बच्चों की यह रेल है, बड़ा अनोखा खेल है।
यह कोयला नहीं खाती है , इसे मिठाई भाती है।
यह नहीं छोड़ती धुआं, मुड़ जाती देख कर कुआँ।
चलते-चलते जाती रुक,
छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक।
बच्चों की यह रेल है, बड़ा अनोखा खेल है।
यह कोयला नहीं खाती है , इसे मिठाई भाती है।
यह नहीं छोड़ती धुआं, मुड़ जाती देख कर कुआँ।
चलते-चलते जाती रुक,
छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक।
Women’s Day Special: Cinema, much like our society, has been traditionally biased in favor of …