Authors

Alphabetic list of our authors, contributors and editors.

  • Aacharya Kamal Nandlal

    Acharya Kamal Nandlal has a vast experience on astrological analysis over Jatak Jyotish on the behalf of BIHRAT PARASHARA HORA SHASTRA & command on remedial astrology by LalKitab, Gem Therapy, Color Therapy & Rudraksha Therapy. Giving Predictions regarding Falit Jyotish, Mundane Astrology etc. He has experience of reading 10000 & above Horoscopes, he has technical command on the Horary astrology & Astrological Analysis Reporting. Reporting on the subject of Health, Wealth, Property, Love & Passion, Marriage & Compatibility, Luck & Fortune, Karma & Economical sources. Astrologically Command on the Vimshottary, Ashtottarry, Yogini & KalaChakaras Dasha, Vimposhak Varga, AashtVarga, Maitri, Mahurta etc.
  • Arsi Prasad Singh

    मैथिली और हिन्दी के महाकवि आरसी प्रसाद सिंह (१९ अगस्त १९११ - नवम्बर १९९६) रूप, यौवन और प्रेम के कवि के रूप में विख्यात थे। बिहार के चार नक्षत्रों में वियोगी के साथ प्रभात और दिनकर के साथ आरसी सदैव याद किये जायेंगे। आरसी बाबू का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले के एरौत गाँव में १९ अगस्त १९११ में हुआ था|
  • Abhilash Kumar

    Abhilash, who wrote the popular bhajan 'Itni Shakti Hame Dena Data', has been writing in the film industry for 40 years. Now a days - write songs for television serials.
  • Agyeya

    Sachchidananda Hirananda Vatsyayan ‘Agyeya’ (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’) (7 March 1911 – 4 April 1987), popularly known by his pen-name Ajneya (“Beyond comprehension”), was a pioneer of modern trends not only in the realm of Hindi poetry, but also fiction, criticism and journalism. He was one of the most prominent exponents of the Nayi Kavita (New Poetry) and Prayog (Experiments) in Modern Hindi literature, edited the ‘Saptaks’, a literary series, and started Hindi newsweekly, Dinaman. Agyeya also translated some of his own works, as well as works of some other Indian authors to English. He also translated some books of world literature into Hindi.
  • Ajit Kumar

    अजित कुमार, जन्म– 9 जून 1933, लखनऊ, उत्तर प्रदेश। विधाएँ– उपन्यास, कविता, कहानी, यात्रा, संस्मरण, आलोचना। उपन्यास– छुट्टियाँ। कहानी– छाता और चारपाई। आलोचना– इधर की हिन्दी कविता, कविता का जीवित संसार। संस्मरण– दूर वन में, सफरी झोले में, निकट मन में, यहाँ से कहीं भी, अँधेरे में जुगनू, सफरी झोले में कुछ, जिनके संग जिया। संपादन– अकेले कंठ की पुकार, बच्चन निकट से, आचार्य रामचंद्र शुक्ल विचारकोश, हिंदी की प्रतिनिधि श्रेष्ठ कविताएँ (दो खंड), आठवें दशक की श्रेष्ठ प्रतिनिधि कविताएँ, बच्चन रचनावली (नौ खंड), सुमित्राकुमारी सिन्हा रचनावली, बच्चन की आत्मकथा, बच्चन के चुने हुए पत्र, कीर्ति चौधरी की कविताएँ, कीर्ति चौधरी की कहानियाँ, कीर्ति चौधरी की समग्र कविताएँ, नागपूजा और ओंकारनाथ श्रीवास्तव की अन्य कहानियाँ, बच्चन के साथ क्षण भर, दुनिया रंग बिरंगी, ओंकारनाथ के बीबीसी प्रसारण का संचयन।
  • Alhad Bikaneri

    श्यामलाल शर्मा उर्फ अल्हड़ बीकानेरी (17 मई 1937 – 17 जून 2009) हिन्दी साहित्य के जाने-माने हास्य कवि थे। उनका जन्म हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बीकानेर गाँव में हुआ था। श्री बीकानेरी की शब्द-यात्रा 1962 से गीत-गजल में पर्दापण हुई। उनकी साहित्यिक रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं आकाशवाणी, दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुई। वर्ष 86 में हरियाणवी फीचर फिल्म ‘छोटी साली’ के गीत-कहानी का लेखन व निर्माण किया। उन्होंने लगभग 15 पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘भज प्यारे तू सीताराम’, ‘घाट-घाट घूमे’, ‘अभी हंसता हूं’, ‘अब तो आंसू पोंछ’, ‘भैंसा पीवे सोम रस’, ‘ठाठ गजल के’, ‘रेत का जहाज’ एवं ‘अनछुए हाथ’, ‘खोल देना द्वार’ और ‘जय मैडम की बोल रे’ प्रसिद्ध रही। उनको 1996 में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। हरियाणा सरकार ने वर्ष 2004 हरियाणा गौरव पुरस्कार से भी नवाजा गया। इसके अतिरिक्त 1981 में ठिठोली पुरस्कार दिल्ली, काका हाथरसी पुरस्कार, उज्जैन का टेपा पुरस्कार, कानपुर का मानस पुरस्कार, बदायूं का व्यंग्य पुरस्कार, इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं यथा संभव उज्जैन पुरस्कार भी प्राप्त हुए। इसके अलावा अखिल भारतीय कवि सभा दिल्ली का काव्य गौरव एवं दिल्ली सरकार काका हाथरसी सम्मान भी मिला।
  • Amitabh Tripathi Amit

    अमिताभ त्रिपाठी ‘अमित’ जन्म– 26 जनवरी 1960। शिक्षा– रसायन शास्त्र में स्नातकोतर एवं पीएच. डी.। सम्प्रति– प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) कविता, गीत, गज़ल व कहानी लेखन में रुचि। कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। रचनाधर्मिता नाम से वे एक चिट्ठा भी लिखते हैं।
  • Amrita Pritam

    अमृता प्रीतम (१९१९-२००५) पंजाबी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थी। पंजाब (भारत) के गुजराँवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है। उन्होंने कुल मिलाकर लगभग १०० पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा 'रसीदी टिकट' भी शामिल है। अमृता प्रीतम उन साहित्यकारों में थीं जिनकी कृतियों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। अपने अंतिम दिनों में अमृता प्रीतम को भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्मविभूषण भी प्राप्त हुआ। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से पहले ही अलंकृत किया जा चुका था। अमृता प्रीतम का जन्म १९१९ में गुजरांवाला पंजाब (भारत) में हुआ। बचपन बीता लाहौर में, शिक्षा भी वहीं हुई। किशोरावस्था से लिखना शुरू किया: कविता, कहानी और निबंध। प्रकाशित पुस्तकें पचास से अधिक। महत्त्वपूर्ण रचनाएं अनेक देशी विदेशी भाषाओं में अनूदित। १९५७ में साहित्य अकादमी पुरस्कार, १९५८ में पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा पुरस्कृत, १९८८ में बल्गारिया वैरोव पुरस्कार; (अन्तर्राष्ट्रीय) और १९८२ में भारत के सर्वोच्च साहित्त्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित। उन्हें अपनी पंजाबी कविता अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ के लिए बहुत प्रसिद्धी प्राप्त हुई। इस कविता में भारत विभाजन के समय पंजाब में हुई भयानक घटनाओं का अत्यंत दुखद वर्णन है और यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में सराही गयी।
  • Anamika

    अनामिका (जन्म– 17 अगस्त 1961, मुजफ्फरपुर, बिहार) आधुनिक समय में हिन्दी भाषा की प्रमुख कवयित्री, आलोचक, अनुवादक, कहानीकार और उपन्यासकार हैं। शिक्षा– दिल्ली विश्वविद्यालय से अँग्रेजी साहित्य में एम.ए., पी.एचडी., डी० लिट्। अध्यापन– अँग्रेजी विभाग, सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय। अंग्रेज़ी की प्राध्यापिका होने के बावजूद अनामिका ने हिन्दी कविता को समृद्ध करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। समकालीन हिन्दी कविता की चंद सर्वाधिक चर्चित कवयित्रियों में वे शामिल की जाती हैं। प्रमुख कृतियाँ– 1. पोस्ट-एलियट पोएट्री : अ वोएज फ्रॉम कॉन्फ्लिक्ट टु आइसोलेशन (आलोचना), 2. डन क्रिटिसिज्म डाउन द एजेज (आलोचना), 3. ट्रीटमेंट ऑफ लव ऐण्ड डेथ इन पोस्टवार अमेरिकन विमेन पोएट्स (आलोचना), 4. समकालीन अंग्रेजी कविता (अनुवाद), 5. पर कौन सुनेगा (उपन्यास) 6. मन कृष्ण : मन अर्जुन (उपन्यास), 7. प्रतिनायक (कथा संग्रह), 8. समय के शहर में (कविता-संग्रह)। पुरस्कार/सम्मान– राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजाकुमार माथुर पुरस्कार, ऋतुराज सम्मान द्विजदेव सम्मान केदार सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. मैनेजर पांडेय के अनुसार “भारतीय समाज एवं जनजीवन में जो घटित हो रहा है और घटित होने की प्रक्रिया में जो कुछ गुम हो रहा है, अनामिका की कविता में उसकी प्रभावी पहचान और अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।” वहीं दिविक रमेश के कथनानुसार “अनामिका की बिंबधर्मिता पर पकड़ तो अच्छी है ही, दृश्य बंधों को सजीव करने की उनकी भाषा भी बेहद सशक्त है।”
  • Anand Bakshi

    Anand Bakshi (21 July 1930 – 30 March 2002) was a popular Indian poet and lyricist. आनंद बख़्शी यह वह नाम है जिसके बिना आज तक बनी बहुत बड़ी-बड़ी म्यूज़िकल फ़िल्मों को शायद वह सफलता न मिलती जिनको बनाने वाले आज गर्व करते हैं। आनन्द साहब चंद उन नामी चित्रपट (फ़िल्म) गीतकारों में से एक हैं जिन्होंने एक के बाद एक अनेक और लगातार साल दर साल बहुचर्चित और दिल लुभाने वाले यादगार गीत लिखे, जिनको सुनने वाले आज भी गुनगुनाते हैं, गाते हैं। जो प्रेम गीत उनकी कलम से उतरे उनके बारे में जितना कहा जाये कम है, प्यार ही ऐसा शब्द है जो उनके गीतों को परिभाषित करता है और जब उन्होंने दर्द लिखा तो सुनने वालों की आँखें छलक उठीं दिल भर आया, ऐसे गीतकार थे आनन्द बक्षी। दोस्ती पर शोले फ़िल्म में लिखा वह गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे' आज तक कौन नहीं गाता-गुनगुनाता। ज़िन्दगी की तल्खियो को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी न किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गयी। गीत जितने सरल हैं उतनी ही सरलता से हर दिल में उतर जाते हैं, जैसे ख़ुशबू हवा में और चंदन पानी में घुल जाता है। मैं तो यह कहूँगा प्रेम शब्द को शहद से भी मीठा अगर महसूस करना हो तो आनन्द बक्षी साहब के गीत सुनिये। मजरूह सुल्तानपुरी के साथ-साथ एक आनन्द बक्षी ही ऐसे गीतकार हैं जिन्होने 43 वर्षों तक लगातार एक के बाद एक सुन्दर और कृतिमता (बनावट) से परे मनमोहक गीत लिखे, जब तक उनके तन में साँस का एक भी टुकड़ा बाक़ी रहा।
  • Anand Priya Sharma

    निजी व्यवसाय, लेखन नियमित नहीं, कभी कोई घटना दिल के करीब से गुजर जाती है तो अभिव्यक्ति के लिए कलम उठ जाती है| भूख एक ऐसे ही घटना का रुपान्तरण है| पता - २०१, शालिग्राम श्रीम स्रुस्ठी, सनफारमा रोड, अटलादरा, वडोदरा, गुजरात
  • Anita Sharma

    अनीता जी Indore की रहने वाली हैं, और वह नेत्रहीन बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का नेक काम करती हैं। You Tube पर अपने द्वारा की गयी recording के ज़रिये वह ऐसे बच्चों को बैंक, इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने में सहयोग करती हैं। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों में यकीन रखने वाली अनीता जी का मानना है कि: ”इंसान की सेवा भगवान की सेवा है“।
  • Anjaan

    अंजान (अंग्रेज़ी: Anjaan ; जन्म- 28 अक्टूबर, 1930, बनारस, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 13 सितम्बर, 1997) भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर गीतकार तथा अपने समय के ख्याति प्राप्त शायर थे। इनका वास्तविक नाम 'लालजी पाण्डेय' था। अंजान के लिखे हुए गीत आज भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं। 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे न जाने कितने ही सदाबहार गीत अंजान ने लिखे और प्रसिद्धि की ऊँचाईयों को छुआ। अमिताभ बच्चन पर फ़िल्माये गए उनके गीत काफ़ी लोकप्रियता हासिल करते थे। अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता है। इनके संगीत निर्देशन में अंजान के गीतों को नई पहचान मिली थी। अंजान साहब के पुत्र समीर भी पिता के समान ही प्रसिद्ध गीतकार हैं।
  • Anjana Bhatt

    अंजना भट्ट जन्म– 27 सितम्बर 1957 जन्म स्थान नई दिल्ली, भारत।
  • Anton Chekhov

    Anton Chekhov was a Russian playwright and short-story writer, who was famous for his masterful short stories and lyrical dreams. Anton Chekhov was born in 1860 in Taganrog, located south in Russia. He's the third of 6 children. As Anton Chekhov grew up, he attended secondary school in Taganrog and in 1879 he enrolled in the School of Medicine at the University of Moscow. Six years later, he graduated. While in university, Anton Chekhov unfortunately got tuberculosis. Besides, he had to earn money to pay his way through college and support his family; Chekhov made a living by writing stories, short sketches or jokes to journals or papers. Later, a writer called Dmitry Grigotovich found his talent in writing and helped him improve the quality of his stories. As a result, Chekhov's reputation began to grow. In 1890 Chekhov made a trip to the Prison Island of Sakhalin, which is in the Far East. After his return to Russia, Chekhov was devoted to the relief work during the 1892 famine. Then, he bought a small estate at Melikhovo and moved there with his family. While living there, Chekhov created some of his best-known works. In addition to that, he produced two of his major plays, The Sea-Gull and Uncle Vanya. In 1898, the newly formed Moscow Art Theatre successfully put The Sea-Gull on the stage. Thanks to the success, the theatre also began to establish its reputation. Chekhov is famed as a master of the short story. Although some of his best prose pieces are almost novel length, the stories, as well as his better-known short works, achieve their effect with a minimum of artistic means. All of Chekhov's best work is an illustration of his dictum or statement: " Conciseness is the sister of talent." Chekhov's plays deal with the passing of the vitality of the Russian gentry.
  • Anupam V Kapil

    Anupam V Kapil, is India’s topmost astro-numerologist and best selling author of Numerology Made Easy (Penguin Books), his daily forecasts in The Times of India (all editions), have made him India’s most popular columnist. Anupam has deep knowledge and exposure of all forms of occult sciences whether remedial astrology, numerology, palmistry, tarot, svara vidya, face reading and pendulum dowsing and is also India’s only phonetic numerologist.
  • Arshia Sheikh

    Dr. Arshia Sheikh have done Bachelor of Ayurvedic Medicine (BAMS). Postgraduate in Biotechnology. Done schooling from City Montessori Inter College, Lucknow. Have passion for writing and studying various subjects indulged my curious mind on hunt of new things and ability to take calculated risk. Her personal skills include comprehensive problem solving abilities, excellent verbal and written communication skills, ability to deal with people diplomatically and an inbuilt urge to learn. Worked in reputed computer firm as a Subject Matter Expert for subjects like Chemistry, Biology. She has also worked as SME for various websites, where her work included as preparing master control index, framing new question for biology and chemistry for various competitive examination as per requirement, correction and verification of the text and validation for release. Also prepared content for Tata McGraw Hill (AIEEE chemistry) and CAT (verbal ability). Prepared content for AIPMT Biology and Medical Demo for their website. She is also interested in writing articles and poetry for various website and my work is present on internet. Still a budding writer and want to improve skills as passionate about learning new ideas.
  • Arun Prasad

    Profile not available.
  • Ashok Anjum

    अशोक अंजुम, जन्म– 15 दिसम्बर 1966, दवथला, अलीगढ़, उत्तरप्रदेश। अशोक अंजुम साहित्य जगत के बहुचर्चित व्यक्तित्वों में से एक हैं। हिन्दी की साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के लगभग हर दूसरे-तीसरे अंक में उनकी उपस्थिति देखी जा सकती है। साहित्यिक मंचों के साथ-साथ रंगमंच के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भागेदारी है। उनकी अब तक - ‘मेरी प्रिय ग़ज़लें’, ‘मुस्कानें हैं ऊपर-ऊपर’, ‘अशोक अंजुम की प्रतिनिधि ग़ज़लें’, ‘तुम्हरे लिये ग़ज़ल’, ‘जाल के अन्दर जाल मियां’ (ग़ज़ल संग्रह); एक नदी प्यासी (गीत सग्रह); भानुमति का पिटारा’, ‘ख़ुल्लम ख़ुल्ला’, ‘दुग्गी चौके छ्क्के’, ‘अशोक अंजुम की हास्य-व्यंग्य कविताएं‘ (हास्य-व्यंग्य संग्रह) साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इसके अतिरिक्त पांच ग़ज़ल संग्रह, नौ हास्य-व्यंग्य संग्रह, छ: दोहा संकलन, दो लघुकथा संकलन तथा दो गीत संकलन अंजुम जी के संपादन में प्रकाशित हो चुके हैं। पिछले पन्द्रह वर्षों से ‘प्रयास’ साहित्यिक त्रैमासिकी का संपादन कर रहे हैं। संवेदना प्रकाशन के नाम से अपना प्रकाशन भी चलाते हैं। इस सबमें सबसे बडी बात ये कि ये सब वे एक बहुत छोटी जगह अलीगढ से लगभग पन्द्रह किलोमीटर दूर कासिमपुर नामक छोटे से कस्बे से करते हैं। कासिमपुर दो वज़हों से जाना जाता है-एक-अपने बिज़ली के पावरहाऊस के लिये दो- साहित्यिक पावर हाऊस अशोक अंजुम के लिये। अभी उनका दोहा संग्रह प्रकाशित हुआ है- ‘प्रिया तुम्हारा गांव’।
  • Atal Bihari Vajpayee

    अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म: 25 दिसंबर, 1924) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले १६ मई से 1 जून 1996 तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है। सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते हैं।
  • Ayodhya Singh Upadhyay ‘Hariaudh’

    अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (१५ अप्रैल, १८६५ – १६ मार्च, १९४७) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार है। यह हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रह चुके हैं और सम्मेलन द्वारा विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किये जा चुके हैं। प्रिय प्रवास हरिऔध जी का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह हिंदी खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है और इसे मंगलाप्रसाद पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
  • Bal Swaroop Rahi

    बालस्वरूप राही जन्म– १६ मई १९३६ को तिमारपुर, दिल्ली में। शिक्षा– स्नातकोत्तर उपाधि हिंदी साहित्य में। कार्यक्षेत्र: दिल्ली विश्विद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष के साहित्यिक सहायक, लेखन, संपादन व दूरदर्शन के लिये लगभग तीस वृत्तिचित्रों का निर्माण। कविता, लेख, व्यंग्य रचनाएँ, नियमित स्तंभ, संपादन और अनुवाद के अतिरिक्त फिल्मों में पटकथा व गीत लेखन। प्रकाशित कृतियाँ: कविता संग्रह- मौन रूप तुम्हारा दर्पण, जो नितांत मेरी है, राग विराग। बाल कविता संग्रह- दादी अम्मा मुझे बताओ, जब हम होंगे बड़े, बंद कटोरी मीठा जल, हम सबसे आगे निकलेंगे, गाल बने गुब्बारे, सूरज का रथ आदि।
  • Balbir Singh Rang

    जन्म (1911-1984): ग्राम नगला कटीला, ज़िला एटा, उत्तरप्रदेश, भारत। कुछ प्रमुख कृतियाँ: सिंहासन, प्रवेश-गीत, साँझ-सकारे, संगम,गंध रचती छंद, शारदीया (सभी कविता-संग्रह) विविध कृषक चेतना के किसान गीतकार और कवि।
  • Balkrishna Rao

    बालकृष्ण राव (जन्म 1913, निधन 1976) हिन्दी के कवि एवं संपादक थें। ये हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद (प्रयाग) की पत्रिका ’माध्यम’ के पहले सम्पादक बने एवं भारत सरकार के आकाशवाणी विभाग में रहकर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य किए। इनकी अनेक आलोचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। 1953 में ’कवि-भारती’ पत्रिका के सह सम्पादक रहे। बाद में अमृतराय के साथ मिलकर ’हंस’ का भी सम्पादन किया। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के अध्यक्ष रहे।
  • Bankim Chandra Chattopadhyay

    बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय (27 जून 1838 – 1894) बंगला के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ उनकी ही रचना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गया था। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पूर्ववर्ती बांग्ला साहित्यकारों में उनका अन्यतम स्थान है। आधुनिक युग में बंगला साहित्य का उत्थान उन्नीसवीं सदी के मध्य से शुरु हुआ। इसमें राजा राममोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, प्यारीचाँद मित्र, माइकल मधुसुदन दत्त, बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय, रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अग्रणी भूमिका निभायी। इसके पहले बंगाल के साहित्यकार बंगला की जगह संस्कृत या अंग्रेजी में लिखना पसन्द करते थे। बंगला साहित्य में जनमानस तक पैठ बनाने वालों मे शायद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय पहले साहित्यकार थे। बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून सन् 1838 को उत्तरी चौबीस परगना के कन्थलपाड़ा में एक परंपरागत और समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा हुगली कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। 1857 में उन्होंने बी.ए. पास किया और 1869 में क़ानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होने सरकारी नौकरी कर ली और 1891 में सरकारी सेवा से रिटायर हुए। उनका निधन अप्रैल 1894 में हुआ। प्रेसीडेंसी कालेज से बी. ए. की उपाधि लेनेवाले ये पहले भारतीय थे। शिक्षा समाप्ति के तुरंत बाद डिप्टी मजिस्ट्रेट पद पर इनकी नियुक्ति हो गई। कुछ काल तक बंगाल सरकार के सचिव पद पर भी रहे। रायबहादुर और सी. आई. ई. की उपाधियाँ पाईं।
  • Barsane Lal Chaturvedi

    डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हास्य के विख्यात कवि थे। बरसाने लाल चतुर्वेदी ने हास्य रस के छह भेदों को ‘आत्मस्थ’ और ‘परस्थ’ में विभाजित कर उसे बारह प्रकार का माना है। डॉ. बरसाने लाल को देखते ही मोटी बुद्धि वाले भी सही-सही अन्दाज लगा लेते कि वे मथुरा के चौबे होंगे। अच्छा खासा कद, रंग के भूरे भक्क, मानो सफेद लक्स की चिकनी-चुपडी बट्टी हो। हँसमुख चेहरे पर चश्मा लगाए, चमकती-दमकती चप्पलों में गजराज से झूमते-झूमते आते, तो दूर से ही लोग अंदाज लगा लेते हैं कि डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी आ रहे हैं। घर के भीतर हाथरसी लाल रंग का अंगोछा कमर में बांधे और शरीर पर बनियान में दिखाई पड जाते तो जाति पूछने की जरूरत ही नहीं होती। सच मानो वे सौ टंच चौबे ही लगते थे। डॉ. साहब घर पर हों या बाहर आँखों पर हमेशा चश्मा चढाए रहते। गोरे-गोरे, गोल-गोल चेहरे पर चश्मा फब्ता भी खूब था। पान से भरा हुआ मुख, सफाचट्ट मूंछ, शाल ओढे दिखाई पड जाते तो नवोढा नायिका से लगते। उनसे बात करने का मौका हाथ लग जाता तो उनका चतुर्वेदीपन का लहजा साफ सुनाई पडता। मिठलौनी ठेठ ब्रज भाषा में जब अपनेपन की चासनी और चढा देते तो सोने में सुहागा हो जाता। उनकी रसभरी बातों को सुनकर पराए भी अपने हो जाते। उनकी अपनत्त्व भरी और गंभीरता से सनी बातों को सुनकर कोई यह नहीं कह सकता था कि वे हास्य के कवि हो सकते हैं। ऐसे विनोदी स्वभाव के चतुर्वेदी जी दिल्ली में घुस गए पद्मश्री पा गए। मथुरा से दिल्ली तक उनकी तूती बोलती रही। एक से एक ऊंचे सम्मान पाए। पुरस्कार पाए। जमीन से जुडकर चले। वे आपा धापी, खींचा तानी और मनमानी के माहौल में तनावों से घिरे लोगों को, कुम्हलाए हुए चेहरों को, हँसी बांटते हुए एक दिन चुपचाप हमसे हमेशा के लिए विदा हो गए। आज भी उनकी हास्य और व्यंग्य की रचनाएं उन्हें हमारे सामने साकार कर जाती हैं।
  • Bashir Badr

    डॉ. बशीर बद्र (जन्म १५ फ़रवरी १९३६) को उर्दू का वह शायर माना जाता है जिसने कामयाबी की बुलन्दियों को फतेह कर बहुत लम्बी दूरी तक लोगों की दिलों की धड़कनों को अपनी शायरी में उतारा है। साहित्य और नाटक आकेदमी में किए गये योगदानो के लिए उन्हें १९९९ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर है। भोपाल से ताल्लुकात रखने वाले बशीर बद्र का जन्म कानपुर में हुआ था। आज के मशहूर शायर और गीतकार नुसरत बद्र इनके सुपुत्र हैं। डॉ. बशीर बद्र 56 साल से हिन्दी और उर्दू में देश के सबसे मशहूर शायर हैं। दुनिया के दो दर्जन से ज्यादा मुल्कों में मुशायरे में शिरकत कर चुके हैं। बशीर बद्र आम आदमी के शायर हैं। ज़िंदगी की आम बातों को बेहद ख़ूबसूरती और सलीके से अपनी ग़ज़लों में कह जाना बशीर बद्र साहब की ख़ासियत है। उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को एक नया लहजा दिया। यही वजह है कि उन्होंने श्रोता और पाठकों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई है।
  • Bejan Daruwalla

    Bejan Daruwalla, born 11 July 1931, is a popular Indian astrology columnist. He has also served as a professor of English in Ahmedabad. Despite being of Parsi heritage, he is known to be an ardent follower of Shri Ganesh. His astrological techniques combines Indian and Western Astrology, I-Ching, Tarot reading, the Kabalah and Palmistry.
  • Bekal Utsahi

    Bekal Utsahi was born in Balrampur in 1928. He is a poet, writer and politician. He is a congress man and close to Indira Gandhi, also former Member of Parliament in the Upper House Rajya sabha. He has many national awards, the Padma Shri, Yash Bharti, and others.
  • Bhagwati Charan Verma

    भगवती चरण वर्मा (30 अगस्त 1903 - 5 अक्टूबर 1988) हिन्दी के साहित्यकार थे। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1971 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। भगवती चरण वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर गाँव में हुआ था। वर्माजी ने इलाहाबाद से बी॰ए॰, एल॰एल॰बी॰ की डिग्री प्राप्त की और प्रारम्भ में कविता लेखन किया। फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात हुए। 1933 के करीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे। 1936 के लगभग फिल्म कारपोरेशन, कलकत्ता में कार्य किया। कुछ दिनों ‘विचार’ नामक साप्ताहिक का प्रकाशन-संपादन, इसके बाद बंबई में फिल्म-कथालेखन तथा दैनिक ‘नवजीवन’ का सम्पादन, फिर आकाशवाणी के कई केंन्दों में कार्य। बाद में, 1957 से मृत्यु-पर्यंत स्वतंत्न साहित्यकार के रूप में लेखन। ‘चित्रलेखा’ उपन्यास पर दो बार फिल्म-निर्माण और ‘भूले-बिसरे चित्र’ साहित्य अकादमी से सम्मानित। पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त।
  • Bharat Bhushan Agarwal

    कवि, लेखक और समालोचक भारतभूषण अग्रवाल का जन्म 3 अगस्त 1919 (तुलसी-जयंती) को मथुरा (उ.प्र.) के सतघड़ा मोहल्ले में हुआ। उनका निधन 23 जून 1975 (सूर-जयंती) को हुआ। इन्होंने आगरा तथा दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त की फिर आकाशवाणी में तथा में तथा अनेक साहित्यिक संस्थाओं में सेवा की। पैतृक व्यवसाय से दूर, उन्होंने साहित्य रचना को ही अपना कर्म माना। पहला काव्य-संग्रह 'छवि के बंधन' (1941) प्रकाशित होने के बाद, वे मारवाड़ी समाज के मुखपत्र 'समाज सेवक' के संपादक होकर कलकत्ता गए। यहीं उनका परिचय बांग्ला साहित्य और संस्कृति से हुआ। भारतभूषणजी 'तारसप्तक' (1943) में महत्वपूर्ण कवि के रूप में सम्मिलित हुए और अपनी कविताओं तथा वक्तव्यों के लिए चर्चित हुए। अपनी अन्य कृतियों 'जागते रहो' (1942), 'मुक्तिमार्ग' (1947) के लेखन के दौरान वे इलाहाबाद से प्रकाशित पत्रिका 'प्रतीक' से भी जुड़े और 1948 में आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिकारी बने। 1959 में उनका एक संग्रह 'ओ अप्रस्तुत मन' प्रकाशित हुआ, जो उनकी रचनात्मक परिपक्वता और वैचारिक प्रौढ़ता का निदर्शन था।
  • Bharat Vyas

    जन्म: 06 जनवरी 1918 (बीकानेर, राजस्थान); निधन: 04 जुलाई 1982 हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार
  • Bhawani Prasad Mishra

    भवानी प्रसाद मिश्र (जन्म: २९ मार्च १९१३ - मृत्यु: २० फ़रवरी १९८५) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वे दूसरे तार-सप्तक के एक प्रमुख कवि हैं। गाँधीवाद की स्वच्छता, पावनता और नैतिकता का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह 'गीत-फ़रोश' अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। थे। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। उन्होंने स्वयं को कभी भी कभी निराशा के गर्त में डूबने नहीं दिया। जैसे सात-सात बार मौत से वे लड़े वैसे ही आजादी के पहले गुलामी से लड़े और आजादी के बाद तानाशाही से भी लड़े। आपातकाल के दौरान नियम पूर्वक सुबह दोपहर शाम तीनों बेलाओं में उन्होंने कवितायें लिखी थीं जो बाद में त्रिकाल सन्ध्या नामक पुस्तक में प्रकाशित भी हुईं। भवानी भाई को १९७२ में उनकी कृति बुनी हुई रस्सी के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। १९८१-८२ में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का साहित्यकार सम्मान दिया गया तथा १९८३ में उन्हें मध्य प्रदेश शासन के शिखर सम्मान से अलंकृत किया गया।
  • Buddhinath Mishra

    बुद्धिनाथ मिश्र, जन्म– मई,1949 को मिथिलांचल में समस्तीपुर (बिहार) के देवधा गाँव में मैथिल ब्राह्मण परिवार में जन्म। शिक्षा– गाँव के मिडिल स्कूल और रेवतीपुर (गाज़ीपुर) की संस्कृत पाठशाला में प्रारम्भिक शिक्षा, वाराणसी के डीएवी कालेज और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कालेज में उच्च शिक्षा। एम.ए. (अंग्रेज़ी), एम.ए. (हिन्दी), ‘यथार्थवाद और हिन्दी नवगीत’ प्रबंध पर पी.एच.डी. की उपाधि। 1966 से हिन्दी और मातृभाषा मैथिली के प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में निबंध, कहानी, गीत, रिपोर्ताज़ आदि का नियमित प्रकाशन। ‘प्रभात वार्ता’ दैनिक में ‘साप्ताहिक कोना’, ‘सद्भावना दर्पण’ में ‘पुरैन पात’ और ‘सृजनगाथाडॉटकॉम’ पर ‘जाग मछन्दर गोरख आया’ स्तम्भ लेखन। देश के शीर्षस्थ नवगीतकार और राजभाषा विशेषज्ञ। मधुर स्वर, खनकते शब्द, सुरीले बिम्बात्मक गीत, ऋजु व्यक्तित्व। राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय काव्यमंचों के अग्रगण्य गीत-कवि। 1969 से आकाशवाणी और दूरदर्शन के सभी केन्द्रों पर काव्यपाठ, वार्ता, संगीत रूपकों का प्रसारण। बीबीसी, रेडियो मास्को आदि से भी काव्यपाठ, भेंटवार्ता प्रसारित। दूरदर्शन के राष्ट्रीय धारावाहिक ‘क्यों और कैसे?’ का पटकथा लेखन। वीनस कम्पनी से ‘काव्यमाला’ और ‘जाल फेंक रे मछेरे’ कैसेट, मैथिली संस्कार गीतों के दो ई.पी. रिकार्ड और संगीतबद्ध गीतों का कैसेट ‘अनन्या’। डीवीडी ‘राग लाया हूँ’ निर्माणाधीन। सम्मान– अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान, दुष्यन्त कुमार अलंकरण, परिवार सम्मान, निराला, दिनकर और बच्चन सम्मान। ‘कविरत्न’ और ‘साहित्य सारस्वत’ उपाधि।
  • C. Schmid

    Christoph von Schmid (15 August 1768 Dinkelsbühl, Bavaria – 3 September 1854 Augsburg) was a writer of children’s stories and an educator. His stories were very popular and translated into many languages. His best known work in the English-speaking world is The Basket of Flowers (Das Blumenkörbchen). Christoph von Schmid studied theology and was ordained priest in 1791. He then served as assistant in several parishes until 1796, when he was placed at the head of a large school in Thannhausen, where he taught for many years. From 1816 to 1826, he was parish priest at Oberstadion in Württemberg. In 1826, Christoph von Schmid was appointed canon of the Augsburg Cathedral, where he died of cholera at the age of eighty-seven. Schmid began writing books for children, teaching Christian values, shortly after being placed at the school in Thannhausen. His first work was a Bible history for children (1801). Schmid’s original purpose for writing was to reward his students after school by reading his books to them. Schmid continued with his calling as a writer of children’s books throughout his long life. Schmid’s writings have been translated into 24 languages. His principal juvenile works are Biblische Geschichte für Kinder, Der Weihnachtsabend, Genovefa, Die Ostereier, Das Blumenkörbchen, and Erzählungen für Kinder und Kinderfreunde (1823–1829). Die Ostereier (Easter Eggs, 1816) became so popular that he started signing himself as “author of Easter Eggs.” Many say that he was the pioneer of books for youths.
  • Darshan Aasht

    A Sahitya Akademi awardee and Shiromani Punjabi Bal Sahitya Lekhak, Dr. Darshan Aasht, working at Punjabi University, Patiala, will be presented a state award for his book “Papa Ab Aisa Nahi Hoga” on children literature in Punjabi language by the Punjab Language Department. The award includes a cash prize of Rs 21,000 and a memento. Dr. Darshan Aasht has written 70 books for children in Punjabi, Hindi, Urdu, Rajasthani and in Shahmukhi script. His three books have been published in Pakistan. He has been honored by several institutions. संस्थान: पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला (पंजाब)। शिक्षा: एम०ए० (पंजाबी एवं उर्दू), पीएच०डी० प्रकाशन: शिशु गीतमाला (भाग दो), पवित्र कार्य, सुनो कहानी, बिंटी की सूझ, मेहनत की कमाई का सुख। संपादन-पजाबी आलम (त्रैमासिक); अनुवाद-हिंदी से पजाबी में अनुवाद-इतिहास गुरुद्वारा पाँवटा साहिब का (ज्ञानी भजनसिंह), मेरा जीवन-एक तितली की कहानी (अजन सरकार), धनीराम की बघी (जोगेशदास), खेल खिलौने, अब्बा की खाँसी (डॉ. राष्ट्रबंधु), सुनी कहानी नाटक वानी (डॉ. उषा यादव), सपने (दीनदयाल शर्मा), सबसे अच्छा उपहार (राजकुमार जैन 'राजन') मान्यता/ पुरस्कार/ सम्मान: भाषा विभाग, पंजाब से 1988 से 2005 तक सर्वोत्तम बालसाहित्य पुरस्कार, पंजाब साहित्य अकादमी चंडीगढ़, भारतीय बालकल्याण संस्थान कानपुर, श्रीगुरु अर्जुन कीर्तन मंडल पटियाला द्वारा सम्मानित-पंजाबी साहित्य सभा पटियाला द्वारा समानित, पजाबी सत्थ लांबडा (जालधर) द्वारा प्रिसिपल बालसाहित्य पुरस्कार, अमेरिकन बायोग्राफ़िकल इस्टीट्यूट विजन 2000 बालसाहित्य सम्मान, पुरस्कार 2001, भाषाविभाग पंजाब द्वारा शिरोमणि पंजाबी बालसाहित्य लेखक पुरस्कार 2005, जयपुर राजस्थान द्वारा मोती मिसरी राष्ट्रीय बालसाहित्य पुरस्कार 2006, राष्ट्रीय कवि पं. सोहनलाल द्विवेदी बालसाहित्य सम्मान चित्तौड़गढ़-राजस्थान 2006, भारत के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम डॉ. ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम साहब द्वारा सम्मान 2006, भारत की राष्ट्रपति महामहिम प्रतिभा पाटिल जी द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्मान 2007 और अन्य सरकारी-गैरसरकारी संगठनों से मान-सम्मान प्राप्त। [youtube[dot]com/watch?v=qur-fVK0cQU]
  • Dharamvir Bharati

    धर्मवीर भारती (२५ दिसंबर, १९२६- ४ सितंबर, १९९७) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे। डॉ धर्मवीर भारती को १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास गुनाहों का देवता सदाबहार रचना मानी जाती है। सूरज का सातवां घोड़ा को कहानी कहने का अनुपम प्रयोग माना जाता है, जिस श्याम बेनेगल ने इसी नाम की फिल्म बनायी, अंधा युग उनका प्रसिद्ध नाटक है।। इब्राहीम अलकाजी, राम गोपाल बजाज, अरविन्द गौड़, रतन थियम, एम के रैना, मोहन महर्षि और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है।
  • Divanshu Goyal Sparsh

    Works at GS Engineering. Attends Malaviya National Institute of Technology, Jaipur. Lives in Jaipur.
  • Divik Ramesh

    Born in a village KIRARI of Delhi. Studies in Delhi upto Ph.d. Have taught as visiting professor for 3 years in South Korea. Have worked as Principal of Motilal Nehru College, University of Delhi. Have published about 50 books which include 6 poetry collections, one verse play 'Khand Khand Agni'; 4 books of research and criticism (essays); 25 books of poems, stories, drama etc. for children. Have got several International and national awards which include Grijakumar Mathur National Award, Soviet Land Nehru Award, Sahityakar Sanmaan of Hindi Academy of NCT Delhi, N.CE.R.T's National Award for children literature, Bhartiya Anuvad Parishad Delhi's Dwivageesh Puraskar on translation work, etc. Research work for Ph.d have been done on my creative works.
  • Dushyant Kumar

    दुष्यंत कुमार त्यागी (1 सितम्बर 1933 – 30 दिसंबर 1975) एक हिंदी कवि और ग़ज़लकार थे। आपके नाम पर ‘दुष्यंत कुमार सम्मान पुरस्कार’ प्रारंभ किया गया है। उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर के रहने वाले थे। दुष्यन्त कुमार का जन्म बिजनौर जनपद उत्तर प्रदेश के ग्राम राजपुर नवादा में 01 सितम्बर 1933 को और निधन भोपाल में 30 दिसम्बर 1975 को हुआ था। इलाहबाद विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत कुछ दिन आकाशवाणी भोपाल में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रहे बाद में प्रोड्यूसर पद पर ज्वाइन करना था लेकिन तभी हिन्दी साहित्याकाश का यह सूर्य अस्त हो गया। इलाहबाद में कमलेश्वर, मार्कण्डेय और दुष्यन्त की दोस्ती बहुत लोकप्रिय थी वास्तविक जीवन में दुष्यन्त बहुत, सहज और मनमौजी व्यक्ति थे। कथाकार कमलेश्वर बाद में दुष्यन्त के समधी भी हुए। दुष्यन्त का पूरा नाम दुष्यन्त कुमार त्यागी था। प्रारम्भ में दुष्यन्त कुमार परदेशी के नाम से लेखन करते थे। जिस समय दुष्यंत कुमार ने साहित्य की दुनिया में अपने कदम रखे उस समय भोपाल के दो प्रगतिशील (तरक्कीपसंद) शायरों ताज भोपाली तथा क़ैफ़ भोपाली का ग़ज़लों की दुनिया पर राज था। हिन्दी में भी उस समय अज्ञेय तथा गजानन माधव मुक्तिबोध की कठिन कविताओं का बोलबाला था। उस समय आम आदमी के लिए नागार्जुन तथा धूमिल जैसे कुछ कवि ही बच गए थे। इस समय सिर्फ़ ४२ वर्ष के जीवन में दुष्यंत कुमार ने अपार ख्याति अर्जित की। कृतियाँ: सूर्य का स्वागत, आवाज़ों के घेरे, जलते हुए वन का वसन्त (सभी कविता संग्रह)। साये में धूप (ग़ज़ल संग्रह)। एक कण्ठ विषपायी (काव्य-नाटिका) आदि दुष्यन्त की प्रमुख कृतियाँ हैं।
  • Dwarika Prasad Maheshwari

