Tag Archives: Education Hindi Poems

काका हाथरसी के दोहे

काका हाथरसी के दोहे

सन १९०६ में हाथरस में जन्मे काका हाथरसी (असली नाम: प्रभुनाथ गर्ग) हिंदी व्यंग्य के मूर्धण्य कवि थे। उनकी शैली की छाप उनकी पीढ़ी के अन्य कवियों पर तो पड़ी ही, आज भी अनेकों लेखक और व्यंग्य कवि काका की रचनाओं की शैली अपनाकर लाखों श्रोताओं और पाठकों का मनोरंजन कर रहे हैं। व्यंग्य का मूल उद्देश्य लेकिन मनोरंजन नहीं …

Read More »

चांद पर मानव: काका हाथरसी

This poem was written by Kaka Hathrasi, when man had for the first time reached on moon. Big deal! Many thought. चांद पर मानव: काका हाथरसी ठाकुर ठर्रा सिंह से बोले आलमगीर पहुँच गये वो चाँद पर, मार लिया क्या तीर मार लिया क्या तीर, लौट पृथ्वी पर आये किये करोड़ों खर्च, कंकड़ी मिट्टी लाये ‘काका’, इससे लाख गुना अच्छा …

Read More »

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ: काका हाथरसी

दाढ़ी महिमा - काका हाथरसी

Here is an excerpt from a very funny and at a time very popular poem of Kaka Hathrasi. See Kakas advice on how to raise the standard of your life! प्रकृति बदलती क्षण-क्षण देखो, बदल रहे अणु, कण-कण देखो। तुम निष्क्रिय से पड़े हुए हो। भाग्य वाद पर अड़े हुए हो। छोड़ो मित्र! पुरानी डफली, जीवन में परिवर्तन लाओ। परंपरा …

Read More »

कौन सिखाता है चिड़ियों को: सोहनलाल द्विवेदी

कौन सिखाता है चिड़ियों को - सोहनलाल द्विवेदी

Here is a popular poem of Sohanlal Dwivedi Ji. Who teaches birds… Many would have read it in school days. कौन सिखाता है चिड़ियों को: सोहनलाल द्विवेदी कौन सिखाता है चिडियों को चीं–चीं चीं–चीं करना? कौन सिखाता फुदक–फुदक कर उनको चलना फिरना? कौन सिखाता फुर से उड़ना दाने चुग-चुग खाना? कौन सिखाता तिनके ला–ला कर घोंसले बनाना? कौन सिखाता है …

Read More »

जय सरस्वती माता: सरस्वती माँ की आरती

Saraswati: Hindu Goddess

Goddess Saraswati: The name Saraswati came from “saras” (meaning “flow”) and “wati” (meaning “she who has …”), i.e. “she who has flow” or can mean sara meaning “essence” and swa meaning “self”. So, Saraswati is symbol of knowledge; its flow (or growth) is like a river and knowledge is supremely alluring, like a beautiful woman. She is depicted as beautiful …

Read More »

खग उड़ते रहना जीवन भर: नीरज की एक प्रेरक हिंदी कविता

खग उड़ते रहना जीवन भर: नीरज प्रेरक हिंदी कविता

In this poem, Neeraj exhorts us to keep making efforts and not lose hope. These lines are very similar to what Lord Krishna told Arjuna in Kurukshetra (Geeta Chapter 2, shlokas 35, 36 and 37) खग उड़ते रहना जीवन भर: गोपाल दास नीरज खग! उड़ते रहना जीवन भर! भूल गया है तू अपना पथ‚ और नहीं पंखों में भी गति‚ किंतु …

Read More »