ऊंटों के कूबड़ क्यों होता है? Why do camels have humps?

ऊंटों के कूबड़ क्यों होता है? Why do camels have humps?

ऊंट को ‘मरुस्थल का जहाज‘ कहा जाता है, क्योंकि इसमें कई दिनों तक बिना भोजन तथा पानी के रहने की क्षमता होती है। ये बिना किसी बड़े खतरे के अपने शरीर के द्रव्य की एक-तिहाई मात्रा तक पानी की कमी सहन कर सकते हैं। इनकी नाक, कान तथा आंखें कुछ इस तरह से बनी होती हैं कि इन पर मरुस्थलीय धूल का बहुत कम प्रभाव पड़ता है। ये मरुस्थल के यात्रियों के लिए अत्यधिक उपयोगी जानवर हैं और काफी वजन उठा सकते हैं।

ऊंटों के कूबड़ क्यों होता है? Why do camels have humps?

ऐसा अक्सर माना जाता है कि ऊंटों को नियमित रूप से भोजन की आवश्यकता नहीं होती, परंतु यह धारणा गलत है। अपनी शारीरिक विशेषताओं के कारण ऊंट कई दिनों तक सीमित भोजन और पानी के सहारे रह सकते हैं। ऊंट की पीठ पर एक बड़ा कूबड़ होता है, जो वास्तव में वसा का भंडार होता है। ऊंट मरुस्थल में अपनी लंबी यात्राओं के दौरान इस वसा को ऊर्जा के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

यह धारणा भी सही नहीं है कि ऊंट अपने कूबड़ में पानी जमा करके रखते हैं। उनके शरीर में पानी का भंडारण विशेष रूप से किसी थैली में नहीं होता।

ऊंट जब पानी उपलब्ध होता है, तब एक बार में बड़ी मात्रा में पानी पी सकते हैं। उनका शरीर पानी की कमी को सहने और उपलब्ध पानी का अधिक कुशलता से उपयोग करने के लिए अनुकूलित होता है।

लंबी यात्रा शुरू करने से पहले ऊंट पर्याप्त भोजन और पानी लेते हैं। भोजन से उनके कूबड़ में वसा जमा होती है, जिसका इस्तेमाल यात्रा के दौरान ऊर्जा के स्रोत के रूप में होता है। लंबे समय तक भोजन की कमी के बाद कूबड़ छोटा और ढीला दिखाई दे सकता है, क्योंकि उसमें जमा वसा का उपयोग हो चुका होता है। पर्याप्त भोजन और पानी मिलने पर ऊंट धीरे-धीरे फिर स्वस्थ और ताकतवर हो जाते हैं।

लंबे समय से मानव के सहयोगी रहे ऊंटों को लगभग 3,000 वर्ष पहले पालतू बनाया जाना शुरू हुआ माना जाता है। ऊंट मुख्यतः एशिया और अफ्रीका में पाए जाते हैं। एक कूबड़ वाले ऊंट, जिन्हें ‘ड्रोमेडरी‘ कहा जाता है, मुख्यतः उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में पाए जाते हैं, जबकि दो कूबड़ वाले ऊंट, जिन्हें ‘बैक्ट्रियन‘ ऊंट कहा जाता है, मध्य एशिया के क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

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