इंडोनेशिया धर्मनिरपेक्षता की अद्भुत मिसाल

इंडोनेशिया धर्मनिरपेक्षता की अद्भुत मिसाल

विश्व के मुस्लिम बहुल देशों में इंडोनेशिया धर्मनिरपेक्षता का अद्भुत उदाहरण पेश करता है जब वहां हिंदू अपने उत्सव मनाते हैं और इस्लाम के बड़े-बड़े धर्मगुरु भी इन समारोहों में बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। इंडोनेशिया की आबादी 23 करोड़ के लगभग है। इस देश में इस्लाम के अनुयायी 88 प्रतिशत हैं जबकि हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों की जनसंख्या 4 से 5 प्रतिशत है। इस स्थिति के होते हुए इंडोनेशिया के प्रति गौरव बोध को अपने मानस में अपनी विशेषता बनाएं हुए हैं।

धर्म, सम्प्रदाय, मत और जाति पात के आधार पर भेदभाव की प्रवृत्ति से मुक्त इंडोनेशिया के लोग रामायण, महाभारत के प्रति श्रद्धाभाव रखते हैं और योगेश्वर श्री कृष्ण, धनुर्धर अर्जुन तथा वैदिक साहित्य में शामिल विभूतियों के प्रति श्रद्धा रखते हैं। इंडोनेशिया का एक द्वीप बाली तो हिंदू बहुल होने के कारण ‘हिंदू बाली’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां के लोग हिंदू धर्म को अपना कर इसे हिंदू बहुल क्षेत्र बनाए हुए हैं। ये भारत से उस देश में आकर बसे लोगों की संतानें नहीं हैं अपितु वहां के मूल निवासी हैं जिन्होंने सैंकड़ों वर्ष पहले बौद्ध या हिंदू धर्म अपनाया था।

इंडोनेशिया के दूसरे प्रमुख द्वीप जावा, सुमात्रा और बोर्नयो इत्यादि हैं। ये मुस्लिम बहुल हैं किंतु इस भिन्नता के बावजूद वहां मुस्लिम, हिंदू, ईसाई और बौद्ध भी आपको मिल जाएंगे। इंडोनेशिया ज्वालामुखियों का देश है। लगभग 400 जागृत, प्रसुप्त एवं प्रशांत ज्वालामुखियों में से कुछ आज भी सक्रिय हैं। कई ज्वालामुखियों में से कुछ में ज्वाला अभी भी निकल रही है। इस देश ने धार्मिक शांति सौहार्द और सद्‍भाव को सदैव अपनी पूंजी बनाए रखा। यहां का क्षेत्रफल कुल 5193250 वर्ग किलोमीटर तथा समुद्री क्षेत्र 4166165 वर्ग किलोमीटर है। द्वीप तथा द्वीपीकाओं की संख्या 13667 है।

बाली और सुमात्रा के अतिरिक्त बोर्नियो, कालीयंतन, सुलावेसी तथा इरियन जय, पश्चिमी न्यूगिनी भी अपना प्रमुख स्थान रखते हैं। भारत के साथ इंडोनेशिया के सैंकड़ों वर्षों से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण यहां की राजभाषा प्रस्तुत करती है। ऐसा बताया जाता है कि यह भाषा मलय और भारतीय भाषाओं के मिश्रण से उत्पन्न हुई। यहां की मुख्य मुद्रा भी रुपिया कहलाती है जो भारत की मुद्रा रुपया से अनुरूपता को जताती है।

सांस्कृतिक सामंजस्य का प्रतीक इंडोनेशिया अनेक दृष्टियों से अद्भुत एवं निराला है। यहां की राजधानी जकार्ता है। जावा द्वीप पर स्थित देश का यह प्रमुख बंदरगाह अतीत और वर्तमान की अनेक स्मृतियों को अपने आंचल में समेटे विश्व भर के सैलानियों का मन मोहता है। चार छोटे नगरों को मिलाकर बना जकार्ता स्वतंत्रता संग्राम की कई कहानियां अपने अंदर समेटे हुए हैं।

