न दें बच्चों को बुरी आदतें

Na Dein Bachcho Ko Buri Aadatein

बच्चों के सामने अपशब्द कहने से बचें। अगर गलती से ऐसा कुछ हो जाए तो उन्हें प्यार से समझाएं कि आपने गलती से गुस्से में यह शब्द बोला है और आगे से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगी अगर बच्चा बाहर से कोई भी गलत शब्द सीखकर आता है तो भी उसे प्यार से उसका इस्तेमाल दोबारा न करने को कहें।

माता-पिता अपने बच्चे की पहली पाठशाला होते हैं और रोल मॉडल भी, इसीलिए मां-बाप का व्यवहार और उनकी आदतें बच्चे के पर्सनैलिटी डीवैल्पमैंट में काफी हद तक असर डालती हैं। अनजाने में ही कई बार आपकी गलत हरकतों का बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। आपकी छोटी-सी बेटी अपनी मां को देखकर अपने छोटे-छोटे खिलौनों में खाना पकती है, साड़ी लपेट कर मेकअप करने की कोशिश करती है या फिर  आपका बेटा आपकी तरह पेंटिंग करने के चक्कर में आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचते हुए अपने कपड़े या फर्श खराब करता है तो आप उन्हें सीखते हुए देखते काफी खुश होती हैं। जब वही बच्चे किन्हीं गलत आदतों का शिकार हो जाएं तो आप को समझ नहीं आता कि क्या करें जैसे:

गलत भाषा का प्रयोग:

कई बार बच्चों को डांटते समय गुस्से में हमारे मुंह से कुछ गलत शब्द नीकल जाते हैं। बार-बार उन अपशब्दों के प्रयोग का बच्चों पर गलत असर पड़ता है। वे भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं।

क्या है सही:

बच्चों के सामने अपशब्द कहने से बचें। अगर गलती से ऐसा कुछ हो जाए तो उन्हें प्यार से समझाएं कि आपने गलती से गुस्से में यह शब्द बोला है और आगे से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगी अगर बच्चा बाहर से कोई भी गलत शब्द सीखकर आता है तो भी उसे प्यार से उसका इस्तेमाल दोबारा न करने को कहें।

बात-बात पर गुस्सा करना:

कई बार हम बच्चों की मौजूदगी में ही किसी न किसी से लड़ना या किसी पर गुस्सा करना शुरू कर देते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों की मस्ती करने पर भी ऊन्हें डांट देते हैं। आपको बात-बात पर गुस्सा करते देख बच्चे भी वही सीखते हैं। नतीजा यह होता है कि वे अपने भाई या बहन से बात करते समय चीखने-चिल्लाने जैसी हरकतें करने लगते हैं।

क्या है सही:

अपनी आदतें बदलने की कोशिश करें। गुस्सा हर इंसान को आता है लेकिन आप उनके सामने शांत दिमाग से काम लें। बच्चों को ऐसी कहानियां सुनाएं, जिनमें बुरा व्यवहार करने वालों का बुरा अंत हुआ हो। इस प्रकार बच्चे समझ जाएंगे कि ऐसा व्यवहार करना सही नहीं होता।

टी.वी. से चिपके रहना:

अधिकतर मांएं बच्चों को ज्यादा टी.वी. न देखने की नसीहत देते हुए खुद सारा समय सास बहू के सीरियल देखती रहती हैं। मां की देखादेखी जब बच्चे भी टी.वी. देखने लगते है, तो उन्हें पढने की सलाह दे दी जाती है। ऐसे में बच्चों का पढाई में मन नहीं लगता और वे मां से छुप कर टी.वी. देखने लगते हैं।

क्या है सही:

बच्चों को टी.वी. न देखने की सीख देने से पहले स्वयं को बदलें। अपनी टी.वी. पर चिपके रहने की आदत पर नियंत्रण रखें। उन्हें एक डेढ़ घंटा टी.वी. देखने दें और इस बात को फन टाइम से जोड़ने की कोशिश करें। यह ध्यान रखें कि बच्चे क्या देख रहे हैं। हो सके तो उनके साथ बैठे और बीच-बीच में उनसे बातें करती रहें।

जंक फूड अधिक खाना:

कई मांओं की आदत होती है कि बाजार ने चाट-पकौड़े, समोसे, पेस्ट्री या केक देख कर वे स्वयं पर कंट्रोल नहीं रख पातीं। जब आपका बच्चा ऐसी चीजों की फरमाइश करता है तो आप उसे दस तरह की हैल्थ से संबंधित बातें सुनाकर खाने से मना कर देती हैं। बच्चों को तो जंक फूड वैसे ही बहुत पसंद होता है और वे आप से छुप कर स्कूल में या किसी ठेले वाले से जंक फूड खाने लगते हैं।

क्या है सही:

पहले अपनी आदत पर रोक लगाएं। बच्चों को जंक फूड से होने वाले बुरे प्रभावों के बारे में बताएं। उन्हें घर पर चाट, समोसे, बर्गर व पिज्जा जैसी चीजें बनाकर दें। कभी-कभार बाहर खाने में कोई नुकसान नहीं लेकिन जंक फूड के प्रति दीवानगी न रखें।

आलसीपन, झूठ बोलना व चुगली करना:

ठीक है कि दिन भर घर के कामों से आप थक जाती हैं। बच्चों के स्कूल से आने पर प्यार से उन्हें खाना खिलाती हैं और होमवर्क भी कराती हैं पर कभी-कभी बच्चे कुछ ऐसा डिमांड कर देते हैं कि आप खीझ कर कह देती हैं कि मैं तो बहुत थक गई हूँ। मुझ से यह काम नहीं होगा। उसी दौरान आप फोन या पड़ोसन से किसी न किसी की चुगली करने लगती हैं। कई बार बातों-बातों में आप झूठ भी बोल देती हैं। इन सभी बातों को बच्चे बड़ी सीरियसली लेते हैं और उनके मन पर ऐसी बातों का असर भी पड़ने लगता है।

क्या है सही:

बच्चों के सामने अपनी इमेज अच्छी रखें। उन्हें अच्छा साहित्य पढने को दें। बच्चों के हर काम को उनके साथ मिलकर पुरे मन से करें। इससे उन्हें सुरक्षा का एहसास होगा और वे अपनी हर बात आपसे कह पाएंगे।

_______ गगन

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