मोतीश्वर महादेव मंदिर, मस्कट, ओमान: Motishwar Shiva Temple, Muscat, Oman

मोतीश्वर महादेव मंदिर, मस्कट, ओमान: Motishwar Shiva Temple, Muscat, Oman

मुस्लिम मुल्क में महादेव की आस्था: मस्कट के उस 125 साल पुराने शिव मंदिर की गाथा जिसे गुजराती व्यापारियों ने बनाया, जानिए क्या है इसके चमत्कारी कुएँ का रहस्य

मंदिर की नींव आज से करीब 125 साल पहले 1900 के आसपास रखी गई थी। गुजरात के कच्छ इलाके के ‘भाटिया’ व्यापारिक समुदाय के लोग 1500 के दशक में ही व्यापार के सिलसिले में ओमान में बसने लगे थे। इन्हीं व्यापारियों ने अपनी आस्था को जीवित रखने के लिए इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

मोतीश्वर महादेव मंदिर, मस्कट, ओमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सफल इथियोपिया यात्रा के बाद ओमान की राजधानी मस्कट पहुँचे। इथियोपिया में रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने के बाद, ओमान में उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं रहा। हाथों में तिरंगा लिए और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते हुए लोगों का हुजूम सड़कों पर उतरा।

Indian Prime Minister Shri Narendra Modi's visit at Shri Motishwar Mahadev Temple, Muscat (12.02.2018)
Indian Prime Minister Shri Narendra Modi’s visit at Shri Motishwar Mahadev Temple, Muscat (12.02.2018)

ओमान की राजधानी मस्कट में एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है, जिसकी चर्चा पहले भी हो चुकी है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अरब जगत में भारतीय विरासत की मजबूती का गवाह भी है।

Name: मोतीश्वर महादेव मंदिर, मस्कट, ओमान (Motishwar Shiva Temple / Shree Shiva Temple)
Location: Way No.: 8019, Bldg.No.:29, Tuwiyan-Muttrah, Muscat, Oman
Deity: Lord Shiva & Lord Hanuman
Affiliation: Hinduism
Festivals: Mahashivratri, Vasant Panchami, Ram Navami, Hanuman Jayanti, Shravan month, Ganesh Chaturthi
Creator:

125 साल पुराना इतिहास: गुजरात से ओमान तक का सफर

मस्कट के मुत्तरा क्षेत्र में स्थित ‘मोतीश्वर महादेव मंदिर’ खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर की नींव आज से करीब 125 साल पहले 1900 के आसपास रखी गई थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, गुजरात के कच्छ इलाके के ‘भाटिया’ व्यापारिक समुदाय के लोग 1500 के दशक में ही व्यापार के सिलसिले में ओमान में बसने लगे थे। इन्हीं व्यापारियों ने अपनी आस्था को जीवित रखने के लिए इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

तीन देशों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ओमान की राजधानी मस्कट में बने 125 वर्ष पुराने शिव मंदिर के दर्शन किए। मोतीश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर कई सदी पहले भारत से ओमान जाकर बसे व्यापारियों ने बनवाया था। 1999 में इसका नवीनीकरण किया गया।
तीन देशों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ओमान की राजधानी मस्कट में बने 125 वर्ष पुराने शिव मंदिर के दर्शन किए। मोतीश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर कई सदी पहले भारत से ओमान जाकर बसे व्यापारियों ने बनवाया था। 1999 में इसका नवीनीकरण किया गया।

समय के साथ यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि ओमान में रह रहे भारतीय समुदाय का सबसे बड़ा संगम स्थल बन गया। 19वीं सदी में गुजराती व्यापारियों का प्रभाव इतना बढ़ गया था कि उनके सुल्तानों के साथ बेहद मधुर संबंध थे। इसी सौहार्द की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 1999 में इस मंदिर का भव्य नवीनीकरण किया गया, जो आज अपनी पूरी आभा के साथ मस्कट के ‘अल आलम पैलेस’ के समीप स्थित है।

रेगिस्तान में चमत्कार: मंदिर के कुएँ का रहस्य

ओमान एक रेगिस्तानी देश है जहाँ बारिश बहुत कम होती है और पानी की किल्लत एक सामान्य बात है। लेकिन मोतीश्वर शिव मंदिर के साथ एक ऐसी मान्यता जुड़ी है जिसे भक्त महादेव का चमत्कार मानते हैं। मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआँ स्थित है, जो भीषण गर्मी और सूखे के बावजूद कभी खाली नहीं होता। रेगिस्तानी इलाका होने के बावजूद इस कुएँ में साल भर पर्याप्त जल रहता है।

स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस कुएँ को बेहद पवित्र और चमत्कारी मानते हैं, क्योंकि इसके आसपास कहीं और पानी का कोई प्राकृतिक स्रोत नजर नहीं आता। महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों पर जब 20 हजार से भी अधिक श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं, तब भी यह कुआँ अपनी शीतलता से मंदिर की जीवंतता को बनाए रखता है। यह कुआँ भक्तों की आस्था को और अधिक दृढ़ बनाता है।

तीन देवताओं का वास: मंदिर की आध्यात्मिक संरचना

मोतीश्वर मंदिर परिसर में केवल एक नहीं, बल्कि तीन प्रमुख देवताओं के मंदिर स्थापित हैं। यहाँ ‘श्री आदि मोतीश्वर महादेव’, ‘श्री मोतीश्वर महादेव’ और ‘श्री हनुमान जी’ के अलग-अलग मंदिर हैं। मंदिर का संचालन पूरी तरह व्यवस्थित है, जहाँ मुख्य पुजारियों के साथ-साथ भारी संख्या में स्वयंसेवक अपनी सेवाएँ देते हैं। यह मंदिर खाड़ी देशों में सनातन धर्म की परंपराओं को अक्षुण्ण रखे हुए है।

यहाँ केवल शिवरात्रि ही नहीं, बल्कि वसंत पंचमी, रामनवमी, हनुमान जयंती और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार भी उसी उत्साह के साथ मनाए जाते हैं जैसे भारत में। मंदिर प्रशासन और ओमान सरकार के बीच का समन्वय यह दर्शाता है कि एक मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद ओमान ने भारतीय संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता को कितना सम्मान दिया है।

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