संघर्ष में छिपा सफलता का रहस्य: जापान की प्रेरक लोककथा

संघर्ष में छिपा सफलता का रहस्य: जापान की प्रेरक लोक कथा हिंदी में

संघर्ष में छिपा सफलता का रहस्य: यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जो एक व्यापारी था, लेकिन उसका व्यापार डूब गया था और वह पूरी तरह निराश हो गया था। अपनी जिंदगी से वह बुरी तरह थक-हार चुका था।

संघर्ष में छिपा सफलता का रहस्य: जापान की लोक कथा बच्चों के लिए

एक दिन परेशान होकर वह जंगल में गया और बहुत देर तक अकेले बैठा रहा। कुछ सोचकर भगवान को संबोधित करते हुए बोला, “भगवान! मैं हार चुका हूं, मुझे कोई एक कारण बताइए कि मैं क्यों हताश न होऊं, मेरा सब कुछ खत्म हो चुका है। कृपया मेरी मदद करें।”

वहां से गुजर रहे एक बुजुर्ग ने उसकी बात सुनी तो उसके पास आकर बोले, “तुम जंगल में इस घास और बांस के पेड़ को देखो। जब मैंने घास और इस बांस के बीज को लगाया, तो मैंने इन दोनों की ही बहुत अच्छे से देखभाल की। इनको बराबर पानी दिया, बराबर रोशनी दी। घास बहुत जल्दी बड़ी होने लगी और इससे धरती को हरा-भरा कर दिया, लेकिन बांस का बीज बड़ा नहीं हुआ पर मैंने बांस के लिए अपनी हिम्मत नहीं हारी।”

उन्होंने आगे कहा, “दूसरे साल घास और घनी हो गई। उस पर झाड़ियां भी आने लगीं, लेकिन बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, मैंने फिर भी बांस के बीज के लिए हिम्मत नहीं हारी। तीसरे साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन मित्र! मैंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। चौथे साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन मैं फिर भी लगातार लगा रहा। पांच साल बाद, बांस के बीज से एक छोटा-सा पौधा अंकुरित हुआ, घास की तुलना में यह बहुत छोटा और कमजोर था, लेकिन केवल छह महीने बाद यह छोटा-सा पौधा 100 फुट लंबा हो गया।”

मैंने इस बांस की जड़ को विकसित करने के लिए पांच साल का समय लगाया। इन पांच सालों में इसकी जड़ इतनी मजबूत हो गई कि 100 फुट से ऊंचे बांस को संभाल सके। जब भी आपको जीवन में संघर्ष करना पड़े तो समझिए कि आपकी जड़ मजबूत हो रही है। आपका संघर्ष आपको मजबूत बना रहा है, ताकि आप आने वाले कल को सबसे बेहतरीन बना सको। मैंने बांस के संदर्भ में हार नहीं मानी। तुम अपने विषय में भी हार नहीं मानो। किसी दूसरे से अपनी तुलना मत करो। घास और बांस दोनों के बड़े होने का समय अलग-अलग है, दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। तुम्हारा भी समय आएगा। तुम भी एक दिन बांस के पेड़ की तरह आसमान छूओगे। मैंने हिम्मत नहीं हारी, तुम भी मत हारो।”

शिक्षा: अपनी जिंदगी में संघर्ष से मत घबराओ, यही संघर्ष हमारी सफलता की जड़ों को मजबूत करेगा। हमेशा अपने छोटे-छोटे प्रयासों को जारी रखें, सफलता एक न एक दिन अवश्य मिलेगी।

~ संकलनकर्ता: सुरेन्द्र मोहन गुप्ता

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