Rabindranath Tagore

रविन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए

रविन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए

  • जब मैं खुद पर हँसता हूँ तो मेरे ऊपर से मेरा बोझ कम हो जाता है।
  • तितली महीने नहीं क्षण गिनती है, और उसके पास पर्याप्त समय होता है।
  • अकेले फूल को कई काँटों से इर्ष्या करने की ज़रुरत नहीं होती।
  • उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।
  • बर्तन में रखा पानी चमकता है; समुद्र का पानी अस्पष्ट होता है। लघु सत्य स्पष्ठ शब्दों से बताया जा सकता है, महान सत्य मौन रहता है।
  • जिनके स्वामित्व बहुत होता है उनके पास डरने को बहुत कुछ होता है।
  • मुखर होना आसान है जब आप पूर्ण सत्य बोलने की प्रतीक्षा नहीं करते।
  • पृथ्वी द्वारा स्वर्ग से बोलने का अथक प्रयास हैं ये पेड़।
  • हम महानता के सबसे करीब तब होते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं।
  • हम तब स्वतंत्र होते हैं जब हम पूरी कीमत चुका देते हैं।
  • हम दुनिया में तब जीते हैं जब हम उसे प्रेम करते हैं।
  • कला क्या है? यह इंसान की रचनात्मक आत्मा की यथार्थ के पुकार के प्रति प्रतिक्रिया है।
  • सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते।
  • आपकी मूर्ती का टूट कर धूल में मिल जाना इस बात को साबित करता है कि इश्वर की धूल आपकी मूर्ती से महान है।

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