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Tag Archives: Forest

International Days Greetings

International Days Greetings

International Days Greetings: An international observance, also known as an international dedication or an international anniversary, is a period of time to observe some issue of international interest or concern. This is used to commemorate, promote and mobilize for action. Many of these periods have been established by the United Nations General Assembly (UN), Economic and Social Council, United Nations …

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What are themes for World Environment Day?

What are themes for World Environment Day?

Each year celebration of the World Environment Day is based on the particular theme decided by the United Nations to make the celebration more effective by encouraging mass people worldwide to hugely take part in addressing environmental issues on global scale. Year wise list of the themes and slogans of world environment day are mentioned below:

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गिरिजा कुमार माथुर जी द्वारा शब्द-चित्रण – थकी दुपहरी

गिरिजा कुमार माथुर जी द्वारा शब्द-चित्रण - थकी दुपहरी

थकी दुपहरी में पीपल पर काग बोलता शून्य स्वरों में फूल आखिरी ये बसंत के गिरे ग्रीष्म के ऊष्म करों में धीवर का सूना स्वर उठता तपी रेत के दूर तटों पर हल्की गरम हवा रेतीली झुक चलती सूने पेड़ों पर अब अशोक के भी थाले में ढेर ढेर पत्ते उड़ते हैं ठिठका नभ डूबा है रज में धूल भरी …

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World Forestry Day – 21st March

World Forestry Day - 21st March

World Forestry Day or International Day of Forests is celebrated worldwide every year on 21st of March at the international level in order to increase the public awareness among communities about the values, significance and contributions of the forests to balance the life cycle on the earth. World Forestry Day: History The World Forestry Day was established in the year 1971 …

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Gopal Singh Nepali Hindi Bal-Kavita यह लघु सरिता का बहता जल

Gopal Singh Nepali Hindi Bal-Kavita यह लघु सरिता का बहता जल

यह लघु सरिता का बहता जल‚ कितना शीतल‚ कितना निर्मल। हिमगिरि के हिम निकल–निकल‚ यह विमल दूध–सा हिम का जल‚ कर–कर निनाद कलकल छलछल‚ बहता आता नीचे पल–पल। तन का चंचल‚ मन का विह्वल। यह लघु सरिता का बहता जल। निर्मल जल की यह तेज धार‚ करके कितनी श्रृंखला पार‚ बहती रहती है लगातार‚ गिरती–उठती है बार बार। रखता है …

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उग आया है चाँँद – नरेंद्र शर्मा

उग आया है चाँँद - नरेंद्र शर्मा

सूरज डूब गया बल्ली भर – सागर के अथाह जल में। एक बाँँस भर उग आया है – चाँद‚ ताड़ के जंगल में। अगणित उँगली खोल‚ ताड़ के पत्र‚ चाँदनीं में डोले‚ ऐसा लगा‚ ताड़ का जंगल सोया रजत–पत्र खोले‚ कौन कहे‚ मन कहाँ–कहाँ हो आया‚ आज एक पल में। बनता मन का मुकुल इन्दु जो मौन गगन में ही …

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पगडंडी – प्रयाग शुक्ल

पगडंडी - प्रयाग शुक्ल

जाती पगडंडी यह वन को खींच लिये जाती है मन को शुभ्र–धवल कुछ्र–कुछ मटमैली अपने में सिमटी, पर, फैली। चली गई है खोई–खोई पत्तों की मह–मह से धोई फूलों के रंगों में छिप कर, कहीं दूर जाकर यह सोई! उदित चंद्र बादल भी छाए। किरणों के रथ के रथ आए। पर, यह तो अपने में खोई कहीं दूर जाकर यह …

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बांसुरी दिन की – माहेश्वर तिवारी

बांसुरी दिन की - माहेश्वर तिवारी

होंठ पर रख लो उठा कर बांसुरी दिन की देर तक बजते रहें ये नदी, जंगल, खेत कंपकपी पहने खड़े हों दूब, नरकुल, बेंत पहाड़ों की हथेली पर धूप हो मन की। धूप का वातावरण हो नयी कोंपल–सा गति बन कर गुनगुनाये ख़ुरदुरी भाषा खुले वत्सल हवाओं की दूधिया खिड़की। ∼ माहेश्वर तिवारी

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Ali Baba And The Forty Thieves – Edith H. Tarcov

Long ago, in a town not far from Bagdad, in the land of Persia, there lived a poor woodcutter called Ali Baba. One day, Ali Baba was working deep in the forest. Suddenly he heard the noise of many horses. He tied up his two mules behind some high rocks. Then he climbed into a tall tree to hide. From …

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चलो हम दोनों चलें वहां – नरेंद्र शर्मा

भरे जंगल के बीचो बीच, न कोई आया गया जहां, चलो हम दोनों चलें वहां। जहां दिन भर महुआ पर झूल, रात को चू पड़ते हैं फूल, बांस के झुरमुट में चुपचाप, जहां सोये नदियों के कूल; हरे जंगल के बीचो बीच, न कोई आया गया जहां, चलो हम दोनों चलें वहां। विहंग मृग का ही जहां निवास, जहां अपने …

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