    द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (१ दिसम्बर १९१६ - २९ अगस्त १९९८) हिन्दी के साहित्यकार थे। उनका जन्म आगरा के रोहता में हुआ था। शिक्षा और कविता को समर्पित द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जीवन बहुत ही चित्ताकर्षक और रोचक है। उनकी कविता का प्रभाव सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार कृष्ण विनायक फड़के ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में प्रकट किया कि उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी शवयात्रा में माहेश्वरी जी का बालगीत 'हम सब सुमन एक उपवन के' गाया जाए। फड़के जी का मानना था कि अंतिम समय भी पारस्परिक एकता का संदेश दिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग ने अपनी होर्डिगों में प्राय: सभी जिलों में यह गीत प्रचारित किया और उर्दू में भी एक पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक था, 'हम सब फूल एक गुलशन के', लेकिन वह दृश्य सर्वथा अभिनव और अपूर्व था जिसमें एक शवयात्रा ऐसी निकली जिसमें बच्चे मधुर धुन से गाते हुए चल रहे थे, 'हम सब सुमन एक उपवन के'। किसी गीत को इतना बड़ा सम्मान, माहेश्वरी जी की बालभावना के प्रति आदर भाव ही था। उनका ऐसा ही एक और कालजयी गीत है- वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। उन्होंने बाल साहित्य पर 26 पुस्तकें लिखीं। इसके अतिरिक्त पांच पुस्तकें नवसाक्षरों के लिए लिखीं। उन्होंने अनेक काव्य संग्रह और खंड काव्यों की भी रचना की। बच्चों के कवि सम्मेलन का प्रारंभ और प्रवर्तन करने वालों के रूप में द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का योगदान अविस्मरणीय है। वह उप्र के शिक्षा सचिव थे। उन्होंने शिक्षा के व्यापक प्रसार और स्तर के उन्नयन के लिए अनथक प्रयास किए। उन्होंने कई कवियों के जीवन पर वृत्त चित्र बनाकर उन्हे याद करते रहने के उपक्रम दिए। सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' जैसे महाकवि पर उन्होंने बड़े जतन से वृत्त चित्र बनाया। यह एक कठिन कार्य था, लेकिन उसे उन्होंने पूरा किया। बड़ों के प्रति आदर-सम्मान का भाव माहेश्वरी जी जितना रखते थे उतना ही प्रेम उदीयमान साहित्यकारों को भी देते थे। उन्होंने आगरा को अपना काव्यक्षेत्र बनाया। केंद्रीय हिंदी संस्थान को वह एक तीर्थस्थल मानते थे। इसमें प्राय: भारतीय और विदेशी हिंदी छात्रों को हिंदी भाषा और साहित्य का ज्ञान दिलाने में माहेश्वरी जी का अवदान हमेशा याद किया जाएगा। वह गृहस्थ संत थे।
  • Faiz Ahmed Faiz

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का जन्म 13 फरवरी 1911 अविभाजित हिदुस्‍तान के शहर सियालकोट (पंजाब) में जो अब पाकिस्तान में है, एक मध्‍यवर्गीय परिवार में हुआ था। सन् 1936 में वे प्रेमचंद, मौलवी अब्‍दुल हक़, सज्‍जाद जहीर और मुल्‍क राज आनंद द्वारा स्‍थापित प्रगतिशील लेखक संघ में शामिल हुए। फै़ज़ अहमद फै़ज़ बाबा मलंग साहिब, लाहौर के सूफी, अशफाक अहमद, सयेद फखरुद्दीन बल्ली, वासिफ अली वासिफ और अन्य सूफी संतों के वह भक्त थे। फैज़ प्रतिबद्ध मार्क्सवादी थे। वे उर्दू के बहुत ही जाने-माने कवि थे। आधुनिक उर्दू शायरी को उन्होंने एक नई ऊँचाई दी। इसी समय उर्दू के काव्य-गगन में साहिर, कैफ़ी, फ़िराक़ जैसे और भी सितारे चमक रहे थे। वे अंग्रेजी तथा अरबी में एम०ए० करने के बावजूद भी कवितायें उर्दू में ही लिखते थे। फै़ज़ अहमद फै़ज़ की उर्दू कविता दुआ का बलोची अनुवाद बलोच कवि गुल खान नासिर द्वारा किया गया ! 1930 में फैज़ ने ब्रिटिश महिला एलिस से विवाह किया था। 1942 से लेकर 1947 तक वे ब्रिटिश-सेना मे कर्नल रहे। फिर फौ़ज़ से अलग होकर 'पाकिस्‍तान टाइम्‍स' और 'इमरोज़' अखबारों के एडीटर रहे। लियाकत अली खाँ की सरकार के तख्तापलट की साजिश रचने के जुर्म में वे 1951‍-1955 तक कैद में रहे। इसी दौरान लिखी गई कविताएँ बाद में बहुत लोकप्रिय हुईं, जो "दस्ते सबा" तथा "जिंदानामा" में प्रकाशित हुईं। बाद में वे 1962 तक लाहौर में पाकिस्तान आर्टस काउनसिल मे रहे। 1963 में उनको सोवियत-संघ (रूस) ने लेनिन शांति पुरस्कार प्रदान किया। भारत के साथ 1965 के युद्ध के समये वे पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय मे काम कर रहे थे। 1984 में, उनके देहांत से पहले, उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिये प्रस्तावित किया गया था।
  • Girija Kumar Mathur

    गिरिजा कुमार माथुर (22 अगस्त 1919 - 10 जनवरी 1995) का जन्म ग्वालियर जिले के अशोक नगर कस्बे में हुआ। वे एक कवि, नाटककार और समालोचक के रूप में जाने जाते हैं। उनके पिता देवीचरण माथुर स्कूल अध्यापक थे तथा साहित्य एवं संगीत के शौकीन थे। वे कविता भी लिखा करते थे। सितार बजाने में प्रवीण थे। माता लक्ष्मीदेवी मालवा की रहने वाली थीं और शिक्षित थीं। गिरिजाकुमार की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। उनके पिता ने घर ही अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल आदि पढाया। स्थानीय कॉलेज से इण्टरमीडिएट करने के बाद 1936 में स्नातक उपाधि के लिए ग्वालियरचले गये। 1938 में उन्होंने बी.ए. किया, 1941 में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में एम.ए. किया तथा वकालत की परीक्षा भी पास की। सन 1940 में उनका विवाह दिल्ली में कवयित्री शकुन्त माथुर से हुआ। गिरिजाकुमार की काव्यात्मक शुरुआत 1934 में ब्रजभाषा के परम्परागत कवित्त-सवैया लेखन से हुई। वे विद्रोही काव्य परम्परा के रचनाकार माखनलाल चतुर्वेदी, बालकृष्ण शर्मा नवीन आदि की रचनाओं से अत्यधिक प्रभावित हुए और 1941 में प्रकाशित अपने प्रथम काव्य संग्रह 'मंजीर' की भूमिका उन्होंने निराला से लिखवायी। उनकी रचना का प्रारम्भ द्वितीय विश्वयुद्ध की घटनाओं से उत्पन्न प्रतिक्रियाओं से युक्त है तथा भारत में चल रहे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन से प्रभावित है। सन 1943 में अज्ञेय द्वारा सम्पादित एवं प्रकाशित 'तारसप्तक' के सात कवियों में से एक कवि गिरिजाकुमार भी हैं। यहाँ उनकी रचनाओं में प्रयोगशीलता देखी जा सकती है। कविता के अतिरिक्त वे एकांकी नाटक, आलोचना, गीति-काव्य तथा शास्त्रीय विषयों पर भी लिखते रहे हैं। उनके द्वारा रचित मंदार, मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले आदि काव्य-संग्रह तथा खंड काव्य पृथ्वीकल्प प्रकाशित हुए हैं। भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद की साहित्यिक पत्रिका 'गगनांचल' का संपादन करने के अलावा उन्होंने कहानी, नाटक तथा आलोचनाएँ भी लिखी हैं। उनका ही लिखा एक भावान्तर गीत "हम होंगे कामयाब" समूह गान के रूप में अत्यंत लोकप्रिय है। 1991 में आपको कविता-संग्रह "मै वक्त के सामने" के लिए हिंदी का साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1993 में के. के. बिरला फ़ाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित व्यास सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें शलाका सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। गिरिजाकुमार माथुर की समग्र काव्य-यात्रा से परिचित होने के लिए उनकी पुस्तक "मुझे और अभी कहना है" अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • Githa Hariharan

    Githa Hariharan (born 1954) is an Indian author and editor based in New Delhi. Her first novel, The Thousand Faces of Night, won the Commonwealth Writers' Prize in 1993. Hariharan was born in Coimbatore and grew up in Bombay and Manila. She obtained a BA (in English) from Bombay University and a MA (in Communications) from Fairfield University. Hariharan first worked in the Public Broadcasting System in New York and then with a publishing firm as an editor in India. She currently works as a freelance editor.
  • Gopal Das Neeraj

    गोपालदास नीरज (4 जनवरी 1925 - 19 जुलाई 2018), हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से। यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला।
  • Gopal Prasad Vyas

    Gopal Prasad Vyas (1915–2005) was an Indian poet, known for his humorous poems. His poems have been compiled into several books such as To Mein Kya Karoon, Ras Rasamrit, Maff Kijiye and Baat Baat Mein Baat. The story of his life has been documented in a biography, Bahuayami Jeevan Ke Dhani Pt Gopal Prasad Vyas, written by Santosh Matta, published by Prabhat Books in 2015. He was honoured by the Government of India in 1965, with the award of Padma Shri, the fourth highest Indian civilian award for his contributions to the field of literature.
  • Gopal Singh Nepali

    Gopal Singh Nepali [11 August, 1911 - 17 April, 1963] was an eminent Bihari Indian poet of Hindi literature and a famous lyricist of Bollywood. His association with Bollywood spanned around two decades, beginning in 1944 and ended with his death in 1963. He was a poet of post-Chhayavaad period, and he wrote several collections of Hindi poems including "Umang" (published in 1933). He was also a journalist and edited at least four Hindi magazines, namely, Ratlam Times, Chitrapat, Sudha, and Yogi. He was born in Bettiah in the state of Bihar. Although he was of Nepali descent, he did not have much of his heritage. During Sino-Indian War of 1962, he wrote many patriotic songs and poems which include Savan, Kalpana, Neelima, Naveen Kalpana Karo etc. He is also known for his seminal volume "The Newars: An Ethno-Sociological Study of a Himalayan Community" (1965), made into a book from his doctoral dissertation.
  • Gopi Krishna Gopesh

    गंगा से वोल्गा तक का सफर तय करने वाले कवि /अनुवादक प्रोफेसर गोपी कृष्ण गोपेश जी का जन्म 11 नवम्बर 1925 (पुस्तक में जन्मवर्ष 1923 लिखा है जो ग़लत है) को फ़रीदपुर (पीताम्बरपुर) बरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था और निधन 4 सितम्बर 1974 को। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल कर गोपेश जी ने शोध में दाखिला लिया, लेकिन वह अपूर्ण ही रह गया। स्नातक होने के बाद युवा कवि के रूप में पहचान। हिन्दी के जाने-माने कवि हरिवंशराय बच्चन जी का गुरु के रूप में गोपेश जी को सानिध्य मिला। भारती और डॉ० जगदीश गुप्त गोपेश जी के परम मित्रों में थे। जीवन के प्रारम्भिक दिनों में गोपेश जी आकाशवाणी इलाहाबाद से जुड़े। फिर यहीं से आकाशवाणी कलकत्ता चले गए। कलकत्ता से मास्को चले गए। वहाँ भी रेडियो मास्को में डेपुटेशन पर। वापस लौटकर आकाशवाणी दिल्ली में कुछ दिन रहे। बाद में इलाहाबाद और दिल्ली विश्वविद्यालयों में रूसी भाषा का अध्यापन किया। |मास्को में रहते हुए गोपेश जी मास्को विश्वविद्यालय में हिन्दी भी पढाते थे और वहाँ के प्रतिष्ठित प्रगति प्रकाशन से भी जुड़ गए थे। गोपेश जी ने अनुवाद के क्षेत्र में अविस्मरणीय कार्य किया। प्रकाशित कृतियाँ ---किरन, धूप की लहरें, सोने की पत्तियाँ, तुम्हारे लिए। पूँजीपति के नाम से जार्ज गिसिंग की कहानियों का हिन्दी अनुवाद, अर्वाचीन और प्राचीन नाटक, कार्य और कारण (अपट्रेंस उपित्स के उपन्यास का अनुवाद) इंसान का नसीबा (शोलोखोव के उपन्यास का अनुवाद), सोवियत संघ का संक्षिप्त इतिहास, दास्तान-ए-नसरुद्दीन (अनातोली कुज्नेत्सोव के उपन्यास का अनुवाद) हिन्दी कविता बदलती दिशाएँ (समीक्षा), रातें रुपहली दिन-सी (फ़्योदर दस्ताएवसकी के उपन्यास का अनुवाद), धीरे बहो दोन रे (शोलोखोव के महाकाव्यात्मक उपन्यास का अनुवाद), वे बेचारे (ला मिजरेबुल्स का अनुवाद) अपूर्ण और अप्रकाशित ।
  • Tulsidas

    गोस्वामी तुलसीदास (1497 - 1623) एक महान कवि थे। उनका जन्म राजापुर गाँव (वर्तमान बाँदा जिला) उत्तर प्रदेश में हुआ था। अपने जीवनकाल में उन्होंने 12 ग्रन्थ लिखे। उन्हें संस्कृत विद्वान होने के साथ ही हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ कवियों में एक माना जाता है। उनको मूल आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि रामायण का प्रकारान्तर से ऐसा अवधी भाषान्तर है जिसमें अन्य भी कई कृतियों से महत्वपूर्ण सामग्री समाहित की गयी थी। रामचरितमानस को समस्त उत्तर भारत में बड़े भक्तिभाव से पढ़ा जाता है। इसके बाद विनय पत्रिका उनका एक अन्य महत्वपूर्ण काव्य है। त्रेता युग के ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पर आधारित उनके प्रबन्ध काव्य रामचरितमानस को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में 46वाँ स्थान दिया गया।
  • Gulshan Bawra

    Gulshan Kumar Mehta, popularly known by his pen name Gulshan Bawra (12 April 1937 – 7 August 2009), was an Indian songwriter and actor in Hindi cinema. In a career spanning 42 years, he has to his credit about 240 songs, he collaborated with noted music directors like Kalyanji Anandji, Shankar Jaikishan, and R D Burman composed almost half of songs in films like Khel Khel Mein (1975), Kasme Vaade (1976) and Satte Pe Satta (1982). Apart from R.D. Burman hits, he is most remembered for his songs like, Mere Desh Ki Dharti in Upkaar (1968), and Yaari Hai Imaan Mera, Zanjeer (1974), both of which got him the Filmfare Best Lyricist Award. The latter also top the Binaca Geetmala annual list of 1973. As a character actor, he also appeared in a small number of Hindi films.
  • Gulzar

    ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा (जन्म-१८ अगस्त १९३६) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं। उनकी रचनाए मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं, परन्तु ब्रज भाषा, खङी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होने रचनाये की। गुलजार को वर्ष २००२ मे सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष २००४ मे भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष २००९ मे डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म स्लम्डाग मिलियनेयर मे उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हे ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
  • Gyan Prakash Vivek

    आठवें दशक के उत्तरार्ध में उभरे ज्ञानप्रकाश विवेक आधुनिक युग लोकप्रिय व बहुचर्चित रचनाकारों में से हैं। हिन्दी ग़ज़लों के क्षेत्र में उनका नाम दुश्यंत कुमार के साथ लिया जाता है। कहानियों के क्षेत्र में भी उन्होंने काम किया है और भारतीय पत्र पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं। आपके दो ग़ज़ल संग्रह व एक कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके है।
  • Hans Kumar Tiwari

    हंस कुमार तिवारी (जन्म- 15 अगस्त, 1918) प्रसिद्ध साहित्यकार थे। इनकी साहित्यिक साधना की प्रथम उपलब्धि ‘कला’ नामक पुस्तक का प्रकाशन सन 1938 ई. में हुआ था। आलोचना के क्षेत्र में यह इनका प्रथम प्रयास था। तिवारी जी स्वतंत्र लेखक के साथ-साथ एक सफल पत्रकार तथा सम्पादक भी रहे। सन 1951 में वे बिहार सरकार के राजभाषा पदाधिकारी नियुक्त हुए। इसी पद पर कार्य करते हुए उन्होंने अवकाश ग्रहण किया।
  • Harishchandra Jhandai

    जन्म तिथि: 05 दिसम्बर 1944 जन्म स्थान: सराँवाला, जिला मुलतान (अब पाकिस्तान में) शिक्षा: एम.ए. पी.एच.डी (इतिहास), राजनीति शास्त्र सम्पृति: विभागाध्यक्ष-इतिहास, मुकन्दलाल नैशनल कालेज, यमुनानगर (सम्पन्न)
  • Harivansh Rai Bachchan

    हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन" (२७ नवम्बर १९०७ – १८ जनवरी २००३) हिन्दी भाषा के एक कवि और लेखक थे।'हालावाद' के प्रवर्तक बच्चन जी हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है।आप भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन के पिता थे। बच्चन का जन्म 27 नवम्बर 1907 को इलाहाबाद के नज़दीक प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव बाबूपट्टी में एक कायस्थ परिवार मे हुआ था। इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था। इनको बाल्यकाल में 'बच्चन' कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ 'बच्चा' या संतान होता है। बाद में ये इसी नाम से मशहूर हुए। इन्होंने कायस्थ पाठशाला में पहले उर्दू की शिक्षा ली जो उस समय कानून की डिग्री के लिए पहला कदम माना जाता था। उन्होने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम. ए. और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य के विख्यात कवि डब्लू बी यीट्स की कविताओं पर शोध कर पीएच. डी. पूरी की। १९२६ में १९ वर्ष की उम्र में उनका विवाह श्यामा बच्चन से हुआ जो उस समय १४ वर्ष की थीं। लेकिन १९३६ में श्यामा की टीबी के कारण मृत्यु हो गई। पांच साल बाद १९४१ में बच्चन ने एक पंजाबन तेजी सूरी से विवाह किया जो रंगमंच तथा गायन से जुड़ी हुई थीं। इसी समय उन्होंने 'नीड़ का पुनर्निर्माण' जैसे कविताओं की रचना की। तेजी बच्चन से अमिताभ तथा अजिताभ दो पुत्र हुए। अमिताभ बच्चन एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। तेजी बच्चन ने हरिवंश राय बच्चन द्वारा शेक्सपियर के अनूदित कई नाटकों में अभिनय का काम किया है।
  • Hasrat Jaipuri

    Hasrat Jaipuri (April 15, 1922 – September 17, 1999) was an Indian poet, who wrote in the Hindi and Urdu languages. He was also a renowned film lyricist in Hindi films, where he won the Filmfare Awards for Best Lyricist twice.
  • Hullad Moradabadi

    हुल्लड़ मुरादाबादी (29 मई 1942 – 12 जुलाई 2014) इनका वास्तविक नाम सुशील कुमार चड्ढा, एक हिंदी हास्य कवि थे। इतनी ऊंची मत छोड़ो, क्या करेगी चांदनी, यह अंदर की बात है, तथाकथित भगवानों के नाम जैसी हास्य कविताओं से भरपूर पुस्तकें लिखने वाले हुल्लड़ मुरादाबादी को कलाश्री, अट्टहास सम्मान, हास्य रत्न सम्मान, काका हाथरसी पुरस्कार जैसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा द्वारा मार्च 1994 में राष्ट्रपति भवन में अभिनंदन हुआ था। हुल्लड़ मुरादाबादी का जन्म 29 मई 1942 को गुजरावाला, पाकिस्तान में हुआ था। बंटवारे के दौरान परिवार के साथ मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश आ गए थे। शुरुआत में उन्होंने वीर रस की कविताएं लिखी लेकिन कुछ समय बाद ही हास्य रचनाओं की ओर उनका रुझान हो गया और हुल्लड़ की हास्य रचनाओं से कवि मंच गुलजार होने लगे। सन 1962 में उन्होंने ‘सब्र’ उप नाम से हिंदी काव्य मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बाद में वह हुल्लड़ मुरादाबादी के नाम से देश दुनिया में पहचाने गए। उनका एक दोहा- पूर्ण सफलता के लिए, दो चीजें रख याद, मंत्री की चमचागिरी, पुलिस का आशीर्वाद।’ राजनीति पर उनकी कविता- ‘जिंदगी में मिल गया कुरसियों का प्यार है, अब तो पांच साल तक बहार ही बहार है, कब्र में है पांव पर, फिर भी पहलवान हूं, अभी तो मैं जवान हूं...।’ उन्होंने कविताओं और शेरो शायरी को पैरोडियों में ऐसा पिरोया कि बड़ों से लेकर बच्चे तक उनकी कविताओं में डूबकर मस्ती में झूमते रहते। एचएमवी एवं टीसीरीज से कैसेट्स से ‘हुल्लड़ इन हांगकांग’ सहित रचनाओं का एलबम भी हैं। उन्होंने बैंकाक, नेपाल, हांगकांग, तथा अमेरिका के 18 नगरों में यात्राये भी की।
  • Indeevar

    श्यामलाल बाबू राय उर्फ़ इन्दीवर (जन्म- 15 अगस्त, 1924, झाँसी, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 27 फ़रवरी, 1997, मुम्बई) भारत के प्रसिद्ध गीतकारों में गिने जाते थे। इनके लिखे सदाबहार गीत आज भी उसी शिद्‌दत व एहसास के साथ सुने व गाए जाते हैं, जैसे वह पहले सुने व गाए जाते थे। इन्दीवर ने चार दशकों में लगभग एक हज़ार गीत लिखे, जिनमें से कई यादगार गाने फ़िल्‍मों की सुपर-डुपर सफलता के कारण बने। ज़िंदगी के अनजाने सफ़र से बेहद प्यार करने वाले हिन्दी सिनेमा जगत के मशहूर शायर और गीतकार इन्दीवर का जीवन के प्रति नज़रिया उनकी लिखी हुई इन पंक्तियों- "हम छोड़ चले हैं महफ़िल को, याद आए कभी तो मत रोना" में समाया हुआ है।
  • Indira Gaur