इंडोनेशिया के उत्तर में असेह प्रांत है जिसे लोग ‘मक्का के सामने वाला बरामदा’ के नाम से भी पुकारते हैं। यह प्रांत काफी अर्से से इस्लामी परम्पराओं से प्रभावित रहा है। यहां इंडोनेशिया के पुराने मुस्लिम शासकों की कब्रें भी मौजूद हैं और बेतुरिहमान नामक प्रसिद्ध मस्जिद प्राचीन वास्तुकला की भव्यता के दर्शन कराती है।

इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप उत्तरी भाग में स्थित वह दर्शनीय स्थल है जिसमें प्राचीन परम्परागत शैली में बने मकानों का ग्राम हिलसमताना स्थित है। दो सौ वर्ष पुराना और कबायली संस्कृति की पहचान कराने वाला ग्राम वेमतांग है। विश्व की सबसे ऊंची झील तोबा भी इसी स्थान पर स्थित है। सुमात्रा का दक्षिणी भाग सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है। मुखी नामक इंडोनेशिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी इस प्रांत की राजधानी पलेमबाग से होकर प्रवाहित होती है जो इस नगर को दो भागों में बांटती है, यहां परम्परागतप कला और संस्कृति का अनूठा रूप देखने को मिलता है।

इस देश का जावा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुषमा एवं शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। जावा के पश्चिम क्षेत्र में लुप्त हो चुके पक्षियों की शरणस्थली पुलाऊ का भी अपना स्थान है। यहां की लोकप्रिय कलाओं में अंगल लंग संगीत विशेषरूप से उल्लेखनीय है जिसके स्वर बांस के वाद्य यंत्रों से उभरकर श्रोताओं का मन मोह लेते हैं।

जावा द्वीप विशाल मुस्लिम आबादी वाला अंचल है। इसका मध्य भाग आज भी कई भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर बोरोबुदर भी यहीं स्थित है जिसे वास्तुकला का अनुपम उदाहरण कहा जा सकता है। ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि जब रोम में रोमन साम्राज्य के अधिपति के रूप में शार्लमेन को राजमुकुट धारण कराया जा रहा था तो उन्हीं दिनों दक्षिण पूर्व एशिया के जावा द्वीप में इस भव्य मंदिर का निर्माण चल रहा था। इतिहासकारों का कहना है कि इस मंदिर को आठवीं शताब्दी में बनवाया गया था। पहाड़ों पर स्थित इस मंदिर का निर्माण शालेन्द्र वंश के राजाओं ने करवाया था। इसे बनाने में आठ दशक लगे थे।

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक स्थान ‘योगकर्ता’ स्थित हिन्दू मंदिरों में समय-समय पर रामायण और महाभारत की कथाओं का आयोजन किया जाता है और बैले नृत्य भी पेश किए जाते हैं। कृष्ण-राधा की झांकियां भी प्रस्तुत की जाती हैं। इंडोनेशिया में रामलीला का मंचन भी किया जाता है।

बाली के हिन्दू देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए हमेशा आगे रहते हैं। यहां इस्लाम के अनुयायी और हिन्दू धर्म के प्रति आस्थावान जन पारस्परिक सामंजस्य सहिष्णुता और सौहार्द को अपनी सांझी विरासत के रूप में सहेजे हुए हैं। बाली निवासियों के पारिवारिक और सामुदायिक जीवन में अनेक परम्परागत रीति रिवाजों की प्रेरणा का स्रोत हिंदू धर्म ही है।

बाली में हिन्दू मंदिरों की संख्या लगभग 5-6 हजार बताई जाती है। महिलाओं में धर्म के प्रति आस्था का भाव वहां भी भारत के समान ही है। सूर्योदय से पूर्व ही मंदिरों में महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें लगनी शुरू हो जाती हैं। प्रात: सायं मंदिरों में आरतियां की जाती हैं। हिन्दू लोग मंदिरों में सत्संग भी करते दिखाई देते हैं।

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