हर वक्त हो नमाज याद रखना।
आयतें उतरी जमीं पे जिस रोज,
अनवरे-इलाही आयी उस रोज।
इनायत खुदा की न कभी भूलना,
हर वक्त हो नमाज याद रखना।
खयानत का ख्याल तू दिल से निकाल दे,
खुदी को मिटा खुदाई में तस्लीम कर दे।
क़यामत के कहर में भी ये कलाम न छोड़ना,
हर वक्त हो नमाज याद रखना।
अदावत का गुल ना खिल पाये कभी,
हबीबों की हस्ती ना हिल पाये कभी।
जुर्मों की जहाँ से सदा परहेज करना,
हर वक्त हो नमाज याद रखना।
पीर-फकीर, मौलाना हुए इसी राह पे चलकर,
उतारा आयतों को दिल में जुल्मों-सितम सहकर।
हर मर्ज की दवा है, वल्लाह, ना भूलना,
हर वक्त हो नमाज याद रखना।
हम हैं नूर खुदा के, सबसे प्यारे हैं खुदा के,
मोमिनों अहिंसक बनो, कह गए पैगम्बर सबसे।
जख्म ना पाये कोई जीव हमसे, सदा रहम करना,
हर वक्त हो नमाज याद रखना।
~ बसंत लाल दास
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