
कालाराम मंदिर का निर्माण सरदार ओढेकर पेशवा ने सन् 1790 ई. में करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। इसका शिल्प बहुत सीमा तक त्र्यंबकेश्वर मंदिर के समान है। मुख्य गुम्बद की ऊंचाई 70 फुट है। मंदिर में कुल 96 स्तम्भ हैं, कलश में सोने का प्रयोग हुआ है। परिसर 285 फुट लम्बा और 105 फुट चौड़ा है। लगभग 12 वर्षों में यह विशाल मंदिर बनकर तैयार हुआ था जिसमें 2,000 शिल्पी लगे थे। मंदिर निर्माण के लिए काला पत्थर रामसेज की पहाड़ी से लाया गया था।
जिस स्थान पर कालाराम मंदिर का निर्माण किया गया है, उसी स्थान पर रामायणकाल में प्रभु श्रीराम ने वनवास काल में पर्णकुटी का निर्माण किया था, ऐसी मान्यता सहस्त्रों वर्षों से चली आ रही है। सामान्यत: श्रीराम के मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा धनुष बाण धारी होती है परन्तु यहां उनका एक हाथ छाती पर धरा है। माना जाता है कि वह अपने शरणागत का दुख हरते हैं अत: उनका हाथ छाती पर है।
गोदावरी तट पर यहां कपालेश्वर शिव मंदिर व भगवान विष्णु अवतार भगवान राम का मंदिर होने से इस स्थान को लोग हरिहर क्षेत्र धाम मानते हैं। कालाराम मंदिर में श्रद्धालु भक्त जन कालसर्प दोष निवारण के लिए आते हैं। मंदिर की मूर्त काले पत्थरों से ही निर्मित है। यहां पर श्रीराम नवमी व दशहरा तथा गुड़ीपड़वा के पर्व-त्यौहार प्रमुख रूप से मनाए जाते हैं। मंदिर प्रबंधन कालाराम संस्थान के हाथों में है।
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