Home » Tag Archives: Baal Kavita

Tag Archives: Baal Kavita

स्कूल ना जाने की हठ पर एक बाल-कविता: माँ मुझको मत भेजो शाला

स्कूल ना जाने की हठ पर एक बाल-कविता: माँ मुझको मत भेजो शाला

अभी बहुत ही छोटी हूँ मैं, माँ मुझको मत भेजो शाळा। सुबह सुबह ही मुझे उठाकर , बस में रोज बिठा देती हो। किसी नर्सरी की कक्षा में, जबरन मुझे भिजा देती हो। डर के मारे ही माँ अब तक, आदेश नहीं मैंने टाला। चलो उठो, शाला जाना है , कहकर मुझे उठा देती हो। शायद मुझको भार समझकर, खुद …

Read More »

इंदिरा गौड़ की लोकप्रिय बाल कविता: दादी वाला गाँव

इंदिरा गौड़ की लोकप्रिय बाल कविता: दादी वाला गाँव

पापा याद बहुत आता है मुझको दादी वाला गाँव, दिन दिन भर घूमना खेत में वह भी बिल्कुल नंगे पाँव। मम्मी थीं बीमार इसी से पिछले साल नहीं जा पाए, आमों का मौसम था फिर भी छककर आम नहीं खा पाए। वहाँ न कोई रोक टोक है दिन भर खेलो मौज मनाओ, चाहे किसी खेत में घुसकर गन्ने चूसो भुट्टे …

Read More »

हद हो गई शैतानी की – नटखट बच्चों की बाल-कविता

हद हो गई शैतानी की - नटखट बच्चों की बाल-कविता

टिंकू ने मनमानी की, हद हो गई शैतानी की। सोफे का तकिया फेका, पलटा दिया नया स्टूल। मारा गोल पढाई से, आज नहीं पहुंचे स्कूल। फोड़ी बोतल पानी की। हद हो गई शैतानी की। हुई लड़ाई टिन्नी से, उसकी नई पुस्तक फाड़ी। माचिस लेकर घिस डाली, उसकी एक- एक काड़ी। माला तोड़ी नानी की। हद हो गई शैतानी की। ज्यादा …

Read More »

बंदर जी – भूखे बंदर पर हिंदी बाल-कविता

बंदर जी - भूखे बन्दर पर हिंदी बाल-कविता

देख कूदते बंदर जी को इस डाली से उस डाली, हंसते शोर मचाकर बच्चे पीटे ताली पे ताली। लगता है बंदर मामा जी आज बड़े ही भूखे हैं, उतरा-उतरा सा चेहरा है होंठ भी इनके सूखे हैं। तभी एक बच्चे को देखा मामा ने केला खाते, दौड़े उसके पास पहुंच गए फिर मुस्कराते-मुस्कराते। बच्चे ने फिर उनको जी भर केला …

Read More »

अच्छे बच्चे – शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता

अच्छे बच्चे - शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता

कहना हमेशा बड़ो का मानते माता पिता को शीश नवाते, अपने गुरुजनों का मान बढ़ाते वे ही बच्चे अच्छे कहलाते। नहा-धोकर रोज शाला जाते पढ़ाई में सदा अव्वल आते वे ही बच्चे अच्छे कहलाते। कभी न किसी से झगड़ा करते बात हमेशा सच्ची कहते, ऊंच-नीच का भाव न लाते वे ही बच्चे अच्छे कहलाते। कठिनाइयों से कभी न घबराते हमेशा …

Read More »

हुआ पसीने से तर: तपती गर्मी पर हिंदी बाल-कविता

हुआ पसीने से तर: तपती गर्मी पर हिंदी बाल-कविता

गर्मी में खाने को मैंने फ्रिज से सेब निकाला, गिरते-गिरते बचा हाथ से झट से उसे संभाला। बाहर आते ही गर्मी से हुआ बहुत बेहाल, बोला भइया नहीं उतारो मेरी नाजुक खाल। घबराहट में सिसक पड़ा वह लगा कांपने थर-थर, आंसू भर रोया बेचारा हुआ पसीने से तर। ~ रावेंद्र कुमार रवि

Read More »

प्यारी मां: माँ की ममता पर बाल-कविता

प्यारी मां: माँ की ममता पर बाल-कविता

मेरी भोली प्यारी मां दुनिया से है न्यारी मां, तुमसे मैंने जीवन पाया तुमने चलना मुझे सिखाया। हर संकट से मुझे उबारा तूने हरदम दिया सहारा, तू सबसे उपकारी मां मेरी भोली प्यारी मां। करुणामयी स्वरूप तुम्हारा अंधियारे में करे उजाला, महिमा तेरी मां है पावन ममता तेरी है मनभावन। तू है मेरी दुलारी मां मेरी भोली प्यारी मां, मीठी …

Read More »

गर्मी आई समस्या लाई Hindi Poem on Summers

गर्मी आई समस्या लाई Hindi Poem on Summers

गर्मी आई समस्याएं लाई सब की चिंता बढ़ाई, गर्म हवायें आग बरसायें लोग पसीने में नहायें। उल्टी-दस्त चक्कर आये घबराहट से जान जाये, मच्छर काटे डॉक्टर के पास जायें डेंगू, मलेरिया का डर सताये। पानी पी-पी के पेट भरू खाना खाने में संकोच करुं, कितना नहाऊं कितना पानी बहाऊं फिर भी तुझ से छुटकारा न पाऊं। शर्बत ठंडा राहत दिलाये …

Read More »

सूरज Hindi Poem on Morning Routine Habits

सूरज Hindi Poem on Morning Routine Habits

सूरज सर पर चढ़ आया है चिड़ियों ने नभ चहकाया है, तुम भी अपना बिस्तर छोड़ो जल्दी से अपना मुंह धो लो। सूरज को तुम करो प्रणाम निकलेगा दिन सुख के साथ, भगवान् को भी कर लो याद सफल होंगे सारे काज। पैर बड़ो के तुम छू लो छोटों को आशीष दो, दूध गटागट पी जाओ राजा बेटा तुम बन …

Read More »

सूर्य देव पर हिंदी बाल-कविता: अंधियारे से डरना कैसा

सूर्य देव पर हिंदी बाल-कविता: अंधियारे से डरना कैसा

अम्मा बोली – सूरज बेटे, जल्दी से उठ जाओ। धरती के सब लोग सो रहे, जाकर उन्हें उठाओ। मुर्गे थककर हार गये हैं, कब से चिल्ला चिल्ला। निकल घोंसलों से गौरैयां, मचा रहीं हैं हल्ला। तारों ने मुँह फेर लिया है, तुम मुंह धोकर जाओ। पूरब के पर्वत की चाहत, तुम्हें गोद में ले लें। सागर की लहरों की इच्छा, …

Read More »