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  • Jaishankar Prasad

    जयशंकर प्रसाद (30 जनवरी 1889 - 14 जनवरी 1937) हिन्दी कवि, नाटकार, कथाकार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने हिंदी काव्य में छायावाद की स्थापना की जिसके द्वारा खड़ी बोली के काव्य में कमनीय माधुर्य की रससिद्ध धारा प्रवाहित हुई और वह काव्य की सिद्ध भाषा बन गई। आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में इनके कृतित्व का गौरव अक्षुण्ण है। वे एक युगप्रवर्तक लेखक थे जिन्होंने एक ही साथ कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में हिंदी को गौरव करने लायक कृतियाँ दीं। कवि के रूप में वे निराला, पन्त, महादेवी के साथ छायावाद के चौथे स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित हुए है; नाटक लेखन में भारतेंदु के बाद वे एक अलग धारा बहाने वाले युगप्रवर्तक नाटककार रहे जिनके नाटक आज भी पाठक चाव से पढते हैं। इसके अलावा कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में भी उन्होंने कई यादगार कृतियाँ दीं। विविध रचनाओं के माध्यम से मानवीय करूणा और भारतीय मनीषा के अनेकानेक गौरवपूर्ण पक्षों का उद्घाटन। 48 वर्षो के छोटे से जीवन में कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक निबंध आदि विभिन्न विधाओं में रचनाएं की। उन्हें ‘कामायनी’ पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ था। उन्होंने जीवन में कभी साहित्य को अर्जन का माध्यम नहीं बनाया, अपितु वे साधना समझकर ही साहित्य की रचना करते रहे। कुल मिलाकर ऐसी विविध प्रतिभा का साहित्यकार हिंदी में कम ही मिलेगा जिसने साहित्य के सभी अंगों को अपनी कृतियों से समृद्ध किया हो।
  • Jalees Sherwani

    Jalees Sherwani is an Indian screenwriter and lyricist. His native home is Kasganj (Kashiram Nagar) in Uttar Pradesh.
  • Javed Akhtar

    Son of well-known Urdu poet and film lyricist Jan Nisar Akhtar and Safia Akhtar, teacher and writer, Javed Akhtar belongs to a family lineage that can be traced back to seven generations of writers. The highly respected Urdu poet, Majaz was his mother’s brother and the work of Muzter Khairabadi, his grandfather, is looked upon as a milestone in Urdu Poetry. Javed Akhtar's body of work can be categorized under three distinct categories: a) Script Writer b) Lyricist c) Poet. Along with his ex-partner, Salim, he scripted super hits like, 'Zanjeer', 'Deewar',' Sholay', 'Haathi Mere Saathi', 'Seeta Aur Geeta', 'Don', 'Trishul', etc. Salim-Javed as a writer-duo gave to Indian Cinema the memorable persona of the ‘Angry Young Man’. After the split from his partner Salim (in 1981), he has written a list of successful films, notable amongst them are; 'Sagar', 'Mr. India', 'Betaab', 'Arjun' and Lakshya etc.
  • Johann Peter Hebel

    Johann Peter Hebel (10 May 1760 – 22 September 1826) was a German short story writer, dialectal poet, evangelical theologian and pedagogue, most famous for a collection of Alemannic lyric poems (Allemannische Gedichte) and one of German tales (Schatzkästlein des rheinischen Hausfreundes – Treasure Chest of the Family Friend from the Rhine). Born in Basel, Hebel entered primary school in 1766 and joined a Latin school three years later; he visited the schools in Basel during summer and in Hausen and Schopfheim respectively in the nearby Wiesental during winter. After the death of his mother in 1773, he remained at school, graduating with the help of friends from the Gymnasium illustre of Karlsruhe in 1778 and going on to study theology. He became a home tutor, an assistant preacher, an assistant teacher, a subdeacon and, in 1798, a professor and court deacon. Hebel was interested in botany, natural history and other subjects. His literary work began with Allemannische Gedichte, which is perhaps the most popular work written in Alemannic. He had success with his calendar stories in the Badischer Landkalender, and later with Rheinländischer Hausfreund (Rhenish family friend), but a dispute between Catholics forced him to resign as editor of the calendar. In his last years he devoted himself increasingly to religion, becoming a prelate in 1819, but his wish to become a parish priest was never fulfilled. His last works were biblical stories for young readers, which served as textbooks until 1855. Hebel died 1826 in Schwetzingen. Goethe, Tolstoy, Gottfried Keller, Hermann Hesse and other writers have praised his works.
  • Kaifi Azmi

    कैफ़ी आज़मी का मूल नाम अख़्तर हुसैन रिज़्वी था। आपको राष्ट्रीय पुरस्कार और फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिले हैं। (जन्म: 14 जनवरी 1919 / निधन: 10 मई 2002) जन्म स्थान: ग्राम मिज़वाँ, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत कुछ प्रमुख कृतियाँ: आख़िरे-शब, झंकार, आवारा सज़दे
  • Kaka Hathrasi

    काका हाथरसी (18 सितम्बर 1906 - 18 सितम्बर 1995) हास्य कवियों में विशिष्ट हैं। काका हाथरसी का जन्म हाथरस, उत्तर प्रदेश में प्रभुलाल गर्ग के रूप में एक अग्रवाल वैश्य परिवार में हुआ। उनकी शैली की छाप उनकी पीढ़ी के अन्य कवियों पर तो पड़ी ही, आज भी अनेक लेखक और व्यंग्य कवि काका की रचनाओं की शैली अपनाकर लाखों श्रोताओं और पाठकों का मनोरंजन कर रहे हैं। 1957 में पहली बार काका दिल्ली के लाल किले में आयोजित कवि-सम्मेलन में काका को आमंत्रित किया गया। सभी आमंत्रित कवियों से आग्रह किया गया था कि वे 'क्रांति' पर कविता करें क्योंकि सन् सतावन की शताब्दी मनाई जा रही थी। अब समस्या यह थी कि 'काका' ठहरे 'हास्य-कवि' अब वे 'क्रांति' पर क्या कविता करें? 'क्रांति' पर तो वीररस में ही कुछ हो सकता था। जब कई प्रसिद्ध वीर-रस के कवियों के कविता-पाठ के बाद 'काका' का नाम पुकारा गया तो 'काका' ने मंच पर 'क्रांति का बिगुल' कविता सुनाई। काका की कविता ने अपना झंडा ऐसा गाड़ा कि सम्मेलन के संयोजक गोपालप्रसाद व्यास ने काका को गले लगाकर मुक्तकंठ से उनकी प्रशंसा व सराहना की। इसके बाद काका हास्य-काव्य' के ऐसे ध्रुवतारे बने कि आज तक जमे हैं।
  • Kanhaiyalal Sethia

    [जन्म: 11 सितंबर 1919 - निधन: 11 नवंबर 2008] जन्म स्थान: सुजानगढ़ (राजस्थान) कुछ प्रमुख कृतियाँ: हिंदी वनफूल, अग्णिवीणा, मेरा युग, दीप किरण, प्रतिबिम्ब, आज हिमालय बोला, खुली खिड़कियां चौड़े रास्ते, प्रणाम, मर्म, अनाम, निर्ग्रन्थ, स्वागत, देह-विदेह, आकाशा गंगा, वामन विराट, श्रेयस, निष्पति एवं त्रयी राजस्थानी रमणियां रा सोरठा, गळगचिया, मींझर, कूं-कूं, लीलटांस, धर कूंचा धर मंजलां, मायड़ रो हेलो, सबद, सतवाणी, अघरीकाळ, दीठ, क-क्को कोड रो, लीकलकोळिया एवं हेमाणी विविध: भारत सरकार द्वारा 'पद्म-श्री' से सम्मानित। 'लीलटांस' के लिए राजस्थानी में साहित्य अकादेमी, 'सबद' काव्य-संग्रह के लिए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा सर्वोच्च पुरस्कार के अलावा ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी सहित अनेक मान-सम्मान और पुरस्कारों से पुरस्कृत महाकवि के रूप में राजस्थानी के कालजयी कवि। कन्हैयालाल सेठिया समग्र का चार खण्डों में प्रकाशन श्री जुगलकिशोर जैथलिया के संम्पादन में हो चुका है।
  • Kavi Bhushan

    Kavi Bhushan (c. 1613–1712) was an Indian poet in the courts of the Bundeli king Chhatrasal and the Maratha king Shivaji. He mainly wrote in Brajbhasha interspersed with words from Sanskrit, Arabic and Persian languages. He was a scholar poet of Anupras and Shlesh Alankar. Bhushan originally resided in the Tikwapur village in present-day Ghatampur tehsil, Kanpur district of Uttar Pradesh. He was the brother of the poets Chintamani and Matiram. Bhushan's original name is unknown. Kavi Bhushan ("Precious Poet") was a title given to him by the Rudra Pratap of Chitrakoot. He first met Shivaji when the latter visited Agra to meet the emperor Aurangzeb; thereafter, Bhushan was supported by Shivaji Maharaj. Bhushan later moved from Varanasi to Maratha Kingdom in the 1670s, and attended Shivaji Raje durbar (court). Bhushan presented many of his poems on the occasion of the grand coronation of Shivaji Maharaj.
  • Kavi Pradeep

    कवि प्रदीप (६ फ़रवरी १९१५ - ११ दिसम्बर १९९८) भारतीय कवि एवं गीतकार थे जो देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में ये गीत लिखा था। लता मंगेशकर द्वारा गाए इस गीत का तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान में सीधा प्रसारण किया गया। गीत सुनकर जवाहरलाल नेहरू के आंख भर आए थे। कवि प्रदीप ने इस गीत का राजस्व युद्ध विधवा कोष में जमा करने की अपील की. मुंबई उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2005 को संगीत कंपनी एचएमवी को इस कोष में अग्रिम रूप से भारतीय रुपया10 लाख जमा करने का आदेश दिया। कवि प्रदीप का मूल नाम 'रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी' था। उनका जन्म BADNAGAR (UJJAIN) MADHYA PRADESH में हुआ था। कवि प्रदीप की पहचान 1940 में रिलीज हुई फिल्म बंधन से बनी। हालांकि 1943 की स्वर्ण जयंती हिट फिल्म किस्मत के गीत "दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है" ने उन्हें देशभक्ति गीत के रचनाकारों में अमर कर दिया। गीत के अर्थ से क्रोधित तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए। इससे बचने के लिए कवि प्रदीप को भूमिगत होना पड़ा। पांच दशक के अपने पेशे में कवि प्रदीप ने 71 फिल्मों के लिए 1700 गीत लिखे. उनके देशभक्ति गीतों में, फिल्म बंधन (1940) में "चल चल रे नौजवान", फिल्म जागृति (1954) में "आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं", "दे दी हमें आजादी बिना खडग ढाल" और फिल्म जय संतोषी मां (1975) में "यहां वहां जहां तहां मत पूछो कहां-कहां" है। इस गीत को उन्होंने फिल्म के लिए स्वयं गाया भी था। आपने हिंदी फ़िल्मों के लिये कई यादगार गीत लिखे। भारत सरकार ने उन्हें सन 1997-98 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।
  • Kedar Nath Singh

    केदार नाथ सिंह (जन्म 1934 ई.) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि हैं। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का 49 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिये जाने का निर्णय किया गया। वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10 वें लेखक हैं। केदार नाथ सिंह का जन्म 1934 ई॰ में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गाँव में हुआ था। उन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से 1956 ई॰ में हिन्दी में एम॰ए॰ और 1964 में पी-एच॰ डी॰ की उपाधि प्राप्त की। वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में बतौर आचार्य और अध्यक्ष काम कर चुके हैं। केदार नाथ सिंह को मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान आदि पुरस्कारों मिल चुके हैं।
  • Kedarnath Agarwal

    केदारनाथ अग्रवाल (जन्म: 1 अप्रैल, 1911 - मृत्यु: 22 जून, 2000) प्रगतिशील काव्य-धारा के एक प्रमुख कवि हैं। उनका पहला काव्य-संग्रह 'युग की गंगा' देश की आज़ादी के पहले मार्च, 1947 में प्रकाशित हुआ। हिंदी साहित्य के इतिहास को समझने के लिए यह संग्रह एक बहुमूल्य दस्तावेज़ है। केदारनाथ अग्रवाल ने मार्क्सवादी दर्शन को जीवन का आधार मानकर जनसाधारण के जीवन की गहरी व व्यापक संवेदना को अपने कवियों में मुखरित किया है। कवि केदारनाथ की जनवादी लेखनी पूर्णरूपेण भारत की सोंधी मिट्टी की देन है। इसीलिए इनकी कविताओं में भारत की धरती की सुगंध और आस्था का स्वर मिलता है।
  • Kiran Sahu

    Friends मैँ एक बहूत ही Middle class family से Belong करता हूँ जहाँ मेरे Papa ( Mr. Gurucharan Sahu) बतौर एक T.V. मैकेनिक के रूप मेँ कार्यरत हैँ। मेरे पापा जो कि मेरे एक Best friend हैँ और वो न केवल मुझे Support करते हैँ बल्कि हमेशा मुझे Guide भी करते हैँ। जब मैँ छोटा था अभी भी हूँ (19+2 years old) But अब हमेँ बड़ा बनना है। बचपन मेँ पापा कई सारी Motivational books पढ़ा करते थे और आज पापा के आदर्शोँ व संस्कारोँ से मैँ अपने जिँदगी की किस्मत को स्वयं लिखनेँ जा रहा हूँ।
  • Kishan Saroj

    आजादपुरम, छावनी, अशरफ खां रोड, बरेली-243122, फोन : 0581-541004 किशन सरोज गीत विधा के रागात्मक भाव के कवि हैं। इन्होंने अब तक लगभग ४०० गीत लिखे हैं। इनके प्रेमपरक गीत सहज अभिव्यंजना एवं नवीन उत्प्रेक्षाओं के कारण मर्मस्पर्शी हैं।
  • Krishna Bihari Noor

    Krishn Bihari 'Noor' was born at Gauss Nagar, Lucknow on 8th November 1926. He did his basic education at home. Later, he was admitted to a high school at Aminabad (U.P). After completing his graduation from Lucknow University, he got employed in the RLO department of Lucknow, where he worked for a long time and retired on 30th Nov 1984 as the Assistant Manager. Noor Saheb, a disciple of Fazal Naqvi and proficient in both, Urdu and Devanagri scripts was basically known for his ghazals in literary circles. His noted works include, Dukh-Sukh (Urdu), Tapasya (Urdu), Samandar Meri Talash Mein (Hindi), Hussainiyat Ki Chaaon Mein, Tajjalli-e-Noor, Aaj Ke Prasidh Shaayar (Edited by Kanhya Lal Nandan), etc. He died while undergoing an operation at a hospital in Ghaziabad on 30th May 2003.
  • Krishna Kumar Yadav

    A man of great energy, enthusiasm, activeness and attractive persona Krishna Kumar Yadav is apt at handling administrative work as well as literary work. He is an officer of Indian Postal Services as well as an accomplished Writer, Poet, Blogger and avid thinker. A dashing and multifaceted personality KK Yadav is inquisitive by nature and love challenges. He is very sensitive to social problems and has deep concern for inequality in Indian society from the core of his heart and thus he sees bureaucracy as a means of social change. A man of strong will and determination KK Yadav is an honest and straight-forward person and his pragmatic attitude to life is something to be learnt. He has an inner self lit with creativity and is open to ideas, suggestions, criticism and compliments with a pleasant face. KK Yadav's ambition is to scale the heights and for him sky is the limit. He is inspired by the famous quotation- “The world will not help, the people must help themselves. Its own strength is the source of life.”
  • Kshetrapal Sharma

    अलीगढ़ (उत्‍तर प्रदेश) जनपद के गाँव पला (एसी) में ५ सितंबर १९५० को जन्‍म। एम.ए. (अँग्रेज़ी) तक शिक्षा, नागपुर विश्वविद्यालय से । अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय के भी छात्र रहे। ग्रामीण अंचल से लगाव। एक संग्रह ‘झरोखे’ प्रकाशित। कवि एवं अनुवादक। दैनिक समाचार पत्र से सहायक संपादक के रूप में नौकरी प्रारंभ। २६ वर्षों से सहायक निदेशक (राजभाषा) एक केंद्रीय सरकारी संगठन में हैं। राष्‍ट्रीय बचत संगठन एवं भारतीय वायु सेना में भी नौकरी कर चुके हैं। देश के समाचारपत्रों/ पत्रिकाओं में शैक्षिक एवं साहित्यिक लेखन। आकाशवाणी मद्रास, पुणे, कोलकाता से कई आलेख प्रसारित।
  • Vastu Guru Kuldeep Saluja

    Working as a Vaastu consultant from 26 years. Has provided consultancy in many Countries by the knowledge earned from deep study in Vaastu. He has traveled more than 40 countries and has an consultancy center in Dubai. As Author - He has published his work on Vaastu and has 18 books to his credit covering various subjects eg. House construction, Industry – commerce, flats and fame. All these have been Published by Diamond Pocket Books, New Delhi, a prestigious Publisher of India. He has more than 200 books published on other subjects too, which reveals his command on many subjects. As Columnist - He has written more than 160 articles on Vaastu, which have been published in more than 25 daily, weekly, & monthly magazines.His articles are being published in Hindi, English, Gujarati, Punjabi & Telugu also. His work has also been translated into French and published in “The Week End” a Prestigious daily of Mauritius. His articles has been translated in 6 Indian & Foreign languages. On TV and Radio - Many programs on Vaastu have been aired on E TV MP, Chhastisgarh, Bihar, UP & Rajasthan. Mauritius Broadcasting Corp. has also aired his programs on Vaastu.
  • Kumar Vishwas

    डॉ॰ कुमार विश्वास (जन्म 10 फ़रवरी 1970) हिन्दी के एक अग्रणी कवि तथा सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। कविता के क्षेत्र में शृंगार रस के गीत इनकी विशेषता है। डॉ॰ कुमार विश्वास ने अपना करियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 मे शुरू किया। तत्पश्चात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही डॉ॰ विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ॰ विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वारा लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फ़िल्मों में दिखाई पड़ेगी। उन्होंने आदित्य दत्त की फ़िल्म 'चाय-गरम' में अभिनय भी किया है। कुमार विश्वास अगस्त २०११ के दौरान जनलोकपाल आंदोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे २६ नवम्बर २०१२ को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। डॉ॰ कुमार विश्‍वास अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, परन्‍तु हार गए।
  • Kunwar Bechain

    कुंवर बेचैन, 1 जुलाई 1942 को उत्तर प्रदेश के ग्राम उमरी ज़िला मुरादाबाद में जन्मे कुंवर बहादुर सक्सेना उर्फ क़ुँअर बेचैन का बचपन चंदौसी में बीता। शिक्षा: एम. काम., एम. ए., पीएच. डी.। आपने ग़ाज़ियाबाद के एम एम एच महाविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में अध्यापन किया। आज के दौर में आपका नाम सबसे बड़े गीतकारों तथा शायरों में शुमार किया जाता है। आपके मुक्तक, ग़ज़लियात, गीतांश और अशआर रोज़ाना मुशाइरों तथा कवि-सम्मेलनों के संचालन में प्रयोग किए जा रहे हैं। ग़ज़ल के व्याकरण पर आपकी विशेष पकड़ है। गीत, नवगीत और ग़ज़ल जैसी विधा को आपने न केवल साधा है अपितु नई पीढ़ी को इन जटिल विषयों से जोड़ने के लिए हिन्दी साहित्य में महती कार्य भी किया है। 7 गीत संग्रह, 12 ग़ज़ल संग्रह, 2 काव्य संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के अतिरिक्त अनेक पत्र-पत्रिकाओं, वेब पृष्ठों, संपादित ग्रंथों तथा स्मारिकाओं में आपको पढ़ा जा सकता है। गीत का परचम लिए देश-विदेश में भ्रमण करने वाले इस रचनाकार को सुनना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है। आपने ग़ज़ल का व्याकरण लिखा और ‘रस्सियाँ पानी की’ नामक संग्रह के माध्यम से ग़ज़ल को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का पुनीत कार्य किया। व्यवहार से सहज, वाणी से मृदु, प्रतिभा से अतुल्य तथा व्यक्तित्व से अनुकरणीय; डॉ. कुंवर बेचैन की शाइरी में जीवन दर्शन के साथ-साथ सकारात्मकता का एक सौम्य सा मिश्रण है। इन रचनाओं में जहाँ एक ओर आधुनिकता और बेतहाशा अंधानुकरण के कारण उत्पन्न घुटन है तो दूसरी ओर संबंधों की ऊष्मा और संवेदना की छुअन भी है। वर्तमान में मंच पर मौजूद सबसे वरिष्ठ रचनाकारों में डॉ. कुंवर बेचैन एक हैं।
  • Mahadevi Verma

