मारू के साथ भयद बाजे,
टप टप टप घोड़े कूद पड़े
कट कट मतंग के रद बाजे
कल कल कर उठी मुगल सेना
किलकार उठी, ललकार उठी
असि म्यान विवर से निकल तुरत
अहि नागिन सी फुफकार उठी
फर फर फर फर फर फहर उठा
अकबर का अभिमानी निशान
बढ़ चला कटक ले कर अपार
मद मस्त द्विरद पर मस्त मान
कोलाहल पर कोलाहल सुन
शस्त्रों की सुन झ्ंकार प्रबल
मेवाड़ केसरी गरज उठा
सुन कर अरि की ललकार प्रबल
हर एकलिंग को माथ नवा
लोहा लेने चल पड़ा वीर
चेतक का चंचल वेग देख
था महा महा लज्जित समीर
लड़ लड़ कर अखिल महीतल को
शोणित से भर देने वाली
तलवार वीर की तड़प उठी
अहि कंठ कतर देने वाली
राणा का ओज भरा आनन
सूरज समान चमचमा उठा
बन महा काल का महा काल
भीषण भाला दम दमा उठा
भेरी प्रताप की बजी तुरत
बज चले दमामे धमर धमर
धम धम रण के बाजे बाजे
बज चले नगारे धमर धमर
अपने पैने हथियार लिये
पैनी पैनी तलवार लिये
आये खर, कुन्त, कटार लिये
जननी सेवा का भार लिये
कुछ घोड़े पर, कुछ हाथी पर
कुछ योद्धा पैदल ही आये
कुछ ले बरछे, कुछ ले भाले
कुछ शर से तरकस भर लाये
रण यात्रा करते ही बोले
राणा की जय, राणा की जय
मेवाड़ सिपाही बोल उठे
शत बार महाराणा की जय
हल्दीघाटी के रण की जय
राणा प्रताप के प्रण की जय
जय जय भारत माता की जय
मेवाड़ देश कण कण की जय
हाथी सवार हाथी पर थे
बाजी सवार बाजी पर थे
पर उनके शोणित मय मस्तक
अवनी पर मृत राजी पर थे
∼ श्याम नारायण पाण्डेय
मतंग ∼ हाथी
रद ∼ दांत
असि ∼ तलवार
अहि ∼ शत्रु
निशान ∼ झंडा
कटक ∼ सेना
द्विरद ∼ हाथी
मान ∼ मानसिंह
महीतल ∼ धरती
शोणित ∼ लहू
आनन ∼ चेहरा
बाजी ∼ घोड़ा
अवनी ∼ धरती
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