उपदेश कुछ सुन लीजिये
पढ़ चुके हैं बहुत पोथी
आज कुछा गुन लीजिये
हाथ में हो गोमुखी
माला सदा हिलती रहे
नम्र ऊपर से बनें
भीतर छुरी चलती रहे
नगर से बाहर बगीचे–
में बना लें झेपड़ी
दीप जैसी देह चमके
सीप जैसी खोपड़ी
तर्क करने के लिये
आ जाए कोई सामने
खुल न जाए पोल इस–
भय से लगें मत काँपने
जीव क्या है, ब्रह्म क्या
तू कौन है, मैं कौन हूँ
स्लेट पर लिख दो ‘महोदय–
आजकल मैं मौन हूँ’
धर्मसंकट शीघ्र ही
इस युक्ति से कट जाएंगे
सामने से तार्किक विद्वान
सब हट जाएंगे।
किये जा निष्काम सेवा
सब फलेच्छा छोड़ कर
याद फल की जब सताए
खा पपीता तोड़ कर
स्वर्ग का झगड़ा गया
भय नर्क का भी छोड़ दे
पाप–घट भर जाए तो
काशी पहुँच कर फोड़ दे।
Kids Portal For Parents India Kids Network