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Harivansh Rai Bachchan Inspirational Hindi Poem नीड़ का निर्माण फिर फिर

Harivansh Rai Bachchan Inspirational Hindi Poem नीड़ का निर्माण फिर फिर

वह उठी आँधी कि नभ में छा गया सहसा अँधेरा, धूल धूसर बादलों न भूमि को इस भाँति घेरा, रात सा दिन हो गया फिर रात आई और काली, लग रहा था अब न होगा इस निशा का फिर सवेरा, रात के उत्पात–भय से भीत जन–जन, भीत कण–कण, किंतु प्रची से उषा की मोहिनी मुस्कान फिर–फिर! नीड़ का निर्माण फिर–फिर, …

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पानी – ओमप्रकाश बजाज Hindi Poem on Importance of Water

पानी - ओमप्रकाश बजाज Hindi Poem on Importance of Water

पानी अपना रास्ता स्वयं बनाता है, हमेशा ढलान की ओर जाता है। बहता पानी निर्मल शुद्ध रहता है, खड़ा हुआ पानी सड़ जाता है। पानी का तेज बहाव अपने साथ, बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ बहा ले जाता है। मीठा पानी पीने के काम आता है, शहरों में नलों से पहुंचाया जाता है। वर्षा ऋतु में नदियों में बाढ़ आती है, तबाही …

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रोज़ ज़हर पीना है – श्रीकृष्ण तिवारी

रोज़ ज़हर पीना है, सर्प–दंश सहना है, मुझको तो जीवन भर चंदन ही रहना है। वक़्त की हथेली पर प्रश्न–सा जड़ा हूं मैं, टूटते नदी–तट पर पेड़ सा खड़ा हूं मैं, रोज़ जलन पीनी है, अग्नि–दंश सहना है, मुझको तो लपटों में कंचन ही रहना है। शब्द में जनमा हूं अर्थ में धंसा हूं मैं, जाल में सवालों के आज …

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विप्लव गान – बालकृष्ण शर्मा ‘नविन’

कवि‚ कुछ ऐसी तान सुनाओ— जिससे उथल–पुथल मच जाये! एक हिलोर इधर से आये— एक हिलोर उधर से आये; प्राणों के लाले पड़ जाएं त्राहि–त्राहि रव नभ में छाये‚ नाश और सत्यानाशों का धुआंधार जग में छा जाये‚ बरसे आग जलद् जल जायें‚ भस्मसात् भूधर हो जायें‚ पाप–पुण्य सदसद्भावों की धूल उड़ उठे दायें–बायें‚ नभ का वक्षःस्थल फट जाये‚ तारे …

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मिट्टी की महिमा – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

निर्मम कुम्हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पिटी, हर बार बिखेरी गई, किंतु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी। आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए, यों तो बच्चों की गुडिया सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या आँधी आये तो उड़ जाए, पानी बरसे तो …

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