गुप्त सहस्त्रधारा, सिरमौर जिला, हिमाचल प्रदेश: Gupt Sahastradhara

गुप्त सहस्त्रधारा, सिरमौर जिला, हिमाचल प्रदेश: Gupt Sahastradhara

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में जिस मंदिर का इतिहास क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और धार्मिक विद्ठानों द्वारा पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा हुआ माना जाता है, उसे गुप्त सहस्त्रधारा के नाम से पुकारा जाता है।

गुप्त सहस्त्रधारा, सिरमौर जिला, हिमाचल प्रदेश

जहां प्राचीन, सुंदर एवं ऐतिहासिक शिव मंदिर बना हुआ है तो साथ ही माता का मंदिर भी है। सहस्त्रधारा के नाम से अनेक प्रकार की जलधाराएं बहती हुई भी नजर आती हैं जहां पर एक तरफ पुरुष श्रद्धालुओं द्वारा जलधारा में अमृत स्नान किया जाता है तो वहीं दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग गुफा के निकट अमृत स्नान की व्यवस्था की गई है।

यहां मौजूद एक गुफा के बारे में कहा जाता है कि पांडवों ने सबसे अधिक अज्ञातवास का समय इसी धार्मिक स्थल परव्यतीत किया था, तो वहीं धार्मिक विद्वानों द्वारा कहा जाता है कि इस प्राचीन गुफा का रास्ता हरिद्वार तक पहुंचता है, जिसका निर्माण पांडवों ने किया था और इस गुफा से होकर ही उन्होंने हरिद्वार के लिए प्रस्थान किया था।

The site is located in Sirmaur, Himachal Pradesh which is close to Uttarakhand Border
The site is located in Sirmaur, Himachal Pradesh which is close to Uttarakhand Border

इससे हर कोई सहज ही अनुमान लगा सकता है कि यह धार्मिक स्थल युगों पूर्व अवश्य ऐसे ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी रहा होगा। इस धार्मिक स्थल के निकटस्थ पतित पावन मां यमुना नदी का संगम भी देखने को मिलता है।

माना जाता है कि शिव मंदिर सहस्त्रधारा के निचले हिस्से में बह रही टॉस नदी के साथ-साथ कुछ ही दूरी पर यह संगम है। यहां श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर अपने आप को कृतार्थ मानते हैं।

सहस्त्रधारा के साथ जिला सिरमौर ही नहीं, बल्कि हिमाचल और उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत महात्मा स्व. ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री पूर्णानंद जी महाराज (गुरासा), धौलीधाम वाले महात्मा जी का भी मंदिर बना हुआ है।

इस धार्मिक स्थल पर अनेक वर्षो तक उन्होंने तप साधना की और श्रद्धालुओं को ज्ञान गंगा और सनातन धर्म से समय-समय पर कृतार्थ किया।

वर्तमान में भी इनके हजारों शिष्य एवं श्रद्धालु इनके विभिन्न मंदिरों में पहुंच कर अपनी आस्था और विश्वास का परिचय देते नजर आते हैं।

गुप्त सहस्त्रधारा मंदिर की पांवटा साहिब से दूरी मात्र 25 किलोमीटर है। इस धार्मिक स्थल तक श्रद्धालुओं के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है। वट वृक्ष की विशाल जड़ें, टहनियां, पत्तों का विशाल आकार मंदिर के समस्त क्षेत्र में देखने को मिलता है। वटवृक्ष की जड़ों से हजारों जलधाराएं बहती हैं इसीलिए कदाचित इस क्षेत्र को सहस्त्रधारा के नाम से जाना जाता है।

ऐसी मान्यता भी है कि जब भगवान परशुराम जी ने सहस्त्रबाहुका वध किया तो उसके शरीर से जिस-जिस क्षेत्र में रक्तधाराएं गिरी, उन क्षेत्रों में से एक यह सहस्त्रधारा धार्मिक स्थल भी विख्यात हुआ।

इस क्षेत्र में हनुमान जी की एक सुंदर एवं विशाल मूर्ति भी स्थापित की गई है।

Hanuman ji statue at Gupt Sahastradhara, Sirmaur District
Hanuman ji statue at Gupt Sahastradhara, Sirmaur District

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