट पियूं।
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