गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

भगवान गुरु गोरक्षनाथ धुनि रमाने वाले महायोगी हैं। अनेकों कहानियां उनसे सम्पूर्ण भारत में जुडी हुई हैं। एक समय की बात है भगवान गुरु गोरक्षनाथ नर-नारायण पर्वत की ओर अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे। रास्ते में माता का प्रख्यात शक्ति पीठ पड़ गया। माता ने भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी को आता देख उनका रास्ता रोक लिया और उनसे निवेदन किया की वो कुछ समय उनके मंदिर में विश्राम करें। भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी ने कहा हे माता! तुम्हारे मंदिर में लोग मदिरा और मांस का भोग चढ़ाते हैं और हम एक महायोगी हैं।

माता हठ करने लगी और उनका रास्ता रोक लिया। माता के हठी स्वाभाव को देख भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी ने उनके निवेदन को स्वीकार करते हुए कहा हम अपने शिष्यों से भिक्षा मंगवाते हैं और आप हमें उसका भोजन बनवाकर खिलाएं। यह सुनकर माता अत्यंत प्रसन्न हुई और अपने मंदिर में चली गई। माता ने अपने मंदिर मेँ आंच प्रज्वलित कर ली यह मान कर की भगवान गुरु गोरक्षनाथ थोड़ी ही देर में अपने शिष्यों के साथ भिक्षा लेकर आएंगे। कई दिन बीत गए लेकिन भगवान गुरु गोरक्षनाथ नहीं आए। माता ने जो आंच प्रज्वलित करी थी वह आज तक इस स्थान पर जल रही है। इसके बाद माता का वह स्थान ज्वाला देवी के नाम से प्रख्यात हो गया जो हिमांचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में है। ऐसा माना जाता है की माता ज्वाला देवी आज भी भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी का इंतजार कर रही हैं और आंच आज तक जल रही हैं ज्वाला देवी के मंदिर में।

भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी के नाम पर ही भारत देश में एक सिटी का नाम गोरखपुर है जहां उनका पूरे विश्व का सबसे बड़ा मंदिर स्थापित है। आपको यह जान कर भी आश्चर्य होगा की नेपाल देश का नाम “गोरक्ष राष्ट्र” है। भगवान गुरु गोरक्षनाथ ही नेपाल देश का भी आधार कहलाते हैं। अनेकों कहानियां सम्पूर्ण विश्व में प्रचलित हैं जो यह सिद्ध करती हैं भगवान गुरु गोरक्षनाथ हर काल में हर युग में इस पृथ्वी पर निवास करते हैं।

~ भुवन जोशी

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