एक जंगल में कुछ शिकारी आये। उन्होंने जाल बिछाया और एक शेर को पकड लिया। पिंजरे में शेर को बंध कर वो शहर ले आये, एक वैज्ञानिक ने उस शेर को ऊंचे दाम देकर खरीद लिया। उस वैज्ञानिक का मासूम प्राणियो पर तरह तरह के प्रयोग करना मनपसंद विषय था। इंसानों द्वारा प्रयोग की जाने वाली चीजो का प्राणियो पर …
Read More »सवाल मेरे – जवाब मेरी आत्मा के
आज फिर से वह अस्पष्ट आकृती मेरे सामने आई मंद मंद मुस्कुराते हुए उसने पुछा “इतना खुश क्यो हो पगले!” आखरी शब्द को सुना अनसुना कर मैंने कहा “आत्माजी कल मेरा जन्मदिन है!” मेरी आत्मा बोली “मतलब?” मैं: मतलब आज के दिन ही मेरा जन्म हुआ था! आत्मा: तेरा जन्म कब हुआ? मैंने कहा: २९/०९/@#$# आत्मा: तो इससे पहेले तू …
Read More »जियो ओर जीने दो – प्रशांत सुभाषचन्द्र साळुंके
मैँ मेरे कुछ दोस्तो के साथ बैठा था। इधर उधर की बातें हो रही थी। अचानक सड़क किनारे से एक गाड़ी गुजरी। मेरा एक दोस्त उसे देखकर बावला सा हो गया ओर बुरी तरह से भौंकते हुवे उस गाड़ी के पीछे भागा। हम सब को उसका व्यवहार बड़ा विचित्र लगा! हम कुत्ते है! पर इतना तो जरूर समझ सकते है …
Read More »जान है तो जहान है
एक गाँव मे एक किसान रहता था। उन दिनों गाव पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। गाँव में सुखा पड़ा था। लोगों को पीने के पानी के लिए भी लाले पड़ गए थे। धरती बंजर हो गई थी। और आसमान से बारिश गिरने के कोई भी आसार नजर नहीं आ रहे थे। ऐसी परिस्थिति मे गाँव वालो ने गाँव …
Read More »मेरी लूसी: प्रशांत सुभाषचंद्र सालुंके
एक समय की बात है, किसी गाव मे एक किसान रहता था। उसकी एक छोटी बेटी मेरी ओर एक बढ़िया नस्ल की कुतिया लूसी थी। लूसी हमेशा मेरी के साथ रहती। उसके साथ स्कूल मे जाती। शाम को उसके साथ खेलती। दोनो बहुत खुश थे। एक दिन अचानक गांव मे बरसात आई। इन्द्रदेव जेसे कोपामायन हुवे थे। बादलो मे से पानी टपक …
Read More »टेक्नोलॉजी
दादाजी की गोदी मे खेलते हुए बच्चे ने बड़े प्यार से दादाजी को पूछा “दादाजी दादाजी… मेरा पहला जन्मदिन आपको याद है?” दादाजी ने अपनी अनुभवी आंखो को सिकुड़ते ओर माथे की पेशनि को तंग करते अपने विचारो के घोड़े दौड़ाये ओर कहा “ना बेटे अब इतनी पुरानी बाते किसे याद होगी? तेरा पहला जन्मदिन जब तु एक साल का …
Read More »भिन्नता सफर की!
ट्रेन में सफ़र करते समय मन में विचार आया। सफर के दौरान कितने खूबसूरत द्रश्य हमारी आँखों के सामने से गुजर जाते हैं पर हमे उससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता! क्यों? थोडी देर के बाद आँखों के सामने कुछ देर के लिए आते है ऐसे द्रश्य जो हम देखना पसंद नहीं करते मसलन गन्दी नालिया या कचरों के ढेर …
Read More »दोस्ती
“देख दोस्त तुझे ये करना तो पड़ेगा ही।” सिगरेट को आगे करते हुए मीनेश ने दर्पण से कहा। कबीर इंडस्ट्रीज के मालिक करण मल्होत्रा का एकलोता पुत्र दर्पण जो बचपन से पढ़ाई में होशियार था। आज अपने एक टपोरी दोस्त मीनेश के साथ बगीचे में बैठा था। मीनेश ने सिगरेट का कश लेकर हवा में धुवा उड़ाते हुए दर्पण से …
Read More »किसका भगवान श्रेष्ठ?
किसी जंगल मे दो कबिले “इनसा” ओर “परिकान” थे। दोनो कबिलो मे संप्रदायीक लड़ाईया होती रहेती थी। इन लड़ाइयों में कई लोगो की जाने गई, कई परिवार ख़त्म हुए, पर इनकी दुश्मनी ख़त्म ना हुई! उस गॉव मे एक समझदार बूढ़ा रहता था। उसने इस लडाई को ख़त्म करने की ठानी, उसने दोनो गावो के मुखिया किंबो ओर ओलान्गो को …
Read More »अंदर बाहर – भाग 2
अब तक आपने पढ़ा की एक गाँव मे हुई तेज बारिश से बचने के लिए लोगो ने एक मंदिर का सहारा लिया। एक एक करके लोग बढ़ने लगे। तब सब ने निर्णय लिया की जो बहार है उसे बहार ही रहने दो, सभी के मना करने के बावजूद मुखिया ने एक बूढ़े को मंदिर के अंदर लिया, जब एक दूसरी …
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