शिक्षक दिवस स्पेशल: शिक्षकों का बहुत सम्मान करते थे डॉ. अब्दुल कलाम

शिक्षक दिवस स्पेशल: शिक्षकों का बहुत सम्मान करते थे डॉ. अब्दुल कलाम

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बाद भारत के दिवंगत राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एक ऐसे महान व्यक्ति रहे हैं, जिन्होंने शिक्षकों को सबसे अधिक सम्मान दिया। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि दुनिया में शिक्षक का स्थान सबसे ऊंचा है क्योंकि शिक्षक ही अपने छात्रों को सर्वोच्च पदों पर पहुंचाता है। माता-पिता बच्चों को जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक उन्हें ज्ञान देकर जीवन के गुर सिखाते हैं।

शिक्षक दिवस स्पेशल: डॉ. अब्दुल कलाम की आत्मकथा से लिया गया लेख

वह कहते थे कि जिस तरह एक किसान अपनी फसलों को लहलहाते देख खुश होता है, उसी तरह एक शिक्षक अपने बच्चों को अधिक से अधिक प्रगति करते और खुशहाल जीवन जीते हुए देखकर खुश होता है।

उनके जीवन की कई घटनाओं से पता चलता है कि वह न केवल विचारों में, बल्कि वास्तव में भी शिक्षकों का बहुत सम्मान करते थे। राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले, उन्होंने अपने शिक्षकों से मुलाकात की और कहा – मैं आपकी कृपा से ही राष्ट्रपति पद तक पहुंचा हूं।

उनका विज्ञान का अध्यापक एक हिन्दू ब्राह्मण था। एक दिन, वह कलाम साहब को दोपहर का भोजन खिलाने के लिए अपने घर ले गया। उस विज्ञान अध्यापक की पत्नी सरल विचारों वाली महिला थी। उसने अध्यापक से पूछा कि वह एक मुस्लिम बच्चे को अपने घर भोजन कराने क्यों लाए हैं? मगर अध्यापक ने कलाम साहब को बड़े प्रेम से भोजन कराया।

कलाम साहब ने अध्यापक की पत्नी की बातें सुन ली थीं। अध्यापक उन्हें दरवाजे तक छोड़ने आए, तो उन्होंने कहा, “श्रीमान, आपकी पत्नी मुझे पसंद नहीं करती, तो आपको मुझे घर नहीं लाना चाहिए था।”

अध्यापक ने कहा, “कलाम, जब हम नई व्यवस्थाएं स्थापित करते हैं, तो कठिनाइयां अवश्य आती हैं। अब जब आप दोबारा हमारे घर आएंगे, तो आपको ऐसी बातें सुनने को नहीं मिलेंगी।”

जब वह अध्यापक कलाम साहब को दोबारा भोजन कराने के लिए लाए, तो उनकी पत्नी ने स्वयं उन्हें बड़े प्रेम से भोजन कराया। उस विज्ञान अध्यापक ने कलाम साहब से कहा था, कलाम, आप आने वाले समय में देश में बहुत ऊंचे पद पर पहुंचेंगे। देश के महान वैज्ञानिक बनने के बाद, वह सबसे पहले उन अध्यापक से मिलने गए। एक बार डॉ. कलाम राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। उन्होंने देखा कि मंच पर कुर्सियों में एक बीच वाली कुर्सी ऊंची रखी गई है।

कलाम साहब ने व्यवस्थापकों से पूछा, यह बीच वाली ऊंची कुर्सी क्यों रखी गई है? उन्हें जवाब मिला कि यह कुर्सी आपकी है क्योंकि आपका पद सबसे ऊंचा है और आप मुख्य अतिथि हैं। कलाम साहब ने उत्तर दिया, सबसे ऊंचा पद विश्वविद्यालय के कुलपति का होता है, जो बच्चों को शिक्षित करता है और उन्हें ऊंचे पदों तक पहुंचने में मदद करता है। कलाम साहब ने उस ऊंची कुर्सी पर खुद न बैठकर उस विश्वविद्यालय के कुलपति को बैठाया।

एक बार कलाम साहब अपने क्षेत्र के एक कॉलेज के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आ रहे थे। वह समारोह में एक दिन पहले ही हैलीकॉप्टर से पहुंच गए थे।

उन्हें अपने एक प्राथमिक शिक्षक से मुलाकात याद आई जो समारोह स्थल से सौ किलोमीटर दूर रहते थे। कलाम साहब टैक्सी लेकर उनसे मिलने अकेले उनके घर पहुंचे। कलाम के अनुसार, वह इतने मेहनती थे कि सबसे नाकाबिल बच्चों को तो गणित पढ़ाते थे, लेकिन लापरवाह बच्चों को कड़ी सजा देते थे इसीलिए कई बच्चे उन्हें पसंद नहीं करते थे, लेकिन मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक था क्योंकि उनकी गणित पढ़ाने की शैली ने मेरी रुचि जगा दी थी।

शिक्षकों के प्रति उनका इतना सम्मान था कि उन्होंने एक बार देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर दो-दो सर्वश्रेष्ठ शिक्षक भेजने का अनुरोध किया था। कलाम साहब ने देश भर के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के साथ चाय पी और उनसे पूछा कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक क्यों चुना गया। उन्होंने उन्हें किताबें देकर सम्मानित किया।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि मुझे शिक्षक बनना बहुत पसंद है क्योंकि इससे मुझे अपने छात्रों को सर्वोच्च पदों पर पहुंचाकर अपने देश के विकास में योगदान देने का अवसर मिलेगा।

~ ‘शिक्षकों का बहुत सम्मान करते थे डॉ. अब्दुल कलाम’ article by ‘प्रिं. विजय कुमार’

Pramukh Swamiji was Kalam’s guru. Dr. A.P.J. Abdul Kalam considered Pramukh Swamiji, the spiritual leader of the BAPS Swaminarayan Sanstha, to be his “ultimate teacher and guru” and wrote the book Transcendence: My Spiritual Experiences with Pramukh Swamiji to share his profound spiritual experiences with him. Their spiritual association began in 2001 and spanned several years, influencing Kalam’s personal and spiritual development.

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