चाय के साथ परोसा जाता है।
बच्चा, बड़ा, मर्द, औरत हर कोई बड़े चाओ से खाता है,
न जाने कब किसने समोसे का, पहली बार अविष्कार किया।
बाहरी आवरण बनाया समोसा भरा,
तेल में तल कर समोसा तैयार किया।
तब से अब तक अनगिनत पीढ़िया,
इसका आनदं लेती आई है।
कही-कही इसी पकवान को,
तिकोना भी कहती-कहलाती आई है।
शेक्सपियर ने कहा था बरसो पहले,
भला नाम में क्या रखा है?
समोसा कहो, तिकोना कह लो,
स्वाद और मजा तो वही रहता है।
~ ओम प्रकाश बजाज
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