Bagalamukhi Temple is a Hindu temple located in Bankhandi, Kangra district of Himachal Pradesh, India. It is dedicated to the Hindu goddess Bagalamukhi, one of the ten Tantric Mahavidya goddesses. The goddess, also known as Peetambhara, is associated with the colour yellow.[1] She is depicted seated on a golden throne with pillars decorated with jewels and has three eyes, symbolising her ability to grant ultimate knowledge to her devotees.

Bagalamukhi Temple, Bankhandi, Kangra, HP
| Name: | Maa Baglamukhi Mandir, Bankhandi (बगलामुखी मंदिर, बांखंडी, हिमाचल प्रदेश) [maabaglamukhitemple.com] |
| Location: | Bankhandi, Kangra District, Himachal Pradesh 177114 India |
| Deity: | Bagalamukhi |
| Affiliation: | Hinduism |
| Festival: | Navratri |
| Founder: | – |
| Completed In: | – |
The temple is especially popular during the Hindu goddess-centric festival of Navaratri. It is one of three historically significant shrines dedicated to Bagalamukhi in India, the others being the Pitambara Peeth in Datia and the Bagalamukhi Temple in Nalkheda.
It is believed that worshipping goddess Bagalamukhi at this temple enhances one’s power and weakens one’s enemies, rendering them powerless. This highlights her role as a divine protector and a formidable force against adversities.
Legend:
According to Hindu legend, Rama, guided by Hanuman, worshipped goddess Bagalamukhi here to gain victory over the demon king Ravana.[4] The goddess granted Rama the divine weapon Brahmastra, symbolising the triumph of good over evil. The temple houses a sacred fire pit (Havan Kund), where Rama is believed to have performed a havan to seek her blessings.
बगलामुखी मंदिर, बांखंडी, हिमाचल प्रदेश
माँ बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के बनखंडी में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है । सिद्धपीठ माता बगलामुखी के मंदिर में हर वर्ष देश ब विदेश के विभिन्न राज्यों से लोग आकर अपने कष्टों के निवारण के लिए हवन, पूजा, पाठ करवाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
बगलामुखी मां दुर्गा का तांत्रिक स्वरूप रूप हैं। वे दस महाविद्या में से आठवीं हैं। रूपाकारों में इन्हें अष्ट-दस भुजा रूप में चित्रित किया गया है। संयम-नियमपूर्वक मां बगलामुखी के पाठ-पूजा, जाप, अनुष्ठान से सर्व अभीष्ट सिद्ध होते हैं। मां दुश्मनों का नाश करती हैं। यहां शत्रुओं से आशय काम, क्रोध, लोभ, मद और मोह से है। मां बगलामुखी की पूजा राज में विजय दिलाने वाली, राज्याधिकार के योग को संभव बनाने वाली हैं।
यह माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान एक रात में की गई थी। जिसमें सर्वप्रथम अर्जुन एवं भीम द्वारा युद्ध में शक्ति प्राप्त करने तथा माता बगलामुखी की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा की गई थी। कालांतर से ही यह मंदिर लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है तथा वर्ष भर असंख्य श्रद्धालु जो श्री ज्वालामुखी, माता चिंतपूर्णी, नगरकोट इत्यादि के दर्शन के लिए आते हैं, वे सभी इस मंदिर में आकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इसके अतिरिक्त मंदिर के साथ प्राचीन शिवालय में आदमकद शिवलिंग स्थापित है, जहां लोग माता के दर्शन के उपरांत शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माता बगलामुखी की आराधना सर्वप्रथम ब्रह्मा एवं विष्णु भगवान ने की थी। इसके उपरांत भगवान परशुराम ने माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्धों में शत्रुओं को परास्त करके विजय पाई थी।
बगलामुखी जयंती पर मंदिर में हवन करवाने का विशेष महत्त्व है जिससे कष्टों का निवारण होने के साथ-साथ शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है। द्रोणाचार्य, रावण, मेघनाद इत्यादि सभी महायोद्धाओं द्वारा माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्ध लड़े गए।
नगरकोट के महाराजा संसार चंद कटोच भी प्रायः इस मंदिर में आकर माता बगलामुखी की आराधना किया करते थे। माता के आशीर्वाद से उन्होंने कई युद्धों में विजय पाई थी। तभी से इस मंदिर में अपने कष्टों के निवारण के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आना आरंभ हुआ और श्रद्धालु नवग्रह शांति, ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति, सर्व कष्टों के निवारण के लिए मंदिर में हवन पाठ करवाते हैं।
माता बगलामुखी के संपूर्ण भारत में केवल दो सिद्ध शक्तिपीठ विद्यमान हैं, जिसमें एक मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया में तथा दूसरा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के बनखंडी में स्थित है।
लोगों का अटूट विश्वास है कि माता अपने दरबार से किसी को निराश नहीं भेजती हैं। केवल सच्ची श्रद्धा एवं सद्विचार की आवश्यकता है।
हिमाचल का कांगड़ा धाम
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बगलामुखी मंदिर अपनी अलौकिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से कानूनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता पाने के लिए भक्त यहां दूर-दूर से आते हैं। यहां घी के दीए जलाकर माता की विशेष साधना की जाती है, जिससे जीवन के बड़े संकट भी टल जाते हैं।
पीले रंग का महत्व और भोग
मां बगलामुखी को पीताम्बरा भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी की गांठ और बेसन के लड्डू अर्पित करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि जयंती के दिन पीले रंग की सामग्री का दान करने से आर्थिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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