    महादेवी वर्मा (26 मार्च 1907 — 11 सितंबर 1987) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है। महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी। वे उन कवियों में से एक हैं जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की। न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे। उन्होंने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और शृंगार से सजाया कि दीपशिखा में वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई और उसने केवल पाठकों को ही नहीं समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी की कविता में उस कोमल शब्दावली का विकास किया जो अभी तक केवल बृजभाषा में ही संभव मानी जाती थी। इसके लिए उन्होंने अपने समय के अनुकूल संस्कृत और बांग्ला के कोमल शब्दों को चुनकर हिन्दी का जामा पहनाया। संगीत की जानकार होने के कारण उनके गीतों का नाद-सौंदर्य और पैनी उक्तियों की व्यंजना शैली अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन की शुरूआत की और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ-साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। भारत के साहित्य आकाश में महादेवी वर्मा का नाम ध्रुव तारे की भांति प्रकाशमान है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर पूजनीय बनी रहीं। वर्ष 2007 उनकी जन्म शताब्दी के रूप में मनाया गया। 1956 में भारत सरकार ने उनकी साहित्यिक सेवा के लिये ‘पद्म भूषण’ की उपाधि से अलंकृत किया। ‘यामा’ नामक काव्य संकलन के लिये उन्हें भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।
  • Maheshwar Tiwari

    डॉ. माहेश्वर तिवारी जन्म: 22 जुलाई 1939 को बस्ती (संतकबीर नगर), उत्तर प्रदेश, भारत में। प्रकाशित कृतियाँ– हरसिंगार कोई तो हो, नदी का अकेलापन, सच की कोई शर्त नहीं, फूल आए हैं कनेरों में (सभी नवगीत-संग्रह), विविध नवगीतों का विभिन्न भारतीय भाषाओं तथा अंग्रेज़ी में अनुवाद तथा कैसेट काव्यमाला। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान तथा बरेली (उ.प्र.) के ‘विष्णु प्रभाकर स्मृति साहित्य सम्मान-2011’ सहित ढेरों पुरस्कारों से सम्मानित।
  • Maithili Sharan Gupt

    राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ – १२ दिसम्बर १९६४) हिन्दी के कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया और इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य-भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है। पवित्रता, नैतिकता और परंपरागत मानवीय सम्बन्धों की रक्षा गुप्त जी के काव्य के प्रथम गुण हैं, जो पंचवटी से लेकर जयद्रथ वध, यशोधरा और साकेत तक में प्रतिष्ठित एवं प्रतिफलित हुए हैं। साकेत उनकी रचना का सर्वोच्च शिखर है। मैथिलीशरण गुप्त जी की बहुत-सी रचनाएँ रामायण और महाभारत पर आधारित हैं। १९५४ में पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित। प्रमुख कृतियाँ — • महाकाव्य – साकेत; • खंड काव्य – जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, यशोधरा, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्ध्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल, जय भारत, झंकार, पृथ्वीपुत्र, मेघनाद वध, मैथिलीशरण गुप्त के नाटक, रंग में भंग, राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट, विरहिणी व्रजांगना, वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री, स्वदेश संगीत, हिडिम्बा, हिन्दू; • अनूदित – मेघनाथ वध, वीरांगना, स्वप्न वासवदत्ता, रत्नावली, रूबाइयात उमर खय्याम।
  • Majrooh Sultanpuri

    मजरुह सुल्तानपुरी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार और प्रगतिशील आंदोलन के उर्दू के सबसे बड़े शायरों में से एक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए देश, समाज और साहित्य को नयी दिशा देने का काम किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सुल्तानपुर जिले के गनपत सहाय कालेज में मजरुह सुल्तानपुरी ग़ज़ल के आइने में शीर्षक से मजरूह सुल्तानपुरी पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने इस सेमिनार में हिस्सा लिया और कहा कि वे ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने उर्दू को एक नयी ऊंचाई दी है। लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰सीमा रिज़वी की अध्यक्षता व गनपत सहाय कालेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰जेबा महमूद के संयोजन में राष्ट्रीय सेमिनार को सम्बोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो॰अली अहमद फातिमी ने कहा मजरूह, सुल्तानपुर में पैदा हुए और उनके शायरी में यहां की झलक साफ मिलती है। वे इस देश के ऐसे तरक्की पसंद शायर थे जिनकी वजह से उर्दू को नया मुकाम हासिल हुआ। उनकी मशहूर पंक्तियों में 'मै अकेला ही चला था, जानिबे मंजिल मगर लोग पास आते गये और कारवां बनता गया' का जिक्र भी वक्ताओं ने किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो॰मलिक जादा मंजूर अहमद ने कहा कि यूजीसी ने मजरूह पर राष्ट्रीय सेमिनार उनकी जन्मस्थली सुल्तानपुर में आयोजित करके एक नयी दिशा दी है। मजरूह सुल्तानपुरी ने पचास से ज्यादा सालों तक हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखे। आजादी मिलने से दो साल पहले वे एक मुशायरे में हिस्सा लेने बम्बई गए थे और तब उस समय के मशहूर फिल्म-निर्माता कारदार ने उन्हें अपनी नई फिल्म शाहजहां के लिए गीत लिखने का अवसर दिया था। उनका चुनाव एक प्रतियोगिता के द्वारा किया गया था। इस फिल्म के गीत प्रसिद्ध गायक कुंदन लाल सहगल ने गाए थे। ये गीत थे-ग़म दिए मुस्तकिल और जब दिल ही टूट गया जो आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। इनके संगीतकार नौशाद थे। जिन फिल्मों के लिए आपने गीत लिखे उनमें से कुछ के नाम हैं-सी.आई.डी., चलती का नाम गाड़ी, नौ-दो ग्यारह, तीसरी मंज़िल, पेइंग गेस्ट, काला पानी, तुम सा नहीं देखा, दिल देके देखो, दिल्ली का ठग, इत्यादि। पंडित नेहरू की नीतियों के खिलाफ एक जोशीली कविता लिखने के कारण मजरूह सुल्तानपुरी को सवा साल जेल में रहना पड़ा। 1994 में उन्हें फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व 1980 में उन्हें ग़ालिब एवार्ड और 1992 में इकबाल एवार्ड प्राप्त हुए थे। वे जीवन के अंत तक फिल्मों से जुड़े रहे। 24 मई 2000 को मुंबई में उनका देहांत हो गया।
  • Makhanlal Chaturvedi

    माखनलाल चतुर्वेदी (४ अप्रैल १८८९-३० जनवरी १९६८) भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। प्रभा और कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संपादक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और नई पीढी का आह्वान किया कि वह गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ कर बाहर आए। इसके लिये उन्हें अनेक बार ब्रिटिश साम्राज्य का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रमी थे और १९२१-२२ के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए जेल भी गए। आपकी कविताओं में देशप्रेम के साथ साथ प्रकृति और प्रेम का भी चित्रण हुआ है।
  • Manjari Shukla

    I am writer, broadcaster, teacher and presenter of TV Programmes. I have penned more than 350 stories for children in English and Hindi. These stories have been published in various reputed children’s magazines like Nandan, Bal hans, Sneh, Sanskaar, Kadambini, Suman-saurabh, Magic-Pot, Sarita, Jaagran sakhi, Children’s World, Tinkle, Dimdima, Little Words and The Children’s magazines. My stories and articles have also been published in various journals and papers in India like Dainik Jaagran, Jansatta, Navbharat, Naidunia, Amar Ujala, Rashtriya Hindi Mail, The Pioneer, DNA, The chronicle and The Hindu. My Published Books are " Sweety's Rainy Day and Jadui Gubbare." I have received many awards also in writing. My work is also available on Net. I am Ph.D. in English Literature and hail from Lucknow. Presently I am working as an announcer in All India Radio in Allahabad. E-mail: manjarishukla28@gmail.com Present Address: ए ब्लॉक, फ्लैट नंबर-102, तुलसीयानि स्क्वायर, भगवती अपार्टमेंट के सामने, गर्ल्स हाईस्कूल के पास, क्लाइव रोडसिविल लाइन्स, प्रयागराज, Uttar Pradesh 211001 India
  • Manohar Lal Ratnam

    जन्म: 14 मई 1948 में मेरठ में; कार्यक्षेत्र: स्वतंत्र लेखन एवं काव्य मंचों पर काव्य पाठ; प्रकाशित कृतियाँ: 'जलती नारी' (कविता संग्रह), 'जय घोष' (काव्य संग्रह), 'गीतों का पानी' (काव्य संग्रह), 'कुछ मैं भी कह दूँ', 'बिरादरी की नाक', 'ईमेल-फ़ीमेल', 'अनेकता में एकता', 'ज़िन्दा रावण बहुत पड़े हैं' इत्यादि; सम्मान: 'शोभना अवार्ड', 'सतीशराज पुष्करणा अवार्ड', 'साहित्य श्री', 'साहित्यभूषण', 'पद्याकार', 'काव्य श्री' इत्यादि
  • Manoj Muntashir

    Manoj Muntashir (born Manoj Shukla, 27 February 1976), is an Indian lyricist, poet and screenwriter. Following script writing for Kaun Banega Crorepati, the Indian version of British Who Wants to Be a Millionaire?, he wrote several successful Hindi songs for films. These have included "Galliyan", "Tere Sang Yaara", "Kaun Tujhe", "Dil Meri Na Sune", "Phir Bhi Tumko Chaahunga" and "Teri Mitti". He wrote the Hindi scripts for the dubbed productions of the Telugu film Baahubali 2 and was subsequently commissioned to do the same for the Hollywood production of Black Panther. Manoj Muntashir was born on 27 February 1976 as Manoj Shukla into a farming family in Gauriganj, Amethi, Uttar Pradesh, India, where he attended a convent school. After graduating from Allahabad University in 1999 he moved to Mumbai to seek work, and subsequently entered the TV and film scene following an opportunity given to him by Amitabh Bachchan to write for Kaun Banega Crorepati, the Indian version of British Who Wants to Be a Millionaire? Muntashir has written the lyrics of several Hindi film songs including "Galliyan" from Ek Villain, "Tere Sang Yaara" from Rustom, "Kaun Tujhe" from M.S Dhoni: The Untold Story and "Dil Meri Na Sune" from the film "Genius". He has frequently voiced concerns with regards to acknowledgments to song and script writers. His lyrics to "Phir Bhi Tumko Chaahunga"(2017), a song which registered more than four million views through unofficial versions prior to its official release, were originally compiled for his wife in 2001. When he failed to receive acknowledgement for the song, he voiced that he didn't "know why certain people can't accept an age old fact that lyricists have an equal amount of contribution in making a song successful". Following a nomination for the 2020 Filmfare award for best lyrics for the song 'Teri Mitti' from the 2019 film Kesari, he tweeted his disappointment when the award went to someone else.
  • Mirabai

    Meera, also known as Meera Bai, was a 16th-century Hindu mystic poet and devotee of Krishna. She is celebrated as a poet and has been claimed by the North Indian Hindu tradition of Bhakti saints. Meera was born into a Rathore royal family of Kudki district of Pali, Rajasthan, India. She is mentioned in Bhaktamal, confirming that she was widely known and a cherished figure in the Indian bhakti movement culture by about 1600 CE. Most legends about Meera mention her fearless disregard for social and family conventions, her devotion to god Krishna, her treating Krishna as her husband, and she being persecuted by her in-laws for her religious devotion. She has been the subject of numerous folk tales and hagiographic legends, which are inconsistent or widely different in details.
  • Nagarjun

    नागार्जुन (30जून 1911 - 5 नवम्बर 1998) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नागार्जुन ने मैथिली में यात्री उपनाम से लिखा तथा यह उपनाम उनके मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र के साथ मिलकर एकमेक हो गया।
  • Nandita Pandey

    नंदिता पांडेय, टैरो कार्ड रीडर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी मानी सेलेब्रिटी एस्ट्रोलॉजर, टैरो कार्ड रीडर, वास्तु / अंकशास्त्री, एनर्जी हीलर, पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्ट, आध्यात्मिक विद्वान और मार्गदर्शक, लाइफ कोच और बहुत कुछ हैं... नंदिता पांडेय को देश के शीर्ष ज्योतिषियों और एक विश्वसनीय टैरो कार्ड रीडर के रूप में में जाना जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर से जुड़ी तमाम घटनाओं पर सटीक भविष्यवाणी कर को एक बेहतर ज्योतिषी के रूप में साबित किया है। नंदिता पांडेय एक प्रकृति से जुड़ी हुई आध्यात्मिक महिला हैं। मेटाफिजिक्स का गहरा ज्ञान, ज्योतिष, टैरो और इससे संबंधित तमाम चीजों के ज्ञान ने उनके पराक्रम और परा मानसिक क्षमताओं को बढ़ाया है। वास्तव में, भारतीय समाचार चैनलों में पिछले डेढ़ दशक के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने 99% सटीकता की दर के साथ सबसे ज्यादा भविष्यवाणी की है। नंदिता पांडेय ने देश-विदेश के तमाम टीवी चैनलों से जुड़कर ज्योतिष संबंधी कई कार्यक्रम किए हैं। साथ ही देश के तमाम प्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लिए भी उन्होंने कई ज्योतिषीय लेख लिखे हैं। नंदिता मेटाफिज़िक्स के गहन ज्ञान के साथ विज्ञान विषय से स्नातक हैं, जो उन्हें दूसरों के मुकाबले वैज्ञानिक तरीके से मेटाफिजिक्स की व्याख्या करने बढ़त देता है। उनके इसी ज्ञान एवं तर्क का नतीजा है कि उन्होंने कई टीवी न्यूज चैनलों पर बहस के दौरान कई रेशनलिस्ट और वैज्ञानिकों को चुप कराया है। एक रेशनलिस्ट की चुनौती स्वीकार करते हुए उन्होंने देश के बड़े चैनल पर लाइव बहस करते हुए 10 लोगों के करियर की सटीक भविष्यवाणी की थी।
  • Narendra Sharma

    पंडित नरेंद्र शर्मा (28 फरवरी 1913 – 11 फरवरी 1989) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि, लेखक, सम्पादक एवं गीतकार थे। उन्होने हिन्दी फिल्मों (जैसे सत्यम शिवम सुन्दरम) के लिये गीत भी लिखे। पंडित नरेन्द्र शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के खुर्जा जिले के जहांगीरपुर नामक गाँव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षाशास्त्र और अंग्रेज़ी मे एम.ए. किया। 1934 में प्रयाग में ‘अभ्युदय’ पत्रिका का संपादन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी स्वराज्य भवन में हिंदी अधिकारी रहे और फिर बॉम्बे टाकीज़ बम्बई में गीत लिखे। उन्होंने फिल्मों में गीत लिखे, आकाशवाणी से भी संबंधित रहे और स्वतंत्र लेखन भी किया। उनके 17 कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक जीवनी और अनेक रचनाएँ पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं– प्रवासी के गीत, मिट्टी और फूल, अग्निशस्य, प्यासा निर्झर, मुठ्ठी बंद रहस्य (कविता-संग्रह) मनोकामिनी, द्रौपदी, उत्तरजय सुवर्णा (प्रबंध काव्य) आधुनिक कवि, लाल निशान (काव्य-संयचन) ज्वाला-परचूनी (कहानी-संग्रह, 1942 में ‘कड़वी-मीठी बात’ नाम से प्रकाशित) मोहनदास कर्मचंद गांधी: एक प्रेरक जीवनी, सांस्कृतिक संक्राति और संभावना (भाषण)। लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं ‘महाभारत’ का पटकथा-लेखन और गीत-रचना।
  • Neelam Jain

    २३ अक्तूबर १९५८ को जनमी नीलम भारत में उत्तर प्रदेश के उस हिस्से से हैं जो अब उत्तरांचल प्रदेश के नाम से जाना जाता है। वे आजकल न्यूजर्सी अमरीका में अध्यापन और सामाजिक कार्य में संलग्न हैं। कविताएँ पढ़ने लिखने के अतिरिक्त चित्रकारी में उनकी रूचि है तथा संगीत को वे जीवन का अभिन्न अंग मानती हैं।
  • Nemi Chandra Jain

    Nemi Chandra Jain was an Indian poet, critic, theater personality and the founder of Natarang Pratishthan, a charitable trust established in 1989 for the promotion of theatre, arts, literature and culture in India. He was born on 16 August 1919 in Agra and was a holder of a master's degree (MA) in English. He served the National School of Drama as a senior lecturer from 1959 till 1982 and also worked with The Statesman and The Economic Times as a columnist. He founded Natrang, a theatre magazine, was its editor and visited many countries with his theatre activities. He was the author of Octave Strings (1944), Solitary (1973), Navanna (2002), Aage Gahan Andhera Hai (2007) and Rang Dharshan (2008) besides several translations and critical essays on a variety of subjects. Jain was honoured by the Government of India in 2003 with Padma Shri, the fourth highest Indian civilian award. He died two years later, in 2005. Natrang Pratishthan has instituted an annual lecture to honour his memory.
  • Nida Fazli

    Muqtida Hasan Nida Fazli known as Nida Fazli (born 12 October 1938) is an Indian Hindi and Urdu poet. Nida Fazli is a poet of various moods and to him the creative sentiment and inner urge are the sources of poetry. He thinks that the feeling of a poet is similar to an artist: like a painter or a musician.
  • O Henry

    William Sydney Porter (September 11, 1862 – June 5, 1910), known by his pen name O. Henry, was an American short story writer. O. Henry's short stories are known for their wit, wordplay, warm characterization, and surprise endings.
  • Om Prakash Bajaj

    We don't have any details about this author. If you have any - please email us at: author (at) address of this website.
  • Om Vyas Om

    A popular hasya kavi from Ujjain.
  • Paresh Barai

    परेश जी एक सफल online entrepreneur बनना चाहते हैं, उनकी रूचि blogging, affiliate marketing तथा online store building में है। He is from Porbandar, Gujarat. Email id: paresh23barai@gmail.com Whatsapp: +91 9725545375
  • Pavel Bazhov

    Pavel Petrovich Bazhov (27 January 1879 – 3 December 1950) was a Russian writer and publicist. Bazhov is best known for his collection of fairy tales The Malachite Box, based on Ural folklore and published in the Soviet Union in 1939. In 1944, the translation of the collection into English was published in New York City and London. Later Sergei Prokofiev created the ballet The Tale of the Stone Flower based on one of the tales. Bazhov was also the author of several books on the Russian Revolution and the Civil War. Yegor Gaidar, who served as Prime Minister of Russia, was his grandson. When the First World War began, Bazhov had two daughters. He was a member of the Socialist-Revolutionary Party until 1917. In 1918, he joined the Bolshevik Party, volunteered for the Red Army, and was deployed into military actions in the Ural frontline. In the autumn of 1920, Bazhov moved to Semipalatinsk and was elected a member of the Party Committee of that province. He was instructed to lead the provincial council of trade unions, but often served assignments that went beyond his office. From 1923 to 1929 he lived in Yekaterinburg and worked in the editorial board of the Krestianskaya (Peasants) Newspaper, as well as contributing his essays on old factory life conditions and the civil war throughout 1924. In that year, Bazhov published his first book, Urals Tales (Уральские были) on the images of life in the Urals during the 1880-1890s. It was also during this period that he wrote over forty tales on themes of Ural factory folklore that contributed to his collection, The Malachite Box. Publication of Bazhov's most famous work – the collection of fairy tales - earned Bazhov the State Prize. Later on Bazhov supplemented the book with new tales. Bazhov had every reason to speak with pride about his activities between 1917 and 1920. D.A. Kuhn named Bazhov in the report on the 60th anniversary of the Kazakh Soviet Socialist Republic and the Communist Party of Kazakhstan among those wonderful people, "who in the years of revolution and civil war, with a rifle, a plow, or a book, claimed a life on the Kazakh space, with high international quality, resilience, courage and heroism". From these actions, he was decorated with an Order of Lenin and won the USSR State Prize. During the Second World War Bazhov worked with both Yekaterinburg writers and those already evacuated from different corners of the Soviet Union. After the war his eyesight started weakening dramatically, but he went on his editing work, as well as collecting and creatively adapting local folklore. In 1946 he was elected to the Supreme Soviet. Bazhov died in 1950 in Moscow and was laid to rest in his home, Yekaterinburg.
  • Peeyush Mishra

    पीयूष मिश्रा (जन्म १३ जनवरी १९६३) एक भारतीय नाटक अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक, गीतकार, पटकथा लेखक हैं। मिश्रा का पालन-पोषण ग्वालियर में हुआ और १९८६ में उन्होंने दिल्ली स्थिति नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने मकबूल, गुलाल, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फ़िल्मों में गाने गाये हैं।
  • Pinaki Mishra

    एक शताब्दी से भी अधिक ज्योतिषीय परंपरा वाले घराने से सम्बन्ध। विगत १५ वर्षों का कार्यानुभव एवं इसी अवधी में भारत के लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों में २०० से भी ज्यादा ज्योतिष, योग एवं भारतीय अध्यात्म पर आलेख प्रमुखता के साथ प्रकाशित। लगभग सभी प्रकाशित भविष्यवाणियां सत - प्रतिशत सफल। वर्तमान में नियमित तौर पर "नवभारत टाइम्स" और "दैनिक हिंदुस्तान" के लिए सम्बंधित विषय पर लेखन। कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग स्नातक। ज्योतिष और प्राच्य विधाओं में गहन अभिरुचि के साथ साथ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में दक्षता। चुनाव आयोग, नगर निगम और पुलिस डिपार्टमेंट इनके बनाये सॉफ्टवेयर को अपना चुकी है। इनकी तकनिकी दक्षता के लिए भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारीयों के द्वारा कई अवसरों पर सम्मानित।
  • Poile Sengupta

