Shri Mahakaleshwar Jyotirling Ujjain श्री महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग, उज्जैन, मध्य प्रदेश

महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग, उज्जैन, मध्य प्रदेश:

एकमात्र महाकाल मंदिर में मनाई जाती है ‘शिव नवरात्रि’

सनातन धर्म परम्परा में जिस प्रकार शक्ति की उपासना के लिए देवी मंदिरों में नवरात्रि मनाई जाती है, उसी प्रकार उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शिव नवरात्रि का विशेष आयोजन होता है।

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिव नवरात्रि पूरे विधि-विधान और उत्सव भाव के साथ मनाई जाती है। यह पावन उत्सव फाल्गुन कृष्ण पंचमी से प्रारंभ होकर महाशिवरात्रि के अगले दिन तक चलता है।

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए शिव नवरात्रि के दौरान कठिन तपस्या और साधना की थी। इसी आस्था के कारण इन 9 दिनों में श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से उपवास, पूजा-अर्चना और साधना करते हैं।

महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पर्व माना जाता है। लोक परंपरा में विवाह से पूर्व जिस प्रकार दूल्हे को हल्दी लगाई जाती है, उसी परंपरा का पालन करते हुए महाकाल मंदिर में शिवरात्रि से नौ दिन पूर्व भगवान महाकाल का दूल्हा रूप में श्रृंगार किया जाता है।

सामान्य रूप से शिव पूजन में हल्दी अर्पण करना निषिद्ध माना गया है, किंतु शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकाल को हल्दी, चंदन और केसर का उबटन लगाया जाता है।

साथ ही उन्हें सुगंधित इत्र, औषधियों और फलों के रस से स्नान कराया जाता है तथा आकर्षक वस्त्र, आभूषण, मुकुट, छत्र, सोलह श्रृंगार, दुपट्टा और विभिन्न मुखारविंदों से सजाया जाता है।

शिव नवरात्रि के प्रथम दिन मंदिर के नैवेद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर और कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित कोटेश्वर महादेव के साथ भगवान महाकाल की विधिवत पूजा कर संकल्प लिया जाता है।

इसके पश्चात पंचामृत अभिषेक और एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ किया जाता है। दोपहर में भोग आरती के बाद भगवान महाकाल को उबटन लगाकर दूल्हा रूप प्रदान किया जाता है और संध्या पूजन के पश्चात नवीन वस्त्र धारण कराकर भव्य श्रृंगार किया जाता है।

आगामी दिनों में भगवान महाकाल का क्रमशः शेषनाग श्रृंगार, घटाटोप मुखारविंद श्रृंगार, छबिना श्रृंगार, होलकर मुखारविंद श्रृंगार, मनमहेश स्वरूप, उमा-महेश स्वरूप तथा शिव तांडव स्वरूप में श्रृंगार किया जाता है। इन सभी अलौकिक और मनोहारी श्रृंगारों में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं।

नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक गर्भगृह में विशेष पूजन किया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन बाबा महाकाल पर जलधारा अर्पित की जाती है और दिनभर विविध धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और आरती का क्रम चलता है। अर्धरात्रि में महानिशाकाल की विशेष पूजा होती है।

इसके अगले दिन प्रातः दूल्हा बने भगवान महाकाल को सप्तधान का मुखारविंद धारण कराया जाता है और उनके शीश पर सवा मन पुष्प एवं फलों से सेहरा सजाया जाता है। रजत मुकुट, छत्र, कुंडल, तिलक, त्रिपुंड, मुण्ड और रुद्राक्ष की मालाओं से उनका दिव्य श्रृंगार किया जाता है।

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