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Strange Is The Path of Love: Devotional Poem by Hindu mystic poetess Mirabai

Strange Is The Path of Love: Devotional Poen by Hindu mystic poetess Mirabai

Do not mention the name of love, O my simple-minded companion. Strange is the path When you offer your love. Your body is crushed at the first step. If you want to offer love Be prepared to cut off your head And sit on it. Be like the moth, Which circles the lamp and offers its body. Be like the …

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किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये – निदा फ़ाजली

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये - निदा फ़ाजली

अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाये घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ नहीं उन चिरा.गों को हवाओं से बचाया जाये क्या हुआ शहर को कुछ भी तो नज़र आये कहीं यूँ किया जाये कभी खुद को रुलाया जाये बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं किसी तितली …

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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता – निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता - निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलता कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता ये …

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Joyous Hanukkah – Eva Grant

Joyous Hanukkah - Eva Grant

At last! At last! Hanukkah is here! The whole house is bursting with holiday cheer. Pancakes are sizzling as hard as they can, Browning delectably crisp in the pan. The dreidels can scarcely wait to be spun; Presents are hidden for Hanukkah fun; And there, on the table, polished and bright, The shining menorah gleams through the night, Like the …

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आज्ञा – राजीव कृष्ण सक्सेना

आज्ञा - राजीव कृष्ण सक्सेना

प्रज्वलित किया जब मुझे कार्य समझाया पथिकों को राह दिखाने को दी काया मैंनें उत्तरदाइत्व सहज ही माना जो कार्य मुझे सौंपा था उसे निभाना जुट गया पूर्ण उत्साह हृदय में भर के इस घोर कर्म को नित्य निरंतर करते जो पथिक निकल इस ओर चले आते थे मेरी किरणों से शक्ति नई पाते थे मेरी ऊष्मा उत्साह नया भरती …

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कौन यहाँ आया था – दुष्यंत कुमार

कौन यहाँ आया था - दुष्यंत कुमार

कौन यहाँ आया था कौन दिया बाल गया सूनी घर-देहरी में ज्योति-सी उजाल गया। पूजा की बेदी पर गंगाजल भरा कलश रक्खा था, पर झुक कर कोई कौतुहलवश बच्चों की तरह हाथ डाल कर खंगाल गया। आँखों में तिरा आया सारा आकाश सहज नए रंग रँगा थका- हारा आकाश सहज पूरा अस्तित्व एक गेंद-सा उछाल गया। अधरों में राग, आग …

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अँधेरे का दीपक – हरिवंश राय बच्चन

अँधेरे का दीपक - हरिवंश राय बच्चन

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है? कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था, भावना के हाथ से जिसमें वितानों को तना था, स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा, स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था, ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर कंकड़ों को एक अपनी शांति की …

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नींद की पुकार – वीरबाला भावसार

नींद बड़ी गहरी थी, झटके से टूट गई तुमने पुकारा, या द्वार आकर लौट गए। बार बार आई मैं, द्वार तक न पाया कुछ बार बार सोई पर, स्वप्न भी न आया कुछ अनसूया अनजागा, हर क्षण तुमको सौंपा तुमने स्वीकारा, या द्वार आकर लौट गए। चुप भी मैं रह न सकी, कुछ भी मैं कह न सकी जीवन की …

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दीपक जलाना कब मना है – हरिवंश राय बच्चन

है अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है। कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों, को एक अपनी शांति की …

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जब मिलेगी रोशनी मुझसे मिलेगी – राम अवतार त्यागी

इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूँ; मत बुझाओ! जब मिलेगी, रोशनी मुझसे मिलेगी… पाँव तो मेरे थकन ने छील डाले अब विचारों के सहारे चल रहा हूँ, आँसूओं से जन्म दे-देकर हँसी को एक मंदिर के दिए-सा जल रहा हूँ; मैं जहाँ धर दूँ कदम वह राजपथ है, मत मिटाओ! पाँव मेरे, देखकर दुनिया चलेगी… बेबसी मेरे अधर …

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