आज फिर से वह अस्पष्ट आकृती मेरे सामने आई मंद मंद मुस्कुराते हुए उसने पुछा “इतना खुश क्यो हो पगले!” आखरी शब्द को सुना अनसुना कर मैंने कहा “आत्माजी कल मेरा जन्मदिन है!” मेरी आत्मा बोली “मतलब?” मैं: मतलब आज के दिन ही मेरा जन्म हुआ था! आत्मा: तेरा जन्म कब हुआ? मैंने कहा: २९/०९/@#$# आत्मा: तो इससे पहेले तू …
Read More »अनाथ
माँ के निधन के पश्चात इकलौते बेटे ने पत्नी के कहने में आ कर अपने पिता को वृद्धाश्रम में भेजने का निर्णय ले लिया। पिता की समस्त भौतिक वस्तुएं समेट वो एक ईसाई पादरी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में पिता को ले आया। काउंटर पर बैठी क्लर्क ने बहुत से विकल्प दिए – टेलीविज़न, AC, शाकाहारी / मांसाहारी इत्यादि। पिता ने सादे एक …
Read More »जियो ओर जीने दो – प्रशांत सुभाषचन्द्र साळुंके
मैँ मेरे कुछ दोस्तो के साथ बैठा था। इधर उधर की बातें हो रही थी। अचानक सड़क किनारे से एक गाड़ी गुजरी। मेरा एक दोस्त उसे देखकर बावला सा हो गया ओर बुरी तरह से भौंकते हुवे उस गाड़ी के पीछे भागा। हम सब को उसका व्यवहार बड़ा विचित्र लगा! हम कुत्ते है! पर इतना तो जरूर समझ सकते है …
Read More »जान है तो जहान है
एक गाँव मे एक किसान रहता था। उन दिनों गाव पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। गाँव में सुखा पड़ा था। लोगों को पीने के पानी के लिए भी लाले पड़ गए थे। धरती बंजर हो गई थी। और आसमान से बारिश गिरने के कोई भी आसार नजर नहीं आ रहे थे। ऐसी परिस्थिति मे गाँव वालो ने गाँव …
Read More »दो कप चाय
एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं… उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी़ बरनी (जार) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची… उन्होंने …
Read More »बन्दर ही बन्दर
एक बार एक आदमी ने गांववालों से कहा की वो 1000 रु में एक बन्दर खरीदेगा, ये सुनकर सभी गांववाले नजदीकी जंगल की और दौड़ पड़े और वहां से बन्दर पकड़ पकड़ कर 1000 रु में उस आदमी को बेचने लगे। कुछ दिन बाद ये सिलसिला कम हो गया और लोगों की इस बात में दिलचस्पी कम हो गयी। फिर …
Read More »पिताजी की अठन्नी
पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी… “लगता है, बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था… अपने पेट का गड्ढ़ा भरता नहीं, घरवालों का कहाँ से भरोगे ?” मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा। पिताजी नल पर हाथ-मुँह धोकर सफ़र की थकान दूर कर रहे थे। इस बार मेरा हाथ कुछ …
Read More »किसान का इंटरव्यू
एक टी.वी. पत्रकार एक किसान का इंटरव्यू ले रहा था… पत्रकार : आप बकरे को क्या खिलाते हैं…? किसान : काले को या सफ़ेद को…? पत्रकार : सफ़ेद को… किसान : घास… पत्रकार : और काले को…? किसान : उसे भी घास… पत्रकार : आप इन बकरों को बांधते कहाँ हो…? किसान : काले को या सफ़ेद को…? पत्रकार : …
Read More »मेरी लूसी: प्रशांत सुभाषचंद्र सालुंके
एक समय की बात है, किसी गाव मे एक किसान रहता था। उसकी एक छोटी बेटी मेरी ओर एक बढ़िया नस्ल की कुतिया लूसी थी। लूसी हमेशा मेरी के साथ रहती। उसके साथ स्कूल मे जाती। शाम को उसके साथ खेलती। दोनो बहुत खुश थे। एक दिन अचानक गांव मे बरसात आई। इन्द्रदेव जेसे कोपामायन हुवे थे। बादलो मे से पानी टपक …
Read More »सपनों की ताबीर
रात में एक चोर घर में घुसता है। कमरे का दरवाजा खोला तो मुसहरी पर एक बूढ़ी औरत सो रही थी। खटपट से उसकी आंख खुल गई। चोर ने घबरा कर देखा तो वह लेटे लेटे बोली “बेटा, तुम देखने से किसी अच्छे घर के लगते हो, लगता है किसी परेशानी से मजबूर होकर इस रास्ते पर लग गए हो। …
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