सूने दालान - सोम ठाकुर

सूने दालान – सोम ठाकुर

खिड़की पर आँख लगी
देहरी पर कान
धूल–भरे सूने दालान
हल्दी के रूप भरे सूने दालान।

परदों के साथ साथ उड़ता
चिड़ियों का खंडित–सा छाया क्रम
झरे हुए पत्तों की खड़–खड़ में
उगता है कोई मनचाहा भ्रम
मंदिर के कलशों पर
ठहर गई सूरज की काँपती थकन
धूल–भरे सूने दालान।

रोशनी चढ़ी सीढ़ी–सीढ़ी
डूबा–मन
जीने की मोड़ों को
घेरता अकेलापन
ओ मेरे नन्दन!
आँगन तक बढ़ आया
एक बियाबान
धूल–भरे सूने दालान।

~ सोम ठाकुर

आपको यह कविता कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने भाव comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@sh035.global.temp.domains. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Con City: 2026 Arjun Das & Yogi Babu Tamil Mystery Comedy Family Drama Film Trailer & Review

Con City: 2026 Arjun Das & Yogi Babu Tamil Mystery Comedy Family Drama Film Trailer & Review

Movie Name: Con City Directed by: Harish Durairaj Starring: Arjun Das, Yogi Babu, Anna Ben, …