यह घटना उस समय की है जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। यहां आकर बसने वाले अंग्रेज पुरुष स्वयं को बड़ा अधिकारी मानते थे और हमारे देश की मां-बहन-बेटियों को अपमानित करते रहते थे। ऐसी घटनाओं से भारत का इतिहास भरा पड़ा है जिसमें उनके द्वारा भारतीय महिलाओं का घोर अपमान हुआ था।
वीर बालिका ‘मरीचि’: प्रभा पारीक
हमारे देश की एक वीर बालिका मरीचि ने अंग्रेजों के इस तरह के अन्याय का डटकर सामना किया। उसके साथ भी इसी तरह की एक घटना हुई किन्तु मरीचि ने जो सीख एक अंग्रेज को दी, उसे अंग्रेज जाति जीवनपर्यंत सदियों तक याद रखेगी।
भारत के उत्तर में नेपाल और भूटान के बीच में सिक्किम एक छोटा-सा राज्य है। वहां के सरकारी अधिकारी यशपाल सिंह की पुत्री बड़ी ही सुंदर, वीर और भगवान की भक्त थी।
यशपाल सिंह की पुत्री का नाम था मरीचि। वह अत्यंत रूपवान, वीर बालिका होने के साथ-साथ प्रभु की आराधक भी थी।
यह तो विश्व प्रसिद्ध है ही कि सिक्किम की सब कन्याएं वीरता में अग्रणी होती हैं। इस कारण इस कन्या की वीरता के संबंध में भी किसी को कुछ भी संदेह नहीं रह जाता।
सिक्किम की कन्याएं प्रायरू जंगल में कभी घूमने तो कभी लकड़ियां बटोरने या औषधियों के लिए जड़ी-बूटियां ले जाया ही करती हैं। वहां की इन लड़कियों का एक अलग ही प्रकार का स्वभाव होता है। वे जब जंगल में जाती हैं तो अपने जूड़े में एक छुरी घोंप कर घर से निकलती हैं।
यह छुरी वन्य पशुओं से बचने के लिए और जड़ी-बूटियां एकत्रित करने व कभी-कभी घास काटने में सहायक होती है। मरीचि को भी वन में घूमना बहुत पसंद था। वह अपने जूड़े में छुरी घोंप कर वन में दूर-दूर तक चली जाती और वहां से सुंदर फूल और फल इकट्ठे करके वापस आती।
एक दिन मरीचि अपनी छोटी बहन के साथ वन में गई थी। दोनों बहनें वहां इधर-उधर दौड़ कर खेल रहीं थीं। एक अंग्रेज वहां झाड़ी के पीछे छिपा दोनों को देख रहा था। वह मरीचि की सुंदरता पर मोहित हो गया। उसने झाड़ी से बाहर आकर मरीचि को पुकारा। भोली-भाली मरीचि उसके पास जाकर खड़ी हो गई।
वह अंग्रेज एकटक मरीचि को देखने लगा। यह बात मरीचि को बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। वह वापस लौटने के लिए मुड़ी तो अंग्रेज बोला, “रुको, तुम नहीं जानती कि मैं यहां का अफसर हूं। मैं तुमको पसंद करता हूं। तुम मेरे बंगले पर चलो और सुख से रहो।”
मरीचि को अब समझ आ गया था कि अंग्रेज अफसर की उसके प्रति नीयत बुरी है। उसने अंग्रेज से कहा, “तुम्हें एक लड़की से ऐसी बात करते शर्म नहीं आती?”
अंग्रेज तो अपनी शान में अंधा हुआ था। उसने मरीचि का हाथ पकड़ लिया। मरीचि एक झटके से हाथ छुड़ाकर गरजती हुई बोली, “साहब बहादुर! अब थोड़ा भी आगे बढ़े तो खबरदार।”
पर अंग्रेज को लग रहा था कि एक छोटी लड़की भला मेरा क्या बिगाड़ लेगी। वह आखिर कर ही क्या सकती है। उसने फिर से मरीचि का हाथ पकड़ लिया। इस बार उसने हाथ को कस कर पकड़ा था।
अब मरीचि ने मन ही मन भगवान को पुकारा और बाएं हाथ से अपने जूड़े से छुरी निकाल कर उसे अंग्रेज की छाती में भोंक दिया। अंग्रेज भूमि पर गिरा और तड़पने लगा।
मरीचि अपनी बहन के साथ घर लौट आई। उसकी छोटी बहन ने अपने पिता को सारी बात बताई। इतने में कुछ अंग्रेज सैनिक घोड़े पर सवार होकर आए। उन्होंने यशपाल सिंह के घर को चारों ओर से घेर लिया।
उस घायल अंग्रेज ने अपने साथियों को बताया कि यशपाल सिंह की लड़की ने बिना कारण ही उसे मारा है। जब मरीचि ने देखा कि उसके पिता को और उसके घर को अंग्रेजों ने घेर लिया है तब मरीचि को बहुत गुस्सा आया। वह अपनी छुरी लेकर बाहर आई और उसने उन सब अंग्रेजों को ललकारते हुए कहा, “मैंने तुम्हारे दुष्ट साथी को मारा है, जो भी मुझे बुरी नजर से देखेगा, मेरी छुरी उसका रक्त पी जाएगी। क्या करना चाहते हो तुम लोग?”
अंग्रेज एक बालिका का ऐसा साहस देख कर चकित हो गए जब उनको पूरी बात का पता चला तब वे बिना बोले वहां से चले गए।
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