गैलापागोस के टापू दक्षिण अमरीकी देश इक्वाडोर के 970 किलोमीटर पश्चिम में, प्रशांत महासागर में स्थित हैं। यह विशाल जमीनी कछुओं का घर है।
ये जमीनी कछुए इतने बड़े होते हैं कि वयस्क आदमी आसानी से उनकी पीठ पर सवारी कर सकता है।
Galápagos Giant Tortoise: गैलापागोस के विशाल जमीनी कछुए
- Common name: Galapagos giant tortoise
- Scientific name: Chelonoidis spp.
- Spanish name: Tortuga gigante de las Galápagos
- Conservation status: Endangered
- Average lifespan: 100+ years
- Average size: 1.5 metres [Maximum size: 1.8 metres]
- Average weight: 250 kilograms [Maximum weight: 400 kgs]
यहां आने वाला सबसे मशहूर व्यक्ति था चार्ल्स डार्विन, जिसने 1835 में लिखा था – मैं अक्सर उनकी पीठ पर बैठ जाता था और फिर उनके खोल के पिछले हिस्से पर दो-चार बार थपथपाते था और वे उठ कर चल पड़ते थे लेकिन मैंने पाया कि उनके ऊपर बैठ कर अपना संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल है।
इस कछुए की सवारी का आनंद उठाने के लिए बड़े सब्र की जरूरत है। ये बेडौल जीव, जिनमें से कुछ का वजन तो 250 किलोग्राम तक होता है, बड़ी धीमी और बेढब चाल से, लगभग 0.26 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलते हैं। बहुत संभव है कि डार्विन ने जो कछुए 168 वर्ष पहले देखे थे, उनमें से कुछ आज भी जिंदा हों। कोई भी निश्चित तो नहीं जानता लेकिन ऐसी मान्यता है कि जंगली विशाल जमीनी कछुआ 200 साल तक जीते हैं।
कुछ कछुओं का खोल गुबदाकार होता है, कुछ का घोड़े की काठी जैसा और कुछ अन्य के खोल का आकार इन दोनों के बीच का होता है। इस द्वीप समूह को खोजने वाले इक्वाडोर यूरोपियन स्पेन के वासी थे।
1535 में, वे यहां संयोग से पहुंच गए। जिस टापू पर वे उतरे, उस पर उन्होंने काठी जैसे खोल वाले कछुए देखे। उन्हें देख कर स्पेन खोजियों को अपने घोड़ों की काठियां याद आ गईं।
काठी को स्पैनिश भाषा में ‘गैलापागो’ कहा जाता है, इसलिए उन्होंने इस द्वीप समूह का नाम रख दिया ‘गैलापागोस’।
गैलापागोस समुद्री डाकुओं का प्रिय अड्डा बन गया था। वे यहां आकर अपनी लूट छिपा देते थे और यहां से मीठा पानी और गोश्त ले जाते थे। गोश्त यानि जमीनी कछुए। विशाल जमीनी कछुए महीनों तक बिना कुछ खाए-पिए जिंदा रह सकते हैं, इसलिए डाकुओं को समुद्री यात्रा में उनसे ताजा मांस मिल जाता था।

इन बेचारे लाचार जीवों को जहाज के तले में उलटा करके रख दिया जाता था और जब भी जरूरत महसूस होती काट डाला जाता था।
बाद में, व्हेल के शिकारी भी इन टापुओं में डेरा डालने लगे। वे भी इन कछुओं को मांस लिए ले जाने लगे।
डाकुओं और व्हेल शिकारियों के अत्याचार के कारण 19वीं सदी के अंत तक इन जमीनी कछुओं को आबादी घट कर बस कुछ हजार ही रह गई थी।
आज गैलापागोस टापुओं में करीब 15 से 20 हजार कछुए ही बचे हैं। विशाल जमीनी कछुए सेशेल्स में भी मिलते हैं लेकिन वे एक अन्य प्रजाति के हैं।
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