बी के एस आयंगर के अनमोल विचार BKS Iyengar Quotes in Hindi

बी के एस आयंगर के अनमोल विचार BKS Iyengar Quotes in Hindi

बी के एस आयंगर के अनमोल विचार: बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार भारत के अग्रणी योग गुरु थे। उन्होंने अयंगारयोग की स्थापना की तथा इसे सम्पूर्ण विश्व में मशहूर बनाया। सन 2002 में भारत सरकार द्वारा उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से तथा 2014 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। ‘टाइम’ पत्रिका ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में उनका नाम शामिल किया था। अंयगार ने जिन लोगों को योग सिखाया, उनमें जिद्दू कृष्णमूर्ति, जयप्रकाश नारायण, येहुदी मेनुहिन जैसे नाम सम्मिलित हैं। आधुनिक ऋषि के रूप में विख्यात अयंगार ने विभिन्न देशों में अपने संस्थान की 100 से अधिक शाखाएं स्थापित की। यूरोप में योग फैलाने में वे सबसे आगे थे।

Name Bellur Krishnamachar Sundararaja Iyengar / बी.के.एस आयंगर
Born 14 December, 1918 Bellur, Kolar district, Kingdom of Mysore (now Karnataka, India)
Died 20 August, 2014 (aged 95) Pune, Maharashtra, India
Occupation योग गुरु, लेखक
Nationality Indian
Achievement योग के महानतम गुरुओं में से एक, आयंगर योग के संस्थापक, पद्म श्री, पद्मा भूषण, व पद्म विभूषण से सम्मानित 2004 में टाइम मैगज़ीन के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूचि में शामिल
  • योग हमें उन चीजों को ठीक करना सिखाता है जिसे सहा नहीं जा सकता और उन चीजों को सहना सिखाता है जिन्हे ठीक नहीं किया जा सकता।
  • जब आप सांस लेते हैं, आप भगवान से शक्ति ले रहे होते हैं। जब आप सांस छोड़ते हैं तो ये उस सेवा को दर्शाता है जो आप दुनिया को दे रहे हैं।
  • योग वह प्रकश है जो एक बार जला दिया जाए तो कभी कम नहीं होता। जितना अच्छा आप अभ्यास करेंगे, लौ उतनी ही उज्जवल होगी।
  • शरीर धनुष है, आसन तीर और आत्मा लक्ष्य।
  • श्वासें मन की शासक हैं।
  • अपने चेतना की भावना को भीतर की ओर आकर्षित कर, हम मन के नियंत्रण, स्थिरता और शांति को अनुभव कर पाने में सक्षम हैं।
  • बदलाव यदि स्थिर न किया जा सके तो वो निराशा की ओर ले जाता है। परिवर्तन स्थिर किया हुआ बदलाव है, और इसे अभ्यास से प्राप्त किया जाता है।
  • आत्मविश्वास, स्पष्टता और करुणा एक शिक्षक के आवश्यक गुण हैं।
  • बस इसलिए कोशिश करना मत छोड़िये क्योंकि परफेक्शन आप से बहुत दूर है।
  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने पर ध्यान दीजिये। ये रीढ़ की हड्डी का काम है कि वो मस्तिष्क को सतर्क रखे।
  • स्वास्थ्य; शरीर, मन और आत्मा के पूर्ण सद्भाव की स्थिति है।
  • यदि आप अपने पाँव के अंगूठे को नहीं जानते तो भगवान को कैसे जान पायेंगे?
  • शरीर के ऐलाइन्मेन्ट द्वारा ही मैंने अपने मन, आत्मा और बुद्धि का ऐलाइन्मेन्ट सीखा।
  • ये आपके शरीर द्वारा ही है कि आप जान पाते हैं कि आप दिव्यता की चिंगारी हैं।
  • जीवन का मतलब जीना है। समस्याएं हेमशा वहां होंगी। जब वे उठें उन्हें योग के द्वारा पार करो – क्रम मत तोड़ो।
  • शिक्षण की कला सहिष्णुता है। नम्रता सीखने की कला है।
  • हीरे की कठोरता उसकी उपयोगिता का हिस्सा है, लेकिन उसकी असला कीमत उस प्रकाश में है जो उससे हो कर चमकता है।
  • शरीर की लय, मन का स्वर और आत्मा का सद्भाव जीवन के संगीत का निर्माण करते हैं।
  • जब मैं अभ्यास करता हूं, मैं एक दार्शनिक हूं। जब मैं सिखाता हूं, मैं एक वैज्ञानिक हूं जब मैं कर के दिखाता हूं, मैं एक कलाकार हूं।

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