सबसे 'झूठा' कौन? शेख चिल्ली का किस्सा बच्चों के लिए

सबसे झूठा कौन? शेख चिल्ली का किस्सा बच्चों के लिए

शेख चिल्ली का किस्सा: झज्जर के नवाब युद्ध लड़ने के लिए कई महीनों से बाहर गए थे। उनकी अनुपस्थिति में उनके छोटे भाई- छोटे नवाब ही राज-पाट का सारा काम संभालते थे। नवाब साहब धीरे- धीरे करके शेख चिल्ली को चाहने लगे थे। उन्हें उसकी सरलता में आनंद आता था, परंतु छोटे नवाब शेख चिल्ली को पूरी तरह बेवकूफ और कामचोर मानते थे।

एक दिन उन्होंने भरी सभा में शेख चिल्ली को डाटा और उसका अपमान किया।

सबसे झूठा कौन? शेख चिल्ली का किस्सा

उन्होंने कहा, “एक अच्छा आदमी बताए हुए काम से भी कहीं ज्यादा काम करता है और एक तुम हो, जो सरल से काम को भी ठीक ढंग से नहीं कर पाते हो।”

“तुम अस्तबल में घोड़ा लेकर जाते हो पर उसे बांधना भूल जाते हो। तुम जब कोई बोझा उठते हो तो या तो गिर जाते हो या फिर तुम्हारे पैर लड़खड़ाते हैं। तुम जो काम करते हो, उसे ध्यान लगाकर क्‍यों नहीं करते हो?”

दरबार में कई सदस्यों को यह सुनकर मजा आया। इस दौरान शेख चिल्ली अपना मुंह लटकाए रहा। छोटे नवाब राज-पाट के काम में ज्यादा रुचि नहीं लेते थे।

वह अपना अधिकतर समय शिकार, शतरंज या अन्य खेलों को खेलने में बिताते थे। एक दिन उन्होंने एक प्रतियोगिता रखी, जिसमें सबसे बड़े झूठ बोलने वाले को विजयी घोषित किया जाना था। जीतने वाले को सोने की एक हजार मोहरें भी मिलनी थीं!

कई झूठ बोलने में माहिर लोग ईनाम जीतने के लिए सामने आए। एक ने कहा “सरकार मैंने भेंसों से भी बड़ी चींटियां देखीं हैं जो एक बार में चालीस सेर दूध देती हैं।”

“क्यों नहीं?” छोटे नवाब ने कहा। “यह संभव है।”

“सरकार हर रात मैं चंद्रमा तक उड़ते हुए जाता हूं और सुबह होने से पहले ही उड़कर वापस आ जाता हूं।” एक अन्य झूठ बोलने वाले ने डींग हांकी।

“हो सकता है।” छोटे नवाब ने कहा। लगता है कि तुम्हारे पास कोई रहस्यमयी ताकत है।”

“सरकार…” एक तोंद निकले मोटे आदमी ने कहा, “जबसे मैंने एक तरबूज के कुछ बोज निगले हैं, तब से मरे पेट में छोटे-छोटे तरबूज पैदा हो रहे हैं। जब कोई तरबूज पक जाता है तो वह फूट जाता है और उससे मुझे अपना भोजन मिल जाता है। अब मुझे और कुछ खाने को जरूरत ही नहीं पड़ती।”

“तुमने किसी ताकतवर तरबूज के बीज निगल लिए होंगे।” छोटे नवाब ने बिना पलकें झपकाए कहा।

“सरकार, क्‍या मुझे भी बोलने की इजाजत है?” शेख चिल्ली ने पूछा।

“जरूर।” छेटे नवाब ने ताना कसते हुए कहा। “तुमसे हम किन प्रतिभाशाली शब्दों की उम्मीद करें?”

“सरकार।” शेख चिल्ली ने जोर से कहा, “आप इस पूरे राज्य के सबसे बड़े बेवकूफ आदमी हैं। आपको नवाब के सिंहासन पर बैठने का कोई हक नहीं है!”

पूरी राजसभा में सन्नाटा छा गया। तब छोटे नवाब चिल्लाए, “पहरेदारों, इस नाचीज को गिरफ्तार कर लो।”

शेख चिल्ली को पकड़ा गया और खींच कर लाया गया।

“निकम्मे बेशर्म।” छोटे नवाब का गुस्सा उबल कर बाहर निकला, “तुम्हारी यह जुर्रत कैसे हुई! अगर तुमने इसी वक्त हमारे पैरों में गिरकर माफी नहीं मांगी तो तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा।”

“पर सरकार…” शेख चिल्ली ने विरोध जताते हुए कहा, “आपने ही तो कहा था कि आप दुनिया का सबसे बड़ा झूठ सुनना चाहते हैं।” फिर वह निष्कपट भाव से छोटे नवाब को देखने लगा। “जो कुछ मैंने कहा उससे बड़ा क्या और कोई झूठ हो सकता है?”

छोटे नवाब को समझ में नहीं आया कि क्या करे! क्‍या शेख चिल्ली अब झूठ बोल रहा है या वह पहले झूठ बोल रहा था?

शेख चिल्ली उतना बड़ा बेवकूफ नहीं था, जितना छोटे नवाब उसे समझते थे! छोटे नवाब धीमे से हंसे और बोले, “शाबाश! तुम ईनाम जीते!”

सब लोगों ने शेख चिल्ली को अकल को सराहा। वह शान से सोने की हजार मोहरें लेकर घर गया। ‘छोटे नवाब चाहे थोड़े बेवकूफ हों, परंतु वह हैं दिलदार’ शेख चिल्ली ने सोचा।

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