मल्लिकार्जुन मंदिर, नांदयाल जिला, आंध्र प्रदेश: Mallikarjuna Swamy Temple, Srisailam

मल्लिकार्जुन मंदिर, नांदयाल जिला, आंध्र प्रदेश: Mallikarjuna Swamy Temple, Srisailam

PM मोदी ने जिस मल्लिकार्जुन मंदिर में की पूजा-अर्चना, भगवान शिव और माता पार्वती से है उसका नाता: शैव ही नहीं शाक्यों के लिए भी है महत्वपूर्ण, इतिहास और मान्यताओं को जानिए

मल्लिकार्जुन मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में हुआ है, जिसमें चार विशाल गोपुरम और कई प्रांगण हैं। प्रारंभिक निर्माण में चालुक्य वंश का प्रभाव देखा जाता है जबकि सातवाहन, पल्लव, रेड्डी और विजयनगर राजवंशों ने इसे आगे बढ़ाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (16 अक्टूबर 2025) को आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों और 52 शक्तिपीठों में से एक है। इसकी खासियत यह है कि एक ही परिसर में ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों हैं। ऐसा देश में किसी और मंदिर में नहीं है।

PM performs Darshan and Puja at Sri Bhramaramba Mallikarjuna Swamy Varla Devasthanam at Srisailam
PM performs Darshan and Puja at Sri Bhramaramba Mallikarjuna Swamy Varla Devasthanam at Srisailam

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने पंचमुरलु (दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बना पवित्र मिश्रण) से रुद्राभिषेक किया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी मौजूद रहे।

Mallikarjuna Swamy Temple or Srisailam Temple

The temple is among the 12 Jyotirlingas and 52 Shakti Peeths in India and is unique for housing both in a single temple complex.

Name: मल्लिकार्जुन मंदिर, नांदयाल जिला, आंध्र प्रदेश (Mallikarjuna Swamy Temple or Srisailam Temple)
Location: Srisailam, Nandyal District, Andhra Pradesh 518101 India
Deity: Mallikarjuna (Shiva), Bhramaramba (Parvati)
Affiliation: Hinduism
Architecture: Dravidian Temple Architecture
Festivals: Maha Shivaratri

मल्लिकार्जुन मंदिर का परिचय और महत्व:

आंध्र प्रदेश का मल्लिकार्जुन मंदिर राज्य का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और शैव तथा शाक्त दोनों संप्रदायों के लिए पवित्र है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ दोनों एक ही स्थान पर हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, अमावस्या के दिन भगवान शिव अर्जुन रूप में और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती मल्लिका रूप में प्रकट हुईं, इसी कारण इस स्थान का नाम मल्लिकार्जुन पड़ा। यहाँ प्रार्थना करने से मन की शांति, धन और यश की प्राप्ति होती है। मंदिर में सहस्रलिंग (हजार लिंगों वाला शिवलिंग) भी है, जिसे भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित माना जाता है।

मंदिर की कलाकृति और इतिहास:

मल्लिकार्जुन मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में हुआ है, जिसमें चार विशाल गोपुरम और कई प्रांगण हैं। प्रारंभिक निर्माण में चालुक्य वंश का प्रभाव देखा जाता है जबकि सातवाहन, पल्लव, रेड्डी और विजयनगर राजवंशों ने इसे आगे बढ़ाया।

सातवाहन राजा सातकर्णि ने अपने नाम में ‘मल्लना’ जोड़कर मंदिर की प्रसिद्धि को दर्शाया। पुलुमावी की नासिक प्रशस्ति (2वीं सदी ई.) में पहली बार श्रीशैल पर्वत का उल्लेख मिलता है।

PM performs Darshan and Puja at Sri Bhramaramba Mallikarjuna Swamy Varla Devasthanam at Srisailam

विजयनगर वंश के हरिहर द्वितीय ने पाताल गंगा तक सीढ़ियाँ बनवाईं, कृष्णदेवराय के मंत्री चंद्रशेखर ने मंदिर के मंडप बनवाए और छत्रपति शिवाजी ने उत्तर दिशा के गोपुरम के निर्माण की अनुमति दी। अंग्रेजों ने 1929 में मंदिर प्रशासन के लिए समिति बनाई और 1949 में इसे एंडोमेंट्स विभाग के अधीन कर दिया गया।

पौराणिक कथाएँ और आध्यात्मिक परंपरा:

मल्लिकार्जुन मंदिर से कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं। कहा जाता है कि जब भगवान शिव और पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के विवाह की योजना बनाई तो गणेश का विवाह सिद्धि और बुद्धि से हुआ, जिससे कार्तिकेय नाराज होकर पलनी पर्वत चले गए।

जहाँ शिव-पार्वती रुके, वही स्थान श्रीशैलम कहलाया। अग्नि पुराण के अनुसार राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने यहाँ तपस्या की थी और स्कंद पुराण में बताया गया है कि त्रेता युग में भगवान राम और सीता तथा द्वापर युग में पांडव यहाँ आए और पूजा की।

The Prime Minister was accompanied by Andhra Pradesh Chief Minister N Chandrababu Naidu and Deputy CM Pawan Kalyan also present.
The Prime Minister was accompanied by Andhra Pradesh Chief Minister N Chandrababu Naidu and Deputy CM Pawan Kalyan also present.

ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति कथा के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद को सुलझाने के लिए शिव ने अनंत ज्योति स्तंभ बनाया। इसमें विष्णु ने सत्य स्वीकार किया जबकि ब्रह्मा ने झूठ बोला, इसलिए विष्णु की पूजा सदा होती रही पर ब्रह्मा की नहीं।

एक और कथा के अनुसार भगवान शिव तीन स्थानों पर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए – श्रीशैलम (मल्लिकार्जुन), द्राक्षाराम (भीमेश्वर) और कलेश्वरम। पर्वत ऋषि की कथा के अनुसार, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पर्वत बना दिया और स्वयं वहीं निवास किया, जिससे यह स्थान श्रीशैल पर्वत कहलाया। इस मंदिर में आदि शंकराचार्य, सिद्ध नागार्जुन, अल्लम प्रभु और अक्का महादेवी जैसे संतों ने भी तपस्या की थी।

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