उत्तर प्रदेश को बांटने की मांग एक बार फिर से राजनीतिक चर्चा में आ चुकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अब अमेठी से भी ऐसी ही बातें उठाई जा रही हैं। आपको बता दें कि भारत में बड़े राज्यों का बंटवारा कोई नई बात नहीं है। आइए जानते हैं कि भारत में किन राज्यों का बंटवारा हो चुका है।
भारत में कितने राज्यों का हो चुका है ‘बंटवारा’?
पहले बड़े विभाजन
भारत का पहला बड़ा राज्य विभाजन भाषा के आधार पर हुआ था। 1953 में आंध्र प्रदेश भाषाई आधार पर बनने वाला पहला राज्य था। इसे तेलुगु बोलने वाले लोगों के लिए मद्रास प्रैजीडैंसी से अलग किया गया था।
1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम ने राज्यों की सीमाओं को बड़े पैमाने पर भाषाई आधार पर तालमेल बिठाकर भारत के नक्शे को नया रूप दिया। इस प्रक्रिया का एक बड़ा नतीजा 1960 में सामने आया। दरअसल, बॉम्बे राज्य को मराठी बोलने वालों के लिए महाराष्ट्र और गुजराती बोलने वालों के लिए गुजरात में बांट दिया गया।
पंजाब पुनर्गठन और हिमालयी राज्य
उत्तरी भारत में भाषाई और सांस्कृतिक मांगों की वजह से 1966 में पंजाब का बंटवारा हुआ।
पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब का ही रहा और हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा बन गया।
पहाड़ी क्षेत्रों को अलग कर दिया गया और बाद में 1971 में हिमाचल प्रदेश के रूप में इन्हें पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इस पुनर्गठन के दौरान चंडीगढ़ को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी नामित किया गया।
ग्रेटर असम से कई राज्यों तक
पूर्वोत्तर भारत का ज्यादातर हिस्सा कभी अविभाजित असम का हिस्सा था। पहला विभाजन 1963 में नागालैंड के गठन के साथ हुआ। 1972 में मेघालय को असम से अलग किया गया और मणिपुर और त्रिपुरा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
लगातार राजनीतिक आंदोलन और शांति समझौतों का ही यह परिणाम था कि 1987 में मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बन गए। उसी साल गोवा को भी केंद्र शासित प्रदेश से बदलकर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
एक ऐतिहासिक साल
प्रशासनिक बोझ और क्षेत्रीय आकांक्षाओं की वजह से 2000 में स्वतंत्र भारत में सबसे जरूरी पुनर्गठनों में से एक हुआ। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग किया गया ताकि इसके आदिवासी बहुल क्षेत्र में शासन को बेहतर बनाया जा सके। इसी के साथ उत्तर प्रदेश से पहाड़ी जिलों को अलग करके उत्तराखंड बना दिया गया। इतना ही नहीं, इसके तुरंत बाद दक्षिणी बिहार से झारखंड बनाया गया।
हालिया बदलाव
राज्य विभाजन के कुछ सबसे बड़े उदाहरण बीते कुछ सालों में देखने को मिले। तेलंगाना को 2014 में एक लंबे जन आंदोलन के बाद आंध्र प्रदेश से अलग करके बनाया गया। इसके बाद 2019 में जम्मू और कश्मीर राज्य को अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया।
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