    Poile Sengupta was born in 1948 as Ambika Gopalakrishnan. She is one of the foremost Indian writers in English especially well known as a playwright and writer for children. Her formal first name is Ambika but she writes, and is known, as Poile. She has been a college lecturer, a senior school teacher, an educational consultant, a communication and language skills consultant, a consultant editor for a market research firm, and a teacher for Montessori school children.
  • Poonam Sethi

    Renowned Tarot card reader & holistic healer, Poonam Sethi, welcomes you to gain insight into the world of astrology, predictions and holistic healing... Starting off her career as an interior designer, Poonam Sethi discovered Feng Shui and Vaastu, the careful study of which led her to practice as a space healer. Her career path opened up to a plethora of healing practices which she successfully mastered. She left her designer's job way back in the early nineties "to help and heal others in distress".
  • Prabhakar Machwe

    डॉ. प्रभाकर माचवे (1917 - 1991) हिन्दी के साहित्यकार थे। उनका जन्म ग्वालियर में हुआ एवं शिक्षा इंदौर में और आगरा में हुई। इन्होंने एम.ए., पी-एच.डी. एवं साहित्य वाचस्पति की उपाधियां प्राप्त कीं। ये मजदूर संघ, आकाशवाणी, साहित्य आकदमी, भारतीय भाषा परिषद् आदि से सम्बध्द रहे। देश और विदेश में अध्यापन किया। इनके कविता-संग्रह हैं— ‘स्वप्न भंग’, ‘अनुक्षण’, ‘तेल की पकौडियां’ तथा ‘विश्वकर्मा’ आदि। इन्होंने उपन्यास, निबंध, समालोचना, अनुवाद आदि मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी में 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। इन्हें ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सम्मान प्राप्त हुआ है। इन्हें सन् 1989 में ‘सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया।
  • Prabhudayal Shrivastav

    जन्म: 4 अगस्त 1944 धरमपुरा दमोह (म.प्र.) शिक्षा: वैद्युत यांत्रिकी में पत्रोपाधि संप्रति: सेवा निवृत कार्यपालन यंत्री म.प्र. विद्युत मंडल छिंदवाड़ा से लेखन: विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानियाँ, कवितायें व्यंग्य, लघु कथाएँ लेख, बुंदेली लोकगीत, बुंदेली लघु कथाएँ, बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन : कृतियाँ : दूसरी लाइन [व्यंग्य संग्रह] शैवाल प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित बचपन गीत सुनाता चल [बाल गीत संग्रह] बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र भोपाल से प्रकाशित प्रकाशाधीन: बिल क्लिंटन का नामकरण संस्कार [व्यंग्य संग्रह}शैवाल प्रकाशन शाला है अनमोल खजाना [बाल गीत संग्रह] बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र, भोपाल बच्चे सरकार चलायेंगे [बाल गीत संग्रह] बाल कल्याणएवं बाल साहित्य शोध केन्द्र, भोपाल प्रसारण: आकाशवाणी छिंदवाड़ा से बालगीतों, बुंदेली लघु कथाओं एवं जीवन वृत पर परिचर्चा का प्रसारण सम्मान: राष्ट्रीय राज भाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा "भारती रत्न" एवं "भारती भूषण सम्मान"; श्रीमती सरस्वती सिंह स्मृति सम्मान, वैदिक क्रांति देहरादून एवं हम सब साथ साथ पत्रिका दिल्ली द्वारा "लाइफ एचीवमेंट एवार्ड"; भारतीय राष्ट्र भाषा सम्मेलन झाँसी द्वारा "हिंदी सेवी सम्मान"; शिव संकल्प साहित्य परिषद नर्मदापुरम, होशंगाबाद द्वारा "व्यंग्य वैभव सम्मान"; युग साहित्य मानस गुन्तकुल आंध्रप्रदेश द्वारा काव्य सम्मान Samman by baal Sahitya Shodh Sansthan Bhopal in 2014 April Samman by Anchlik Saahityakar Parishd Chhindwada संस्था संबद्धता: अध्य‌क्ष‌ बुंदेल‌खंड‌ साहित्य‌ प‌रिष‌द‌, भोपाल‌, छिंद‌वाड़ा जिला इकाई के अध्य‌क्ष‌ विशेष: सम्पर्क: 12 Shivam Sundaram Nagar, Chhindwada - Madhya Pradesh [pdayal_shrivastava@yahoo.com]
  • Pradeep Mishra

    जन्म: 01 मार्च 1970; जन्म स्थान: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश - कुछ प्रमुख कृतियाँ: कविता संग्रह “फिर कभी” (1995) तथा “उम्मीद” (2015), वैज्ञानिक उपन्यास “अन्तरिक्ष नगर” (2001) तथा बाल उपन्यास “मुट्ठी में किस्मत” (2009) प्रकाशित। - विविध: अरूण आदित्य के साथ साहित्यिक पत्रिका “भोर सृजन संवाद” का संपादन। कुछ अखबारों में पत्रकारिता। साठोत्तरी हिन्दी कविता पर कुछ समीक्षात्मक कार्य। आलेख तथा पुरस्कार। दूरदर्शन व आकाशवाणी से रचनाएँ प्रसारित।
  • Prashant Subhashchandra Salunke

    कथाकार / कवी प्रशांत सुभाषचंद्र साळूंके का जन्म गुजरात के वडोदरा शहर में तारीख २९/०९/१९७९ को हुवा. वडोदरा के महाराजा सर सयाजीराव युनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण की. अभी ये वडोदरा के वॉर्ड २२ में भाजपा के अध्यक्ष है, इन्होने सोश्यल मिडिया पे क्रमश कहानी लिखने की एक अनोखी शुरुवात की.. सोश्यल मिडिया पे इनकी क्रमश कहानीयो में सुदामा, कातील हुं में?, कातील हुं में दुबारा?, सुदामा रिटर्न, हवेली, लाचार मां बाप, फिरसे हवेली मे, जन्मदिन, अहेसास, साया, पुण्यशाली, सोच ओर William seabrook के जीवन से प्रेरित कहानी “एक था लेखक” काफी चर्चित रही है. इसके अलवा बहोत सी छोटी छोटी प्रेरणादायी कहानीया भी इन्होने सोश्यलमिडिया पे लिखी है, वडोदरा के कुछ भुले बिसरे जगहो की रूबरू मुलाकात ले कर उसकी रिपोर्ट भी इन्होने सोश्यल मिडिया पे रखी थी, जब ये ६ठी कक्षा में थे तब इनकी कहानी चंपक में प्रकाशित हुई थी, इनकी कहानी “सब पे दया भाव रखो” वडोदरा के एक mk advertisement ने अपनी प्रथम आवृती में प्रकाशित की थी, उसके बाद सुरत के साप्ताहिक वर्तमानपत्र जागृती अभियान में इनकी प्रेरणादायी कहानिया हार्ट्स बिट्स नामक कोलम में प्रकाशित होनी शुरू हुई, वडोदरा के आजाद समाचार में इनकी कहानी हर बुधवार को प्रकाशित होती है, वडोदरा के क्राईम डिविजन मासिक में क्राईम आधारित कहानिया प्रकाशित होती है, 4to40.com पे उनकी अब तक प्रकाशित कहानिया बेटी का भाग्य, सेवा परमो धर्म, आजादी, अफसोस, चमत्कार ऐसे नही होते ओर मेरी लुसी है. लेखन के अलावा ये "आम्ही नाट्य मंच वडोदरा" से भी जुडे है, जिसमें "ते हुं नथी" तथा "नट सम्राट" जेसे नाटको में भी काम किया है, इनका कहेना है "जेसे शिल्पी पत्थर में मूर्ती तलाशता है, वैसे ही एक लेखक अपनी आसपास होने वाली घटनाओ में कहानी तलाशता है", इनका इमेल आईडी है prashbjp22@gmail.com, आप फेसबुक पे भी इनसे जुड सकते है.
  • Prasoon Joshi

    प्रसून जोशी (जन्म: 16 सितम्बर 1968) हिन्दी कवि, लेखक, पटकथा लेखक और भारतीय सिनेमा के गीतकार हैं। वे विज्ञापन जगत की गतिविधियों से भी जुड़े हैं और अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी 'मैकऐन इरिक्सन' में कार्यकारी अध्यक्ष हैं। फ़िल्म ‘तारे ज़मीन पर’ के गाने ‘मां...’ के लिए उन्हें 'राष्ट्रीय पुरस्कार' भी मिल चुका है। प्रसून का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के दन्या गाँव में 16 सितम्बर 1968 को हुआ था। उनके पिता का नाम देवेन्द्र कुमार जोशी और माता का नाम सुषमा जोशी है। उनका बचपन एवं उनकी प्रारम्भिक शिक्षा टिहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नरेन्द्रनगर में हुई, जहां उन्होने एम.एससी. और उसके बाद एम.बी.ए. की पढ़ाई की। उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई है। दिल्ली ६’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘रंग दे बसंती’, ‘हम तुम’ और ‘फना’ जैसी फ़िल्मों के लिए कई सुपरहिट गाने लिखे हैं। फ़िल्म ‘लज्जा’, ‘आंखें’, ‘क्योंकि’ में संगीत दिया है। ‘ठण्डा मतलब कोका कोला’ एवं ‘बार्बर शॉप-ए जा बाल कटा ला’ जैसे प्रचलित विज्ञापनों के कारण उन्हे अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता मिली।
  • Pratap Anam

    डॉ. प्रताप अनम का जन्म 15 सितम्बर 1947 में उत्तर प्रदेश के इटावा नगर में हुआ था! आपने एम. ए. करने के बाद पी.एच.डी. की जिसमे साहित्य ढूँढना और उस पर शोध, दोनों ही प्रकार के कार्य शामिल थे! लेखक ने हिंदी प्राच्य संस्थानों तथा पुस्तकालयों में प्राचीन पांडुलिपियों और ग्रंथो का अध्ययन किया! लोकसाहित्य, हस्तशिल्प कला एवं कला में विशेष रूचि रही है! 'कंचनरेखा' त्रैमासिक पत्रिका का संपादन एवं प्रकाशन किया! दिल्ली में आने के बाद 1978 -79 में 'श्री अरविंदों कर्मधारा' मासिक पत्रिका का संपादन किया! इसके बाद स्वतंत्र रूप से साहित्य लेखन, संपादन तथा पत्रकारिता आरम्भ की! देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लिखा! सन 1976 से लखनऊ आकाशवाणी तथा 1977 से दिल्ली के आकाशवाणी केंद्रों से वार्ताएं, आलेख, कहानिया तथा अन्य रचनाएं प्रसारित हो रही है! लखनऊ दूरदर्शन, दिल्ली दूरदर्शन तथा उपग्रह दूरदर्शन केंद्रों से रचनाओं का प्रसारण हुआ तथा दूरदर्शन दिल्ली के लिए समाचार लेखन किया! अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद भी किया है! इनकी कहावतों की कहानियां नामक कृति को हिंदी अकादमी, दिल्ली ने सम्मानित किया है!
  • Pratibha Saxena

    जन्म: स्थान मध्य प्रदेश, भारत, शिक्षा: एम.ए, पी एच.डी., उत्तर कथा पुस्तकें: 1 सीमा के बंधन - कहानी संग्रह, 2. घर मेरा है - लघु-उपन्यास संग्रह .3. उत्तर कथा - खण्ड-काव्य. संपादन प्रारंभ से ही काव्यलेखन में रुचि, कवितायें, लघु-उपन्यास, लेख, वार्ता एवं रेडियो तथा रंगमंच के लिये नाटक रूपक, गीति-नाट्य आदि रचनाओं का साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन (विशाल भारत ,वीणा, ज्ञानोदय, कादंबिनी, धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, अमेरिका से प्रकाशित, विश्व विवेक, हिन्दी जगत्‌ आदि में।) सम्प्रति : आचार्य नरेन्द्रदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कानपुर में शिक्षण. सन्‌ 1998 में रिटायर होकर, अधिकतर यू.एस.ए. में निवास. pratibha_saksena@yahoo.com
  • Prayag Shukla

    जन्म: 28 मई 1940 कवि, कथाकार और कला-समीक्षक। देश-विदेश की विभिन्न कला-प्रदर्शनियों के बारे में लेखन और प्राय: सभी प्रमुख भारतीय कलाकारों से भॆंटवार्ताएँ प्रकाशित। इसके अलावा फ़िल्म और नाट्य समीक्षाएँ भी। 1963-64 में 'कल्पना' (हैदराबाद) के सम्पादक मंडल में रहे और जनवरी 1969 से मार्च 1983 तक 'दिनमान' के सम्पादकीय विभाग में, इसके बाद दैनिक 'नवभारत टाइम्स' के सम्पादकीय विभाग में। ललित कलाअकादमी की हिन्दी पत्रिका 'समकालीन कला' के अतिथि सम्पादक रहे। द्विजदेव सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित।
  • Prem Dhawan

    हिन्दी फिल्मों के मशहूर गीतकार प्रेम धवन का जन्म 13 जून 1923 को अम्बाला में हुआ और लाहौर में स्नातक की शिक्षा पूरी की। आपने हिन्दी फिल्मों के लिये कई मशहूर गीत लिखे। प्रेम धवन ना केवल गीतकार थे, वरन आपने हिन्दी फिल्मों के लिये कुछ फिल्मों में संगीत दिया, नृत्य निर्देशन किया और अभिनय तक किया। प्रेम धवन ने पं रवि शंकर से संगीत एवं पं. उदय शंकर से नृत्य की शिक्षा ली। भारत सरकार ने प्रेम धवन को 1970 में पद्‍मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। आपका देहांत 7 मई 2001 को हुआ।
  • Prem Mathur

    जन्म सात दशकों पहले अजमेर राजस्थान में वही बड़ा हुआ, पढ़ा। फिर दिल्ली में एम. ए. अंग्रेज़ी में और वहीं अध्यापन। फिर विदेशों में। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाने के बाद अवकाश से रह रहा हूँ। लिखने पढने का शौक किशेरावस्था से ही रहा। प्रकाशन केवल स्कूल कॉलेज की पत्रिकाओं में ही। अभी कुछ वर्षों से अन्तरजाल पर: अनूभूति व इन्डियनओजेड पर। कभी यह नहीं लगा कि मैं कवि हूँ इसीलिए प्रकाशन का विचार आया भी तो त्याग दिया। अब फुरसत के क्षणों में सोचता हूँ कि प्रकाशन के विभिन्न माध्यमों से अपनी अनुभूतियों को पढ़ने का अवसर तो दूँ शायद कहीं किसी के मन का तार झंकृत हो। E-mail: gemmathur@hotmail.com
  • Premchand

    प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880 - 8 अक्टूबर 1936) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी शती के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में की तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं।
  • Purnima Varman

    जन्म: २७ जून १९५५ को पीलीभीत में। शिक्षा: संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत साहित्य पर शोध, पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा। कार्यक्षेत्र: पूर्णिमा वर्मन का नाम वेब पर हिंदी की स्थापना करने वालों में अग्रगण्य है। १९९६ से निरंतर वेब पर सक्रिय, उनकी जाल पत्रिकाएँ अभिव्यक्ति तथा अनुभूति वर्ष २००० से अंतर्जाल पर नियमित प्रकाशित होने वाली पहली हिंदी पत्रिकाएँ हैं। इनके द्वारा उन्होंने प्रवासी तथा विदेशी हिंदी लेखकों को एक साझा मंच प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण काम किया है। लेखन एवं वेब प्रकाशन के अतिरिक्त वे जलरंग, रंगमंच, संगीत तथा हिंदी के अंतर्राष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी हैं।
  • Rabindranath Tagore

    रबीन्द्रनाथ टैगोर (7 मई 1861 – 7 अगस्त 1941) को गुरुदेव (रवीन्द्रनाथ ठाकुर) के नाम से भी जाना जाता है। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं – भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बाँग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हे सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म देवेन्द्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के सन्तान के रूप में 7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ। उनकी स्कूल की पढ़ाई प्रतिष्ठित सेंट जेवियर स्कूल में हुई। उन्होंने बैरिस्टर बनने की चाहत में 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन में पब्लिक स्कूल में नाम दर्ज कराया। उन्होंने लन्दन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया लेकिन 1880 में बिना डिग्री हासिल किए ही स्वदेश वापस आ गए। सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ उनका विवाह हुआ।
  • Radha Ballabh Mishra

    Radha Ballabh Mishra is hails from a Brahmin family. He has a great interest in Spiritualism, occult science, astrology, and other religions since childhood. Although he was a student of Commerce, he decided to complete his post graduation in Philosophy and Religion. He started learning astrology at very young age of seventeen. He took formal education in astrology from The Indian Council of Astrological Sciences and completed Joytish Praveena & Jyotish Visharada with 1st division in 1998-1999. He also learned Reiki, Spiritual & Holistic healing, and Naturopathy & Yoga. He has a rich experience of more than 10 years in Predictive Astrology. During this period he has gone through thousands of horoscopes and has huge satisfied clients not only in India but abroad as well.
  • Rajaram Ramachandran

    Rajaram was born on 13-7-31 at Madras (Now Chennai) , India and is now settled at Mumbai, India His interest is both studying and writing Poems. The first poem in English, 'A Song of the World' was written by him in the year 1965. Thereafter, he has written many story poems for the children, humourous poems for the adults and spiritual poems for the elders. In his poems, wood, stone, bird, animals, stars, moon, sun, ocean, and trees-they speak. He has written 'RAMAYANA' the great epic Indian story in easily readable English verses, which have become very popular and are posted here for the reading pleasure of all the poetry lovers. He has also written in simple English poem several other ancient epic stories-Krishna Leela, Mahabarat, Silappadigaram or the Killer Anklet, Manimegalai-the details of which can be found in his website www.divinechannel.in. Till date (31-08-2009) , he has written 18 poetry books: (1) Ramayana, (2) Mahabharata, (3) Krishna Leela, (4) Silappadigaram or the Killer Anklet, (5) Manimegalai, (6) Adi Sankara, (7) Sakuntala, (8) Nala, (9) Harichandra, (10) Meera (11) Saint Thyagaraja, (12) The Holy Bible, (13) Saint Bernadette Sobirous, (14) A Bouquet of Oriental Poems. (15) Gautama Buddha. (16) Swami Vivekananda, (17) Mother Teresa (18) Srila Prabhupada, (19) Andal, (20) Lava Kusa
  • Rajendra Krishan

    Rajendra Krishan (6 June 1919 – 6 June 1988) also credited as Rajinder Krishan, was an Indian poet, lyricist and screenwriter. He was first noted for the script and lyrics of the Motilal-Suraiya starrer Aaj Ki Rat (1948). After the assassination of Mahatma Gandhi, Krishan wrote a song Suno Suno Aye Duniyawalon, Bapu Ki Yeh Amar Kahani. The song was sung by Mohammed Rafi and composed by Husnlal Bhagatram, and was a great hit. He also tasted success as a lyricist with the films Badi Bahen (1949) and Lahore (1949).
  • Rajendra Paswan Ghayal

    'घायल' राजभाषा सेल, भारतीय रिज़र्व बैंक, पटना में मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। आपकी ग़ज़लें अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। ऑल इंडिया रेडियो- मुंबई, विविध भारती और ऑल इंडिया रेडियो पटना से समय-समय पर आपकी रचनाएँ प्रसारित होती रही हैं। प्रकाशन : 'लपटों के दरमियाँ' नामक ग़ज़लों का संग्रह प्रकाशित। ई मेल: rpghayal08@yahoo.co.in
  • Rajgopal Singh

    1 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले में जन्मे राजगोपाल सिंह उन चंद शाइरों में से एक हैं जिन्होंने ग़ज़ल की दुनिया में अपने अलग रंग से अपनी अलग पहचान क़ायम की है। राजगोपाल सिंह की ग़ज़लियात और दोहे जितने सहज हैं उतना ही उनका व्यवहार भी सरल और सादा था। दिल्ली जैसे महानगर में भी शांति की तलाश करते हुए एक कोने में नजफगढ़ में घर बनाकर इस समय आप ख़ुद की तलाश करते रहे। आई बी से सेवानिवृत्त होने के बाद वे जीवन के अंतिम समय तक पूर्णरूपेण काव्य साधना में संलग्न रहे। 6 अप्रैल 2014 को देह में बढ़ी मिठास (डायबिटीज़) ने आपकी मीठी आवाज़ को हमेशा-हमेशा के लिये ख़ामोश कर दिया।
  • Rajiv Krishna Saxena

    प्रो. राजीव कृष्ण सक्सेना - जन्म 24 जनवरी 1951 को दिल्ली मे। शिक्षा - दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में। एक वैज्ञानिक होने पर भी प्रोफ़ेसर सक्सेना को हिंदी सहित्य से विशेष प्रेम है। उन्होंने श्रीमद भगवतगीता का हिंदी में मात्राबद्ध पद्यानुवाद किया जो ''गीता काव्य माधुरी'' के नाम से पुस्तक महल दिल्ली के द्वारा प्रकाशित हुआ है। प्रोफ़ेसर सक्सेना की कुछ अन्य कविताएँ विभिन्न पत्रिकाओं मे छप चुकी हैं। उनकी कविताएँ लेख एवम गीता काव्य माधुरी के अंश उनके website www.geeta-kavita.com पर पढ़े जा सकते हैं।
  • Ram Vilas Sharma

