अलविदा अब्दुल कलाम: भारत रत्न की पुण्यतिथि पर दिल छू लेने वाली कविता

अलविदा अब्दुल कलाम: भारत रत्न की पुण्यतिथि पर दिल छू लेने वाली कविता

अलविदा अब्दुल कलाम: 27 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। एक वैज्ञानिक, शिक्षक और भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002-07) के रूप में अपने अद्वितीय समर्पण के चलते वह सभी भारतीयों के लिये प्रेरणास्रोत हैं।

27 जुलाई 2015 को भारत के 11वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का 84 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण निधन हो गया। 30 जुलाई 2015 को उनका राजकीय अंतिम संस्कार किया गया। उनका अंतिम संस्कार उनके आधिकारिक निवास 10 राजाजी मार्ग, नई दिल्ली में किया गया और उनका अंतिम संस्कार उनके गृह नगर रामेश्वरम में किया गया।

अलविदा अब्दुल कलाम

बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष

फिर कभी नहीं उठने के लिए
वृक्ष जो रत्न था

वृक्ष जो शक्तिपुंज था
वृक्ष जो न बोले तो भी

खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना

सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर

वृक्ष अब नहीं उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने

फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें

शान्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए

वृक्ष कभी मरते नहीं
अंकुरित होते हैं।

नए-नए पल्ल्वों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते हैं

किसी के कलाम
अलविदा, अलविदा, अलविदा।।

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