चांद सितारों से झांकोगे
पर्वत की ऊंची चोटी से कब तक
दुनियां को देखोगे
आदर्शों के बन्द ग्रंथों में कब तक
आराम करोगे
मेरा छप्पर टपक रहा है
बन कर सूरज इसे सुखाओ
खाली है आटे का कनस्तर
बन कर गेहूं इसमें आओ
मां का चश्मा टूट गया है
बन कर शीशा इसे बनाओ
चुप चुप हैं आंगन में बच्चे
बनकर गेंद इन्हें बहलाओ
शाम हुई है चांद उगाओ
पेड़ हिलाओ हवा चलाओ
काम बहुत है हाथ बटाओ अल्ला मीयां
मेरे घर भी आ ही जाओ अल्ला मीयां
~ निदा फाजली
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