
टिक टिक कर तू चलती है।
हर घंटे के बाद तू,
डिंग डिंग करके बजती है।
तुझे देखकर पता है चलता,
कब खाना, कब पढ़ना है।
तुझे देखकर पता है चलता,
कब उठना, कब सोना है।

टिक टिक कर तू चलती है।
हर घंटे के बाद तू,
डिंग डिंग करके बजती है।
तुझे देखकर पता है चलता,
कब खाना, कब पढ़ना है।
तुझे देखकर पता है चलता,
कब उठना, कब सोना है।
भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और उन गांवों की आत्मा वहां स्थित …