भगवद चिन्तन

भगवद चिन्तन

आपके विचार आपके जीवन का निर्माण करते हैं. यहाँ संग्रह किये गए महान विचारकों के हज़ारों कथन आपके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

  • जिसकी स्तुति होगी उसी की निंदा होगी। स्तुति करने वाले हाथ जोड़े आगे खड़े होंगे तो निंदा करने वाले पीछे पड़े होंगे।
    शबरी माता की कितनी स्तुति हुई और कितनी निंदा हुई पर शबरी माता को तो न स्तुति से मतलब न निंदा से मतलब शबरी माता को तो बस अपने राम जी से मतलब।
  • इसी प्रकार साधक को निंदा और स्तुति दोनों परिस्थिति में सम रहना चाहिए। हर क्षण अपने प्रभु की स्मृति बनाये रखनी चाहिये।
  • केवल सेवा करने के लिए ही दूसरों से सम्बन्ध रखो, कुछ लेने के लिए सम्बन्ध रखोगे तो दुःख पाना पड़ेगा।
    लेने के भाव से भोग होता है, और देने के भाव से योग होता है।
  • सज्जन बनो लेकिन सक्रिय सज्जन बनो। आज समस्या है कि सज्जनता निष्क्रिय है और दुर्जनता सक्रिय है। राष्ट्र का जितना नुकसान दुष्टों की दुष्टता से नही हुआ जितना सज्जनों की निष्क्रियता से हुआ है।
  • दुष्टों की दुष्टता समस्या नही है, अच्छे लोगों की निष्क्रियता समस्या है। स्वामी राम कहा करते थे कि अच्छे लोगों से ज्यादा बुरे लोग संकल्पी होते है। वो कभी निराश नहीं होते। चोर चोरी करने जाता है कई दिन तक कुछ ना भी मिले तो भी वह निराश नहीं होता।

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