कवि कभी मरा नहीं करतासो जाते हैं अहसास
मातृप्राय हो जाते हैं वो तंतु
जो सोचा करते हैं
सूरज से आगे की
सागर से नीचे की
वो सोच, जिसने मेघदूत को जन्म दिया
वो कभी मरा नहीं करती
मर जाते है वो अरमान
जब ध्वस्त होते हैं सपनों के किले
कवि कभी मरा नहीं करता
वह ज़िंदा रखता है अपने आप को
वह जीता रहता है
वह संघर्ष करता रहता है
एक नयी दुनिया के अरमान संजोए
कवि कभी मरा नहीं करता।
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