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Tag Archives: Roza

Eid Greetings

Eid Greetings

Eid Greetings: Depending on the moon, Eid, one of the biggest festival of Muslims. On the eve of Eid, Muslims greet each other with Eid cards. But the tradition of sending cards is now becoming an old trend. Muslims now prefer sending Eid Mubarak SMS or messages on social media like WhatsApp and Facebook to express Eid wishes to friends …

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Ramzan (Id-Ul-Fitr)

Ramzan (Id-Ul-Fitr)

Ramzan (Id-Ul-Fitr) – Muslim holiday that marks the end of Ramadan The five basic tenets of Islam are: There is no God but Allah and Prophet Muhammad is his messenger. Offering of five daily prayers. Fasting during Ramzaan. Paying Zakat, a compulsory annual tax of 2.5 per cent on savings and assets that is distributed among the poor. The Haj, …

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क़ुरबानी का दूसरा नाम औरत

क़ुरबानी का दूसरा नाम औरत

औरत सबसे पहले उठे, सहरी बनाए, सबसे आख़िर में खाए, फिर रोज़ा रखे, दोपहर में बच्चों के लिए पकाए, फिर चार बजे से अपने शोहर और ससूराल वालों या घर वालों के लिए अफ़तारी और खाना बनाने के लिए जुत जाती है, पकोड़े, दही भल्ले, छोले वग़ेरह बनाए फिर भी यही धड़का के पता नहीं शोहर, बाप, या सास ससुर …

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कल है मुस्लमानों का सबसे पवित्र रोजा

कल है मुस्लमानों का सबसे पवित्र रोजा

रोज़े का अर्थ केवल भूखा रहना ही नहीं, बल्कि अपनी ज़बान की हिफाजत करना अर्थात झूठ, निंदा, चुगली से परहेज़ करना, दिल में गलत ख्याल पैदा न होने देना, बुराई न सुनना, हाथ-पांवों को गलत रास्ते पर चलने और गलत काम करने से रोकना भी है अर्थात् अपनी इन्द्रियों पर काबू करना भी इसका एक असली मकसद है। सारा दिन …

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रोजेदार करें हर बुराई से परहेज

रोजेदार करें हर बुराई से परहेज

रोजेदार की अपनी भूख-प्यास जहां उसमें ईशपरायणता, आत्मनियंत्रण, अल्लाह के आज्ञा-पालन और धैर्य के गुण पैदा करने का जरिया बनती है वहीं रोजोदार को इंसानों पर भूख-प्यास और दुख-दर्द में जो कुछ बीतती है उसका आस्वादन भी कराती है। इस निजी अनुभव से उसके भीतर सहानुभूति की जीवंत भावना पैदा हो जाती है। यद्यपि रमजान के महीने में रोजे रखना …

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गए थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गए – Folktale on Hindi Proverb

गए थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गए – Folktale on Hindi Proverb

एक मोहल्ले में काजी का परिवार था। सब मोहल्ले वाले काजी के परिवार का सम्मान करते थे। इस परिवार के सभी बच्चे पढ़ने में होशियार थे। सभी काम में लगे हुए थे। लेकिन उस परिवार में एक लड़का ऐसा था कि उसके आचार – विचार घर के लोगों से अलग थे। परिवार के सब लोग नमाज पढ़ते थे और धार्मिक …

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