‘जी.पी.एस.’ क्या है?
जी.पी.एस. अर्थात ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम की शुरुआत अमेरिका ने अपनी सेना के उपयोग के लिए की थी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इसे आम लोगों के लिए भी उपयोगी बनाने पर ज़ोर दिया। फरवरी 1999 में पहला ब्लॉक–2 सैटेलाइट लॉन्च किया गया। 27 अप्रैल, 1995 से यह प्रणाली पूर्ण रूप से कार्य करने लगी।
जी.पी.एस. प्रणाली तीन मुख्य भागों से मिलकर बनी होती है। पहला भाग वे उपग्रह हैं, जो पृथ्वी के चारों ओर लगातार परिक्रमा करते रहते हैं। दूसरा भाग पृथ्वी पर स्थित नियंत्रण केंद्र होता है, जहाँ से इन उपग्रहों की निगरानी और संचालन किया जाता है। तीसरा भाग जी.पी.एस. रिसीवर होता है, जो उपयोगकर्ता के पास रहता है।
जी.पी.एस. रिसीवर अपनी स्थिति का आकलन पृथ्वी के ऊपर स्थित जी.पी.एस. उपग्रहों के समूह द्वारा भेजे गए संकेतों के आधार पर करता है। प्रत्येक उपग्रह लगातार संकेत प्रसारित करता रहता है। रिसीवर इन संकेतों के पहुँचने में लगे समय को दर्ज करता है और प्रत्येक उपग्रह से दूरी की गणना करता है।
अधिक सटीक गणना के लिए रिसीवर आमतौर पर चार उपग्रहों के संकेतों का उपयोग करता है। इससे उपयोगकर्ता की त्रि-आयामी स्थिति की जानकारी मिलती है, जिसमें अक्षांश, देशांतर और ऊँचाई शामिल होती है।
जी.पी.एस. प्रणाली किसी स्थान की स्थिति ज्ञात हो जाने के बाद उससे संबंधित अन्य जानकारियाँ भी प्रदान करती है, जैसे गति, दिशा, दूरी, मार्ग की जानकारी तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय आदि।
जी.पी.एस. के उपयोग
प्रारंभ में जी.पी.एस. का उपयोग केवल सैन्य कार्यों तक ही सीमित था, लेकिन आम जनता के लिए इसके उपयोग की अनुमति मिलने के बाद अनेक क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता बढ़ती चली गई। वर्तमान समय में इसका उपयोग नक्शा बनाने, ज़मीन का सर्वेक्षण करने, वाणिज्यिक कार्यों, वैज्ञानिक प्रयोगों, सर्विलांस ट्रैकिंग तथा जियोफेंसिंग जैसे कार्यों में किया जा रहा है।
आज लगभग हर स्मार्टफोन में जी.पी.एस. सुविधा उपलब्ध है, जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता अपनी वर्तमान स्थिति का पता लगा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में भी जी.पी.एस. की मदद से सही लोकेशन की जानकारी प्राप्त की जाती है।
आपदा प्रबंधन के समय जी.पी.एस. के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है और पीड़ितों तक सहायता पहुँचाई जा सकती है। भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में मित्रों या परिजनों की लोकेशन जानने में भी जी.पी.एस. अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
आज बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों को दिए जाने वाले जी.पी.एस. युक्त घड़ी या ब्रेसलेट के माध्यम से उनकी लोकेशन कभी भी ज्ञात की जा सकती है, जो उनकी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।
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