सावन का महीना शुरू होते ही देशभर के शिवालयों में घंटियों की गूंज, हर-हर महादेव के जयघोष और शिवभक्तों की लंबी कतारें दिखाई देने लगती हैं। इस पावन महीने में भगवान शिव के हर रूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन कुछ ऐसे दुर्लभ मंदिर भी हैं जहां शिवलिंग को ‘बाल शिवलिंग’ यानी भगवान शिव के बाल स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इन शिवलिंगों
के दर्शन से संतान सुख, शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। सावन में इन मंदिरों का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। आइए जानते हैं भारत के ऐसे आठ प्रमुख बाल शिवलिंगों के बारे में जिनकी अपनी अलग मान्यता, इतिहास और चमत्कारिक कथा है।
कहीं स्वयंभू शिवलिंग तो कहीं बाल स्वरूप में विराजमान हैं भोलेनाथ आस्था, इतिहास और चमत्कार का अद्भुत संगम
बालेश्वर महादेव मंदिर, चंपावत, उत्तराखंड: Baleshwar Temple, Champawat, Uttarakhand
उत्तराखंड के चंपावत में स्थित बालेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के बाल स्वरूप को समर्पित माना जाता है। चंद राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां विशेष रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और जलाभिषेक का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बालेश्वरनाथ महादेव, देवघर, झारखंड: Baleshwar Nath Mahadev, Deoghar, Jharkhand
बाबा बैद्यनाथ धाम के आस-पास स्थित बालेश्वरनाथ मंदिर भी शिवभक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां भगवान शिव के बाल रूप की पूजा की जाती है। सावन में कांवड़ियों की बड़ी संख्या इस मंदिर में भी पहुंचती है। मान्यता है कि यहां जल चढ़ाने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
बालेश्वर महादेव, अल्मोड़ा, उत्तराखंड: Baleshwar Mahadev Temple, Almora, Uttarakhand
कुमाऊं क्षेत्र का यह प्राचीन मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ धार्मिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को बाल स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। सावन में यहां विशेष मेले का आयोजन होता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बालेश्वर महादेव, आगरा, उत्तर प्रदेश: Balkeshwar Mahadev Mandir, Agra, Uttar Pradesh
आगरा का प्राचीन बालेश्वर महादेव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव बालक के रूप में भक्तों की रक्षा करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन होता है।
बालेश्वरनाथ मंदिर, सीतामढ़ी, बिहार: Valmikeshwar Nath Mahadev Mandir, Sitamarhi
सीतामढ़ी का यह मंदिर शिवभक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। कहा जाता है कि यहां पूजा करने से संतान प्राप्ति और वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। सावन में मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन और शिव पुराण कथा का आयोजन भी किया जाता है।
बालेश्वर महादेव, पिथौरागढ़, उत्तराखंड: Baaleshwar Mahadev Temple, Pithoragarh Uttarakhand
हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम है। यहां स्थापित शिवलिंग को भगवान शिव के बाल स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। सावन में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
बालेश्वर महादेव, भरतपुर (राजस्थान)
राजस्थान के भरतपुर स्थित यह मंदिर कई शताब्दियों पुराना माना जाता है। यहां सावन के दौरान शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
विशेष रूप से सोमवार और शिवरात्रि पर मंदिर में भव्य श्रृंगार गार किया जाता है।
बालेश्वरनाथ महादेव, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित बालेश्वरनाथ महादेव मंदिर भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है। महाकालेश्वर के दर्शन के साथ श्रद्धालु यहां भी पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहां बाल स्वरूप शिव की आराधना करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
सावन में बाल शिवलिंगों की पूजा क्यों मानी जाती है विशेष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का बाल स्वरूप अत्यंत सरल, निष्कपट और शीघ्र प्रसन्न होने वाला माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालु इन शिवलिंगों पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद और गंगाजल अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव महापुराण का पाठ भी आयोजित किया जाता है।
पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान, क्या है प्रक्रिया
- · ब्रहम मुहूर्त या प्रातःकाल में स्नान कर पूजा करें।
- शिवलिंग पर पहले जल और फिर गंगाजल अर्पित करें।
- तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं।
- ‘ॐ नम: शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
- शिवलिंग की परिक्रमा पूरी न करें, जल निकासी वाली दिशा को छोड़कर परिक्रमा करें।
- सावन में पूजा के लिए बढ़ जाती है इन मंदिरों की रौनक
- सावन को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान देशभर से कांवरिए गंगाजल लेकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। बाल शिवलिंग वाले मंदिरों में विशेष रूप से संतान सुख, शिक्षा में सफलता, करियर, विवाह और पारिवारिक सुख की कामना लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई मंदिरों में सावन भर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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