पसीना वाले हनुमान जी का मंदिर, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश

पसीना वाले हनुमान जी का मंदिर, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश: Pasina Bale Hanuman Ji Temple, Firozabad

UP के फिरोजाबाद में ₹7.50 करोड़ से 5 मंदिरों का होगा कायाकल्प: जानिए इनमें से एक पसीने वाले हनुमान जी के मंदिर की रहस्यमयी कहानी, सिंदूर लगाते ही मूर्ति को आता है पसीना

स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह मंदिर करीब दो हजार वर्ष पुराना है। उस समय चंद्रवार राजा चन्द्रसेन की राजधानी हुआ करता था और इसी काल में इस दिव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। समय बदलता गया, लेकिन यहाँ की मान्यता और रहस्य वही रहे।

23 November, 2025: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने पाँच प्रमुख मंदिरों के सौंदर्यीकरण और विकास पर सहमति दे दी है। हाल ही में भेजे गए बजट प्रस्तावों को मुख्यमंत्री पर्यटन योजना के तहत मंजूरी मिल चुकी है। कुल 7.50 करोड़ रुपए इन मंदिरों के कायाकल्प पर खर्च किए जाएँगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के अनुसार, हनुमान मंदिर, नगला हरी सिंह की मरम्मत व विकास पर 1.97 करोड़ रुपए, सिद्ध काली माता मंदिर, गाँव कनवार रैमजा पर 1.93 करोड़ रुपए, पसीने वाले हनुमान मंदिर पर 1 करोड़ रुपए, स्वामी गुदरिया वाले महाराज आश्रम, रजौरा पर 1.47 करोड़ रुपए और गोगा जी काली मंदिर, पिपरौली जलेसर रोड पर 1.12 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।

इन पाँचों मंदिरों में से एक पसीने वाले हनुमान जी के मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता और मान्यता है। आईए जानते हैं कि आखिर इसको पसीने वाले हनुमान जी का मंदिर क्यों कहते हैं?

कहा जाता है कि जैसे ही यहाँ हनुमानजी की प्रतिमा पर सिंदूर लगाया जाता है, वह गीली हो जाती है
कहा जाता है कि जैसे ही यहाँ हनुमानजी की प्रतिमा पर सिंदूर लगाया जाता है, वह गीली हो जाती है

पसीने वाले हनुमानजी: चंद्रवार के चमत्कार की सजीव कहानी

यमुना नदी की शांत तलहटी में बसा चंद्रवार गाँव आज भी एक रहस्य समेटे हुए है। यहाँ स्थित पसीने वाले हनुमानजी का प्राचीन मंदिर लोगों की आस्था को ऐसा आकार देता है, जिसे देखकर विज्ञान भी उलझन में पड़ जाता है।

कहा जाता है कि जैसे ही यहाँ हनुमानजी की प्रतिमा पर सिंदूर लगाया जाता है, वह गीली हो जाती है। भक्तों का मानना है कि यह सिर्फ चमत्कार नहीं बल्कि यह प्रमाण है कि यहाँ श्री हनुमानजी जीवंत स्वरूप में विराजते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना ना सिर्फ सुनते हैं, बल्कि उसे पूरी भी करते हैं।

हर मंगलवार और शनिवार को इस मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है, मानो किसी ऊर्जा का प्रवाह उन्हें यहाँ खींच लाता हो।

Name:  पसीना वाले हनुमान जी का मंदिर, फिरोजाबाद (Pasina Wale Hanuman Ji Ka Mandir)
Location: Indon, Firozabad District, Uttar Pradesh 283203 India
Deity: Lord Hanuman
Affiliation: Hinduism
Architecture: Hindu temple architecture (Nagara Style)
Creator:

जहाँ इतिहास और आस्था मिलकर रचते हैं चमत्कार

स्थानीय परंपराओं के अनुसार, यह मंदिर करीब दो हजार वर्ष पुराना है। उस समय चंद्रवार राजा चन्द्रसेन की राजधानी हुआ करता था और इसी काल में इस दिव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। समय बदलता गया लेकिन यहाँ की मान्यता और रहस्य वही रहे।

मंदिर के महंत बताते हैं कि पहले प्रतिमा पर इतना पसीना आता था कि भक्त उसे बोतलों में भरकर प्रसाद की तरह घर तक ले जाते थे। महंत इसे इस भूमि की अलौकिक शक्ति का परिणाम बताते हैं।

भक्त कहते हैं कि यहाँ हर प्रार्थना पूरी होती है, क्योंकि उनके सामने हनुमानजी सिर्फ मूर्ति नहीं बल्कि जीवंत रूप में विद्यमान हैं। इसी विश्वास ने इस मंदिर को भक्तों के हृदय का सबसे पवित्र स्थान बना दिया है।

भक्तों की मेहनत से बदली मंदिर की तस्वीर

आज जो मंदिर दिखाई देता है, वह हमेशा ऐसा नहीं था। करीब 30-40 साल पहले यहाँ सिर्फ एक छोटी-सी मढ़िया थी। भक्तों ने अपने श्रम, धन और समर्पण से धीरे-धीरे इसे भव्य रूप दिया। फिर यहाँ राम, सीता और लक्ष्मण का मंदिर बना और पास में ही भगवान भोलेनाथ के लिए महाकाल स्वरूप वाला मंदिर भी स्थापित किया गया।

Ram Darbar at Pasina Wale Hanuman Ji Ka Mandir, Firozabad, Uttar Pradesh
Ram Darbar at Pasina Wale Hanuman Ji Ka Mandir, Firozabad, Uttar Pradesh

भक्तों का कहना है कि जबसे सामने श्रीराम मंदिर बना, प्रतिमा पर आने वाले पसीने की मात्रा थोड़ी कम हुई है लेकिन हनुमानजी आज भी अपना चमत्कार दिखाते हैं। यहाँ समय-समय पर भंडारा और धार्मिक आयोजन होते रहते हैं, जो इसे हमेशा जीवंत बनाए रखते हैं।

गर्मी हो, सर्दी हो या बरसात हो। इसीलिए इस चमत्कारिक मंदिर और प्रतिमा को 'पसीना वाले हनुमान जी' के नाम से जाना जाता है
गर्मी हो, सर्दी हो या बरसात हो। इसीलिए इस चमत्कारिक मंदिर और प्रतिमा को ‘पसीना वाले हनुमान जी’ के नाम से जाना जाता है

चंद्रवार: युद्धभूमि से पवित्र धाम तक का सफर

बात करें चंद्रवार गाँव की तो यह सिर्फ धार्मिक महत्व वाला क्षेत्र नहीं बल्कि यह इतिहास का एक जीवंत रूप है। कहा जाता है कि 1193 में यहीं राजा जयचंद्र और मोहम्मद गोरी के बीच युद्ध हुआ था। गाँव के आसपास फैले खंडहर आज भी उस युग की दास्तान सुनाते हैं।

पुरातत्व से जुड़े प्रमाण भी यहाँ समय-समय पर मिलते हैं, जो इस भूमि की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करते हैं। पुराना नाम भी फिरोजाबाद नहीं बल्कि चंद्रवार ही हुआ करता था। यही कारण है कि आज भी इस शहर का नाम पुनः चंद्रवार करने की माँग उठती रहती है और प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है।

यमुना किनारे फैली प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण इसे दिव्यता और इतिहास का अद्भुत संगम बना देते हैं। यहाँ आकर हर कोई एक ही बात महसूस करता है कि मूर्ति पत्थर की हो सकती है लेकिन विश्वास हमेशा जीवित होता है।

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