    डा० राम विलास शर्मा (10 अक्तूबर, 1912 - 30 मई, 2000) आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे। व्यवसाय से अंग्रेजी के प्रोफेसर, दिल से हिंदी के प्रकांड पंडित और महान विचारक, ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता, कवि, आलोचक, इतिहासवेत्ता, भाषाविद, राजनीति-विशारद ये सब विशेषण उन पर समान रूप से लागू होते हैं।
  • Ramanath Avasthi

    रमानाथ अवस्थी (8 नवंबर 1926 – 29 जून 2002) आकाशवाणी में प्रोडयूसर के रूप में वर्षों काम किया तथा इसी पद से सेवानिवृत्त भी हुये। रमानाथ अवस्थी का जन्म फतेहपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ। ‘सुमन- सौरभ’, ‘आग और पराग’, ‘राख और शहनाई’ तथा ‘बंद न करना द्वार’ इनकी मुख्य काव्य-कृतियां हैं। ये लोकप्रिय और मधुर गीतकार हैं। इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया है।
  • Ramavtar Tyagi

    मार्च 1925 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले के संभल तहसील में जन्मे रामावतार त्यागी जी दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण करने वाले एक ऐसे हस्ताक्षर थे जिन्होंने हिन्दी गीत को एक नया मुक़ाम दिया। आपके गीतों के विषय में बालस्वरूप राही जी कहते हैं कि त्यागी की बदनसीबी यह है कि दर्द उसके साथ लगा रहा है, उसकी ख़ुशनसीबी यह है कि दर्द को गीत बनाने की कला में वह माहिर है। गीत को जितनी शिद्दत से उसने लिया है, वह स्वयं में एक मिसाल है। आधुनिक गीत साहित्य का इतिहास उसके गीतों की विस्तारपूर्वक चर्चा के बिना लिखा ही नहीं जा सकता। रामधारी सिंह दिनकर आपके गीतों पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि त्यागी के गीतों में यह प्रमाण मौजूद है कि हिन्दी के नए गीत अपने साथ नई भाषा, नए मुहावरे, नई भंगिमा और नई विच्छिति ला रहे हैं। त्यागी के गीत मुझे बहुत पसन्द आते हैं। उसके रोने, उसके हँसने, उसके बिदकने और चिढ़ने, यहाँ तक कि उसके गर्व में भी एक अदा है जो मन मोह लेती है। ‘नया ख़ून’; ‘मैं दिल्ली हूँ’; ‘आठवाँ स्वर’; ‘गीत सप्तक-इक्कीस गीत’; ‘गुलाब और बबूल वन’; ‘राष्ट्रीय एकता की कहानी’ और ‘महाकवि कालिदास रचित मेघदूत का काव्यानुवाद’ जैसे अनेक काव्य संकलनों के साथ ही साथ ‘समाधान’ नामक उपन्यास; ‘चरित्रहीन के पत्र’; ‘दिल्ली जो एक शहर था’ और ‘राम झरोखा’ जैसी गद्य रचनाएँ भी आपके रचनाकर्म में शामिल हैं। अनेक महत्तवपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का आपने जीवन भर सम्पादन किया। हिन्दी फिल्म ‘ज़िन्दगी और तूफ़ान’ में मुकेश द्वारा गाया गया आपका गीत ‘ज़िन्दगी और बता तेरा इरादा क्या है’ ख़ासा लोकप्रिय हुआ। आपके गीत संवेदी समाज के बेहद एकाकी पलों के साथी हैं। 12 अप्रेल सन् 1985 को आप अपने गीत हमारे बीच छोड़कर हमसे विदा ले गए।
  • Ramdarash Mishra

    डॉ. रामदरश मिश्र (जन्म: १५ अगस्त, १९२४ गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत) हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। ये जितने समर्थ कवि हैं उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी। इनकी लंबी साहित्य-यात्रा समय के कई मोड़ों से गुजरी है और नित्य नूतनता की छवि को प्राप्त होती गई है। ये किसी वाद के कृत्रिम दबाव में नहीं आये बल्कि उन्होंने अपनी वस्तु और शिल्प दोनों को सहज ही परिवर्तित होने दिया। अपने परिवेशगत अनुभवों एवं सोच को सृजन में उतारते हुए, उन्होंने गाँव की मिट्टी, सादगी और मूल्यधर्मिता अपनी रचनाओं में व्याप्त होने दिया जो उनके व्यक्तित्व की पहचान भी है। गीत, नई कविता, छोटी कविता, लंबी कविता यानी कि कविता की कई शैलियों में उनकी सर्जनात्मक प्रतिभा ने अपनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ-साथ गजल में भी उन्होंने अपनी सार्थक उपस्थिति रेखांकित की। इसके अतिरक्त उपन्यास, कहानी, संस्मरण, यात्रावृत्तांत, डायरी, निबंध आदि सभी विधाओं में उनका साहित्यिक योगदान बहुमूल्य है।
  • Ramdhari Singh Dinkar

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (२३ सितंबर १९०८- २४ अप्रैल १९७४) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। बिहार प्रान्त के बेगुसराय जिले का सिमरिया घाट उनकी जन्मस्थली है। उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। ‘दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है। उर्वशी को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार जबकि कुरुक्षेत्र को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ काव्यों में ७४वाँ स्थान दिया गया।
  • Ramendra Kumar

    Ramendra Kumar (Ramen) is an award-winning Indian writer for children with 31 books in English and translations in 13 Indian and 10 foreign languages. He also dabbles in satire, poetry, travelogues, adult fiction and non-fiction.
  • Ramkumar Chaturvedi Chanchal

    रामकुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’ हिन्दी गीत के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण गीतकार हैं। बच्चन, नेपाली और सुमन के बाद की पीढ़ी और नीरज, रामावतार त्यागी, देवराज दिनेश एवं वीरेन्द्र मिश्र के समकालीन रामकुमार जी अपने सुकोचन गीति रचनाओं के लिए प्रशिद्ध थे।
  • Ratan Bhattacharjee

    Dr. Ratan Bhattacharjee is a well-known Indian-English writer who has to his credits more than 200 articles on contemporary issues of society and literature. He has done his Ph.D. in Amercan literature and specialised in the study of Theodore Dreiser and F.Scott Fitzgerald. His book 'F.Scott Fitzgerald: The Quest for Meaning and Pattern' has been acclaimed internationally. He has 27 years of teaching experience at the UG and PG level in different phases of his career in Vidyasagar University, Rabindra Bharati University, Bangabasi Evening College, Mankachar College and Gangadharpur College. At present Dr. Bhattacharjee is the Chairperson of Post Graduate studies in English, Dum Dum Motijheel College (PG Unit), Kolkata, West Bengal, India and associated with International Theodore Dreiser Society, Philadelphia, USA as a member of International Advisory Board. He is associated with teaching at the PG level in the Rabindra Bharati University He has authored a number of books including fiction, translation of classical stories for children and poems etc. His flair for online journalism has been acclaimed globally.
  • Ravindra Jain

    Ravindra Jain (28 February 1944 – 9 October 2015) was an Indian music composer, lyricist and playback singer. He started his career in the early 1970s, composing for hit movies such as Chor Machaye Shor (1974), Geet Gaata Chal (1975), Chitchor (1976) and Ankhiyon Ke Jharokhon Se (1978). He composed music for many films and TV shows based on Hindu epics, including Ramanand Sagar's Ramayan (1987). He was awarded the Padma Shri, the fourth-highest civilian award of the Republic of India in 2015 for his contribution to arts.
  • Rita Hajela

    Professionally I am a Doctor, a Senior Administrative Officer, a serious Personality at work with no nonsense behavior. At other times and at home I have a different face, indulging in all kinds of activities. Self help is at the top and finding time for whatever life has to offer and relishing it is my agenda. Priority setting and working is my style. I am true to my words I speak and follow truth. People say that my frank speaking sometimes hurts but they ultimately know that I am the most reliable person and even come to choose my personality as their IDOL. Now it is too much for self praise.
  • Roop Narayan Tripathi

    यशस्वी रचनाकार व अपनी साहित्य साधना से जौनपुर जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर बिखेरने वाले महाकवि पंडित रूप नारायण त्रिपाठी यशस्वी रचनाकार, के साथ समाजशास्त्री भी थे। हिन्दी के साथ उर्दू शायरी पर उनकी मजबूत पकड़ थी। काव्य में फैली ग्राम्यांचल गीत, माटी की महक व भारतीय संस्कृति की जो तस्वीर पेश की गई है व प्रेरणादायी है। उनकी कविताओं में सत्यम शिवम सुंदरम का बोध है।
  • Ruskin Bond

    Ruskin Bond (born 19 May 1934) is an Indian author of British descent. He lives with his adopted family in Landour, in Mussoorie, India. The Indian Council for Child Education has recognized his role in the growth of children's literature in India. He got the Sahitya Academy Award in 1992 for Our Trees Still Grow in Dehra, for his published work in English. He was awarded the Padma Shri in 1999 and Padma Bhushan in 2014.
  • Saadat Hasan Manto

    सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए। कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। इनके कुछ कार्यों का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।
  • Sahir Ludhianvi

    साहिर लुधियानवी (८ मार्च १९२१ - २५ अक्टूबर १९८०) एक प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। इनका जन्म लुधियाना में हुआ था और लाहौर (चार उर्दू पत्रिकाओं का सम्पादन, सन् १९४८ तक) तथा बंबई (१९४९ के बाद) इनकी कर्मभूमि रही। फिल्म आजादी की राह पर (1949) के लिये उन्होंने पहली बार गीत लिखे किन्तु प्रसिद्धि उन्हें फिल्म नौजवान, जिसके संगीतकार सचिनदेव बर्मन थे, के लिये लिखे गीतों से मिली। फिल्म नौजवान का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ..... बहुत लोकप्रिय हुआ और आज तक है। बाद में साहिर लुधियानवी ने बाजी, प्यासा, फिर सुबह होगी, कभी कभी जैसे लोकप्रिय फिल्मों के लिये गीत लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खय्याम आदि संगीतकारों ने उनके गीतों की धुनें बनाई हैं। 59 वर्ष की अवस्था में 25 अक्टूबर 1980 को दिल का दौरा पड़ने से साहिर लुधियानवी का निधन हो गया।
  • Salil Chowdhury

    Salil Chowdhury (19 November 1922 – 5 September 1995) was an Indian music composer, who mainly composed for Bengali, Hindi and Malayalam films. He was also a poet and a playwright. He is affectionately called Salilda by his admirers. His musical ability was widely recognized and acknowledged in the Indian film industry. He was an accomplished composer and arranger who was proficient in several musical instruments, including flute, the piano, and the esraj. He was also widely acclaimed and admired for his inspirational and original poetry in Bengali.
  • Santosh Yadav Arsh

    संतोष यादव ‘अर्श’ (जन्म: लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत) हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। ये जितने समर्थ कवि हैं उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी। गीत, नई कविता, छोटी कविता, लंबी कविता यानी कि कविता की कई शैलियों में उनकी सर्जनात्मक प्रतिभा ने अपनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ अपनी सार्थक उपस्थिति रेखांकित की। इसके अतिरक्त उपन्यास, कहानी, संस्मरण, यात्रावृत्तांत, डायरी, निबंध आदि सभी विधाओं में उनका साहित्यिक योगदान बहुमूल्य है।
  • Sarika Agrawal

    Residing in Chhindwara (Madhya Pradesh). Proficient in sketches / designs for embroidery, it's my hobby to sketches design. I get platform of www.4to40.com to promote my designs. Have done B.COM, DIPLOMA IN COMPUTER SCIENCE, WEB DESIGN, IMPORT EXPORT MANAGEMENT BY DISTANCE LEARNING. sarikaflower@rediffmail.com
  • Sarveshwar Dayal Saxena

    सर्वेश्वर दयाल सक्सेना (15 सितंबर 1927 – 23 सितंबर 1983) मूलतः कवि एवं साहित्यकार थे, पर जब उन्होंने दिनमान का कार्यभार संभाला तब समकालीन पत्रकारिता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को समझा और सामाजिक चेतना जगाने में अपना अनुकरणीय योगदान दिया। सर्वेश्वर मानते थे कि जिस देश के पास समृद्ध बाल साहित्य नहीं है, उसका भविष्य उज्ज्वल नहीं रह सकता। सर्वेश्वर की यह अग्रगामी सोच उन्हें एक बाल पत्रिका के सम्पादक के नाते प्रतिष्ठित और सम्मानित करती है। जन्म– 15 सितंबर 1927 को बस्ती में विश्वेश्वर दयाल के घर। शिक्षा– इलाहाबाद से उन्होंने बीए और सन 1941 में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की। कार्यक्षेत्र– 1941 में प्रयाग में उन्हें एजी आफिस में प्रमुख डिस्पैचर के पद पर कार्य मिल गया। यहाँ वे 1955 तक रहे। तत्पश्चात आल इंडिया रेडियो के सहायक संपादक (हिंदी समाचार विभाग) पद पर आपकी नियुक्ति हो गई। इस पद पर वे दिल्ली में वे 1960 तक रहे। सन 1960 के बाद वे दिल्ली से लखनऊ रेडियो स्टेशन आ गए। 1964 में लखनऊ रेडियो की नौकरी के बाद वे कुछ समय भोपाल एवं रेडियो में भी कार्यरत रहे। सन 1964 में जब दिनमान पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुआ तो वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' के आग्रह पर वे पद से त्यागपत्र देकर दिल्ली आ गए और दिनमान से जुड़ गए। 1982 में प्रमुख बाल पत्रिका पराग के सम्पादक बने। नवंबर 1982 में पराग का संपादन संभालने के बाद वे मृत्युपर्यन्त उससे जुड़े रहे। निधन– 23 सितंबर 1983 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया।
  • Saurabh Jain Suman

    सौरभ सुमन का जन्म हिन्दुस्तान के प्रथम क्रांति-युद्ध की चिंगारी को जन्म देने वाली क्रांति-धरा मेरठ में हुआ. सुमन के पिता श्री अशोक जैन तथा उनकी माता जी श्रीमती सरिता जैन हैं. माँ के दिए संस्कार ही कहीं सुमन को ये दिशा दे सके. आरंभ से ही धर्म के प्रति उनकी रूचि विशेष रही. संतों का सानिध्य, विद्वानों का ज्ञान शुरू से ही सुमन को मिला. सौरभ सुमन की आरंभिक शिक्षा उस समय में मेरठ के ख्याति-लब्ध विद्यालय St. John's School में हुई. बाद में हिंदी के प्रति उनकी रूचि और अंग्रेजी से विमुखता को देख कर उन्हें हिंदी विद्यालय C.A.B. Inter College. Meerut में डाला गया. B.Com. उन्होंने D.N. College Meerut से किया. साथ ही साथ कंप्यूटर की शिक्षा ले कर प्रिंटिंग-डीजयिनिंग का व्यापार आरम्भ किया. सन 2000 में पहला कवि-सम्मलेन उन्होंने जैन मुनि उपाध्याय श्री ज्ञान सागर जी महाराज के सानिध्य में सूर्यनगर (गाजियाबाद) में पढ़ा. तब तक सौरभ केवल सौरभ थे. सौरभ को "सौरभ सुमन" नाम मुनि वैराग्य सागर जी ने प्रदत्त किया. धीरे-धीरे सौरभ हिंदी काव्य-मंचो की जरुरत बन गए.
  • Sawan Kumar

    Saawan Kumar Tak is an Indian film director, producer, and lyricist. He has directed many Hindi films, including Gomti Ke Kinare, Hawas, Chaand Kaa Tukdaa, Sanam Bewafa, and Saawan... The Love Season. He is credited with giving break to actors such as Sanjeev Kumar and Neetu Singh. Saawan Kumar began his career as the producer of the 1967 Sanjeev Kumar starer film Naunihal. The film received the Presidential mention at the National Awards. His directorial debut was with the film Gomti Ke Kinare (1972), which was Meena Kumari's last film, and released posthumously. He is also a prolific lyricist and has written songs for most of his films.
  • Shail Chaturvedi

    Shail Chaturvedi (29 June 1936 – 29 October 2007) was a Hindi poet, satirist, humorist, lyricist and actor from India, most known for his political satire in the 70s and the 80s. He worked as a character actor in several Hindi films and TV series. He started his career as a lecturer at Allahabad University, soon started taking part in various Kavi sammelan (poetry gatherings), and with his tongue-in-cheek political commentary, made a place for himself amidst leading humorists, hasya kavi of the 1970s and 1980s, like Kaka Hathrasi, Pradeep Chaubey and Ashok Chakradhar. He became a regular feature of the annual kavi sammelan one Doordarshan, state-run TV channel, around the Holi festival. He also acted in a number of Hindi films, like Uphaar (1971), Chitchor (1976), Chameli Ki Shaadi (1986) and Kareeb (1998). He played the role of "Sharma ji", the boss of Keshav and Gokhale in the famous sitcom Shrimaan Shrimati. He died on 29 October 2007, after suffering from chronic kidney failure for some time, and was survived by his wife Daya and three sons.
  • Shailendra Kesarilal

    शंकरदास केसरीलाल शैलेन्द्र (१९२३-१९६६) हिन्दी के एक प्रमुख गीतकार थे। जन्म रावलपिंडी में और देहान्त मुम्बई में हुआ। इन्होंने राज कपूर के साथ बहुत काम किया। शैलेन्द्र हिन्दी फिल्मों के साथ-साथ भोजपुरी फिल्मों के भी एक प्रमुख गीतकार थे।
  • Shakeel Badayuni

    शकील बदायूँनी (जन्म: 03 अगस्त 1916 - निधन: 20 अप्रैल 1970) - शकील बदायूनी का जन्म स्थान उत्तर प्रदेश का शहर बदायूँ है। यह एक उर्दू के शायर और साहित्यकार थे। लैकिन इन्होंने बालीवुड में गीत रचनाकार के रूप में नाम कमाया।
  • Shambhu Nath

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  • Shambhunath Singh

    डॉ. शंभुनाथ सिंह (17 जून 1916 – 3 सितम्बर 1991) एक प्रसिद्ध हिन्दी लेखक, स्वतंत्रता सेनानी, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता थे। इनका जन्म गाँव रावतपार, जिला देवरिया, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे नवगीत आंदोलन के प्रणेता माने जाते हैं। नवगीत के प्रतिष्ठापक और प्रगतिशील कवि शंभुनाथ सिंह का हिंदी कविता में विशेष स्थान है। उनकी कविताएँ नई बौद्धिक चेतना से संपृक्त हैं। मानवजीवन की आधुनिक विसंगतियों का प्रभावशाली चित्र अंकित करने में वे अद्वितीय है। प्रकाशित कृतियाँ— रूप रश्मि, माता भूमिः, छायालोक, उदयाचल, दिवालोक, जहाँ दर्द नीला है, वक़्त की मीनार पर (सभी गीत संग्रह)। संपादित— नवगीत दशक-1 , नवगीत दशक-2, नवगीत दशक-3 तथा नवगीत अर्द्धशती का सम्पादन।
  • Shamsher Bahadur Singh

    शमशेर बहादुर सिंह का जन्म मुजफ्फरनगर के एलम ग्राम में हुआ। शिक्षा देहरादून तथा प्रयाग में हुई। ये हिंदी तथा उर्दू के विद्वान हैं। प्रयोगवाद और नई कविता के कवियों की प्रथम पंक्ति में इनका स्थान है। इनकी शैली अंग्रेजी कवि एजरा पाउण्ड से प्रभावित है। इनके मुख्य काव्य संग्रह हैं- 'कुछ कविताएँ, 'कुछ और कविताएँ, 'इतने पास अपने, 'चुका भी नहीं हूँ मैं, 'बात बोलेगी, 'उदिता तथा 'काल तुझसे होड है मेरी। ये 'कबीर सम्मान तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए।
  • Shardula Nogaja

    शार्दुला नोगजा (झा) जन्म– १ सितम्बर 1968 मधुबनी, बिहार। शिक्षा– बी.ई. (विद्युत आभियांत्रिकी) कोटा से किया। एर्लांगन, जर्मनी से एम.एस. (कंप्यूटेशनल आभियांत्रिकी) किया। 25 साल कोटा, राजस्थान में बिताये। संप्रति– मई 2005 से सिंगापुर में कार्यरत। लेखन– कवितायें ई-पत्रिकाओं पे प्रकाशित। विशेष– ‘ई-कविता याहू ग्रुप’ की सितम्बर 2008 से सक्रिय मेम्बर।
  • Shastri Nitya Gopal Katare

    हिन्दी एवं संस्कृत भाषा में समान रूप से सहज कविता लिखने वाले शास्त्री नित्यगोपाल कटारे का जन्म : 26 मार्च 1955 ई० (चैत्र शुक्ल तृतीया संवत् २०१२) को ग्राम टेकापार (गाडरवारा) जि० नरसिंहपुर (म.प्र.) में श्री रामचरण लाल कटारे के पुत्र के रूप में हुआ। शास्त्री जी संस्कृत के प्रथम चिट्ठाकार हैं। शिक्षा : वाराणसेय संस्कृत विश्व विद्यालय वाराणसी से व्याकरण 'शास्त्री` उपाधि; संस्कृत भूषण; संगीत विशारद। प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में व्यंग्य लेख, कविता, नाटक आदि का हिन्दी एवं संस्कृत भाषा में अनवरत प्रकाशन। प्रसारण : आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के विभिन्न केन्द्रों से संस्कृत एवं हिन्दी कविताओं का प्रसारण। कृतियाँ : पञ्चगव्यम् (संस्कृत कविता संग्रह), विपन्नबुद्धि उवाच (हिन्दी कविता संग्रह), नेता महाभारतम् (संस्कृत व्यंग्य काव्य), नालायक होने का सुख (व्यंग्य संग्रह) विशेष : हिन्दी एवं संस्कृत भाषा के अनेक स्तरीय साहित्यिक कार्यक्रमों का संचालन एवं काव्य पाठ। पन्द्रह साहित्यिक पुस्तकों का संपादन। सम्प्रति : अध्यापन; महासचिव शिव संकल्प साहित्य परिषद्, नर्मदापुरम एवं मार्गदर्शक 'प्रखर` साहित्य संगीत संस्था भोपाल।
  • Sheel

    शील जी के नाम से जाने जाने वाले मन्नू लाल शर्मा शील का जन्म १५ अगस्त १९१४ को हुआ था। क्रांतिकारी विचारों और जूझारू व्यक्तित्व के स्वामी शील जी अपने समय के लोकप्रिय नाटककार और कवियों में से थे। उनका निधन २३ नवंबर १९९४ को हुआ। चर्खाशाला, उदयपथ, एक पग, अंगड़ाई, लावा और फूल, कर्मवाची शब्द हैं ये तथा लाल पंखों वाली चिड़िया उनकी प्रसिद्ध काव्य कृतियाँ हैं। किसान, तीन दिन तीन घर तथा हवा का रुख शीर्षक से उनके तीन नाटक लोक भारती प्रकाशन इलाहाबाद से प्रकाशित हुए थे। ये नाटक बाद में शील रचनावली-१ के नाम से भी प्रकाशित हुए। किसान नामक उनका नाटक रंगमंच पर भी बहुत लोकप्रिय हुआ था। उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया। कवि शील का जन्म 15 अगस्त 1914 ई. में कानपुर ज़िले के पाली गाँव में हुआ । शील जी सनेही स्कूल के कवि हैं वे आज़ादी के आन्दोलन में कई बार जेल गये । गान्धीजी के प्रभाव मे “चर्खाशाला” लम्बी कविता लिखी । व्यक्तिगत सत्याग्रह से मतभेद होने के कारण गान्धी का मार्ग छोड़ा तथा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी में शामिल हुए । “मज़दूर की झोपड़ी” कविता रेडियो पर पढ़ने के कारण लखनऊ रेडियो की नौकरी छोड़नी पड़ी ।चर्खाशाला, अंगड़ाई, एक पग, उदय पथ, लावा और फूल , कर्मवाची शब्द आपकी काव्य रचनायें है तथा तीन दिन तीन घर, किसान, हवा कारुख, नदी और आदमी, रिहर्सल, रोशनी के फूल, पोस्टर चिपकाओ आदि आपके नाटक हैं ।उनके कई नाटकों को पृथ्वी थियेटर द्वारा खेला गया यहाँ तक कि रशिया में भी उनके शो हुए तथा राजकपूर ने उनमें अभिनय किया।
  • Shivmangal Singh Suman

    शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ (5 अगस्त 1915 – 27 नवम्बर 2002) हिन्दी के शीर्ष कवियों में थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा भी वहीं हुई। ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से बी.ए. और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए., डी.लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कर ग्वालियर, इन्दौर और उज्जैन में उन्होंने अध्यापन कार्य किया। वे विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति भी रहे। 1974 में ‘मिट्टी की बारात’ पर साहित्य अकादमी तथा 1993 में भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित। 1974 भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित। उन्हें सन् 1999 में भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ‘सुमन’ जी का जन्म 5 अगस्त 1915 को ग्राम झगरपुर जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इन्होंने छात्र जीवन से ही काव्य रचना प्रारम्भ कर दी थी और वे लोकप्रिय हो चले थे। उन पर साम्यवाद का प्रभाव है, इसलिए वे वर्गहीन समाज की कामना करते हैं। पूँजीपति शोषण के प्रति उनके मन में तीव्र आक्रोश है। उनमें राष्ट्रीयता और देशप्रेम का स्वर भी मिलता है। प्रमुख कृतियाँ– काव्यसंग्रह: हिल्लोल, जीवन के गान, युग का मोल, प्रलय सृजन, विश्व बदलता ही गया, विध्य हिमालय, मिट्टी की बारात, वाणी की व्यथा, कटे अगूठों की वंदनवारें। आलोचना: महादेवी की काव्य साधना, गीति काव्य: उद्यम और विकास। नाटक: प्रकृति पुरुष कालिदास।
  • Shri Bhakti Vichar Vishnu Ji Maharaj

    A preacher of message of Supreme Lord Sri Chaitanya Mahaprabhu.
  • Shrinath Singh

    ठाकुर श्रीनाथ सिंह का जन्म १९०३ ई० में मानपुर जिला इलाहाबाद में हुआ। ये द्विवेदी युग के साहित्यकार हैं। आपकी प्रमुख रचनाएँ हैं उलझन १९३४ ई०, क्षमा १९२५ ई०, एकाकिनी या अकेली स्त्री १९३७ ई०, प्रेम परीक्षा १९२७ ई०, जागरण १९३७ ई०, प्रजामण्डल १९४१ ई०, एक और अनेक १९५१ ई०, अपहृता १९५२ ई० आदि आपकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। कुछ समय तक आपने "सरस्वती" का संपादन किया।
  • Shyam Narayan Pandey

    Shyam Narayan Pandey (1907 - 1991) was an Indian poet. He was born on Shravan Krishna Panchami of Vikram Samvat 1964 (i.e. 1907 CE) in the Dumraon village of Mau (then Azamgarh) district of Uttar Pradesh (India). He got primary education in his village and nearby town, after which moved to Kashi for higher studies in Sanskrit. He attained the degree of Sahityacharya in HIndi from Kashi Vidya Peeth. He died at his ancestral home in Dumraon in 1991. His works include the epic poem Haldighati, which is based on the Battle of Haldighati between the forces of Akbar and Maharana Pratap. Pandey's another epic Jauhar, depicting the self-sacrifice of Rani Padmini, a queen of Chittor, written in a folk style became very popular in the decade of 1940-50.
  • Shyam Sunder Agarwal

    हिन्दी और पंजाबी भाषा मे कविता, कहानी और लघुकथा लेखन सम्पादन और अनुवाद। विगत 21 वर्षों से लघुकथा की पंजाबी त्रैमासिक ’मिन्नी’ के संयुक्त सम्पादक। हिन्दी और पंजाबी भाषा मे कविता, कहानी और लघुकथा - लेखन सम्पादन और अनुवाद। सम्पर्क: 575 दशमेश पब्लिक स्कूल के निकट प्रतापनगर कोटकपुरा [पंजाब] sundershyam60@gmail.com
  • Shyamnandan Kishore

    (जन्म: 05 सितम्बर 1930 - निधन: 29 मई 1985) श्यामनंदन किशोर हिन्दी के मूर्धन्य कवि एवं विद्वान थे। ये बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इन्हें अंग्रेजी, इटालियन, रूसी, चेक आदि अनेक भाषाएं आती थीं। ये कई बार विदेशों में भाषण देने गए तथा नेशनल प्रोफेसर रहे। इनके मुख्य काव्य-संग्रह है : 'शेफालिका, 'विभावरी, 'बंधूक, 'सूरजमुखी तथा 'कविश्री। 'इडा, 'गायत्री तथा 'सीता इनके महाकाव्य हैं। इन्हें पद्मश्री अलंकरण तथा 'नेहरू फेलोशिप सम्मान प्राप्त हुए।
  • Sigrun Srivastav

    Sigrun Srivastav is an Indian author of German origin. She is a multi-faceted artist, a writer, a sculptor and an illustrator. As a writer she has written over 25 books for children of all ages. Her interests as an illustrator and a writer come together in her picture books for pre-school children. Her stories for 12 to 14 year old display a rare sensitivity towards the feelings, dreams, joys and fears of children of that age. One of her most popular books is A Moment of Truth in which she has brought together true-life stories from all over the world. Sigrun's writing are distinguished by a strong social consciousness as is evident from her concern about ecological problems, the plight of the differently-abled and poverty. Sigrun has also written scripts for children's films for both television and cinema. She lives in Delhi.
  • Siyaramsharan Gupt

    सियारामशरण गुप्त (४ सितंबर १८९५ - २९ मार्च १९६३) (भाद्र पूर्णिमा सम्वत १९५२ विक्रमी) हिन्दी के साहित्यकार थे। सियारामशरण गुप्त का सेठ रामचरण कनकने के परिवार में श्री मैथिलीशरण गुप्त के अनुज रूप में चिरगाँव, झांसी में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने घर में ही गुजराती, अंग्रेजी और उर्दू भाषा सीखी। सन् १९२९ ई. में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कस्तूरबा गाँधी के सम्पर्क में आये। कुछ समय वर्धा आश्रम में भी रहे। सन् १९४० में चिरगांव में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का स्वागत किया। वे सन्त विनोबा भावे के सम्पर्क में भी आये। उनकी पत्नी तथा पुत्रों का निधन असमय ही हो गया था अतः वे दु:ख वेदना और करुणा के कवि बन गये। १९१४ में उन्होंने अपनी पहली रचना मौर्य विजय लिखी।
  • Sohanlal Dwivedi

    सोहन लाल द्विवेदी (22 फ़रवरी 1906 - 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि हैं। द्विवेदी जी हिन्दी के राष्ट्रीय कवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने आपको पद्दश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था।
  • Subhadra Kumari Chauhan

    सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म नागपंचमी के दिन १६ अगस्त १९०४ को इलाहाबाद (उत्तरप्रदेश) के निकट निहालपुर गाँव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। सुभद्रा कुमारी को बचपन से ही काव्य-ग्रंथों से विशेष लगाव व रूचि था। आपका विद्यार्थी जीवन प्रयाग में ही बीता। अल्पायु आयु में ही सुभद्रा की पहली कविता प्रकाशित हुई थी। सुभद्रा और महादेवी वर्मा दोनों बचपन की सहेलियाँ थीं। सुभद्रा कुमारी का विवाह खंडवा (मद्य प्रदेश) निवासी ‘ठाकुर लक्ष्मण सिंह’ के साथ हुआ। पति के साथ वे भी इलाहाबाद में महात्मा गांधी के १९२१ के असहयोग आंदोलन से जुड़ गईं और राष्ट्र-प्रेम पर कविताएं करने लगी। १५ फरवरी १९४८ को मात्र ४३ वर्ष की अवस्था में र्भाग्यवश एक सड़क दुर्घटना में आपका निधन हो गया। इनकी रचनाएँ हैं — काव्य संग्रह : ‘मुकुल’ (१९३० में प्रकाशित हुआ) और ‘त्रिधारा'। कहानी संकलन : ‘सीधे-सादे चित्र’, ‘बिखरे मोती’ और ‘उन्मादिनी’ । ‘झाँसी की रानी इनकी बहुचर्चित रचना है। इन्हें ‘मुकुल तथा ‘बिखरे मोती पर अलग-अलग सेकसरिया पुरस्कार मिले।
  • Subramania Bharati

    सुब्रह्मण्य भारती (जन्म: 11 दिसम्बर, 1882 - मृत्यु: 11 सितम्बर, 1921) भारत के महान् कवियों में से एक थे, जिन्होंने तमिल भाषा में काव्य रचनाएँ कीं। इन्हें महाकवि भरतियार के नाम से भी जाना जाता है। भारती एक जुझारू शिक्षक, देशप्रेमी और महान् कवि थे। आपकी देश प्रेम की कविताएँ इतनी श्रेष्ठ हैं कि आपको भारती उपनाम से ही पुकारा जाने लगा। तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती ऐसे साहित्यकार थे, जो सक्रिय रूप से 'स्वतंत्रता आंदोलन' में शामिल रहे, जबकि उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर दक्षिण भारत में आम लोग आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े। ये ऐसे महान् कवियों में से एक थे, जिनकी पकड़ हिंदी, बंगाली, संस्कृत, अंग्रेज़ी आदि कई भाषाओं पर थी, पर तमिल उनके लिए सबसे प्रिय और मीठी भाषा थी। उनका 'गद्य' और 'पद्य' दोनों विधाओं पर समान अधिकार था।
  • Sumitranandan Pant

    सुमित्रानंदन पंत (20 मई 1900 - 28 दिसम्बर 1977) हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। बीसवीं सदी का पूर्वार्द्ध छायावादी कवियों का उत्थान काल था। सुमित्रानंदन पंत उस नये युग के प्रवर्तक के रूप में हिन्दी साहित्य में उदित हुए। इस युग को जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और रामकुमार वर्मा जैसे छायावादी प्रकृति उपासक-सौन्दर्य पूजक कवियों का युग कहा जाता है। सुमित्रानंदन पंत का प्रकृति चित्रण इन सबमें श्रेष्ठ था। उनका जन्म ही बर्फ़ से आच्छादित पर्वतों की अत्यंत आकर्षक घाटी अल्मोड़ा में हुआ था, जिसका प्राकृतिक सौन्दर्य उनकी आत्मा में आत्मसात हो चुका था। झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भंवरा गुंजन, उषा किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने। निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही। उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था, गौर वर्ण, सुंदर सौम्य मुखाकृति, लंबे घुंघराले बाल, उंची नाजुक कवि का प्रतीक समा शारीरिक सौष्ठव उन्हें सभी से अलग मुखरित करता था। पंत का जन्म अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में 20 मई 1900 ई. को हुआ। जन्म के छह घंटे बाद ही उनकी माँ का निधन हो गया। उनका लालन-पालन उनकी दादी ने किया। उनका प्रारंभिक नाम गुसाई दत्त रखा गया। वे सात भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई। 1918 में वे अपने मँझले भाई के साथ काशी आ गए और क्वींस कॉलेज में पढ़ने लगे। वहाँ से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण कर वे इलाहाबाद चले गए। उन्हें अपना नाम पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना नया नाम सुमित्रानंदन पंत रख लिया। यहाँ म्योर कॉलेज में उन्होंने बारवीं में प्रवेश लिया। 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के भारतीयों से अंग्रेजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, न्यायालयों एवं अन्य सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और घर पर ही हिन्दी, संस्कृत, बँगला और अंग्रेजी भाषा-साहित्य का अध्ययन करने लगे। इलाहाबाद में वे कचहरी के पास प्रकृति सौंदर्य से सजे हुए एक सरकारी बंगले में रहते थे। उन्होंने इलाहाबाद आकाशवाणी के शुरुआती दिनों में सलाहकार के रूप में भी कार्य किया। उन्हें मधुमेह हो गया था। उनकी मृत्यु 28 दिसम्बर 1977 को हुई। पुरस्कार व सम्मान– हिंदी साहित्य की इस अनवरत सेवा के लिए उन्हें पद्मभूषण (1961), ज्ञानपीठ (1968), साहित्य अकादमी, तथा सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानों से अलंकृत किया गया। सुमित्रानंदन पंत के नाम पर कौशानी में उनके पुराने घर को जिसमें वे बचपन में रहा करते थे, सुमित्रानंदन पंत वीथिका के नाम से एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। इसमें उनके व्यक्तिगत प्रयोग की वस्तुओं जैसे कपड़ों, कविताओं की मूल पांडुलिपियों, छायाचित्रों, पत्रों और पुरस्कारों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें एक पुस्तकालय भी है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत तथा उनसे संबंधित पुस्तकों का संग्रह है। आधी शताब्दी से भी अधिक लंबे उनके रचनाकर्म में आधुनिक हिंदी कविता का पूरा एक युग समाया हुआ है।
  • Suresh Upadhyay

    सुरेश उपाध्याय, जन्म– 15 जुलाई 1943 होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ। शिक्षा– एम. ए. सागर विश्विद्यालय से हुआ। ‘कवि सम्मलेन’ और ‘मजे ले लो’ फिल्मों में कवि रूप में प्रस्तुति हुई। 1982 में काका हाथरसी हास्य पुरस्कार से सम्मानित।
  • Surinder Kumar Arora

    हरियाणा स्थित जगाधरी में जन्मे सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 32 वर्ष तक दिल्ली में जीव-विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत रहने के उपरांत सेवानिवृत हुए हैं तथा वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लघुकथा, कहानी, बाल - साहित्य, कविता व सामयिक विषयों पर लेखन में संलग्न हैं। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, यथा “आज़ादी”, “विष-कन्या”, “तीसरा पैग” (सभी लघुकथा संग्रह), “बन्धन-मुक्त तथा अन्य कहानियाँ” (कहानी संग्रह), “मेरे देश की बात” (कविता संग्रह), “बर्थ-डे, नन्हे चाचा का” (बाल-कथा संग्रह) आदि। इसके अतिरिक्त कई पत्र-पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं तथा आपने कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। साहित्य-अकादमी (दिल्ली) सहित कई संस्थाओं द्वारा आपकी कई रचनाओं को पुरुस्कृत भी किया गया है। डी - 184 , श्याम पार्क एक्स्टेनशन, साहिबाबाद - 201005 ( ऊ . प्र.) मो.न. 09911127277 (arorask1951@yahoo.com)
  • Suryakant Tripathi Nirala

    सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (11 फरवरी 1896 – 15 अक्टूबर 1961) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं। काव्यसंग्रह– जूही की कली कविता की रचना 1916 में की गई। अनामिका 1923, परिमल 1930, गीतिका 1936, द्वितीय अनामिका 1938 अनामिका के दूसरे भाग में सरोज सम़ृति और राम की शक्ति पूजा जैसे प्रसिद्ध कविताओं का संकलन है। तुलसीदास 1938, कुकुरमुत्ता 1942, अणिमा 1943, बेला 1946, नये पत्ते 1946, अर्चना 1950, आराधना 1953, गीत कुंज 1954, सांध्यकाकली, अपरा। उपन्यास– अप्सरा, अलका, प्रभावती 1946, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा। कहानी संग्रह– लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी-1941, सखी, देवी। निबंध– रवीन्द्र कविता कानन, प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह। पुराण कथा– महाभारत अनुवाद– आनंद मठ, विष वृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, कपालकुंडला, दुर्गेश नन्दिनी, राज सिंह, राजरानी, देवी चौधरानी, युगलांगुल्य, चन्द्रशेखर, रजनी, श्री रामकृष्ण वचनामृत, भरत में विवेकानंद तथा राजयोग का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद
  • Suryakumar Pandey

    Suryakumar Pandey (born 1 January 1956) is a Hindi poet, humorist, satirist and writer from Lucknow, India. In a long literary career, Suryakumar Pandey has been contributing to various genres of Hindi literature like Hasya Kavita (humorous comic poetry), Vyangya (satire) and Bal Kavita (children rhymes) etc. He is most recognized as a Hasya kavi and for his distinctive style and language of hasya kavita Popularly known as Pandeyji, he is also well known for his Hāsya kavita (humorous hindi poetry) recitations at Hindi kavi sammelans both in India and globally.
  • Swapna Dutta

    Swapna Dutta has been writing, mostly for children, for several decades and has many titles to her credit, including translations. She has been published by Harper Collins, Scholastic, Orient Longman, Rupa, Sahitya Akademi, Children's Book Trust, National Book Trust and Hachette, among others, and has contributed to magazines like Children’s World, Target, Tinkle, Chandamama, The Bookbird (USA), The School Magazine (Australia), Cricket (USA) and Folly (UK). She worked as Editorial Consultant for Target (Living Media), Assistant Editor for Limca Book of Records and Deputy Editor for Encyclopaedia Britannica between 1988 and 2002. She was awarded a National Fellowship for literature by the Ministry of Human Resources in 1986 for having translated selected poems of 20 award-winning Bengali poets and also a National Award for creative writing in Hindi by the Central Hindi Directorate, Ministry of Human Resources, in 1993, for translating 7 award winning modern Bengali poets into Hindi. Dutta currently lives in Bangalore and writes in English, Bengali and Hindi.
  • Sybil Wettasinghe

    Kala Keerthi Sybil Wettasinghe (31 October 1927 – 1 July 2020) was a children's book writer and an illustrator in Sri Lanka. Considered as the doyen of children’s literature in Sri Lanka, Wettasinghe has produced more than 200 children's books which have been translated into several languages. Two of her best known works are "Child In Me" and "Eternally Yours".
  • Thakur Gopal Sharan Singh

    ठाकुर गोपाल शरण सिंह (01 जनवरी 1891 – 02 अक्तूबर 1960) आधुनिक हिन्दी काव्य के प्रमुख उन्नायकों और पथ प्रशस्त करनेवालों में हैं। ब्रजभाषा के स्थान पर आधुनिक हिन्दी का प्रयोग कर उन्होंने काव्य में न सिर्फ़ वही माधुर्य, सरसता और प्रांजलता बनाये रखी, जो ब्रजभाषा का वैशिष्ट्य था, वरन उनकी प्रसाद अभिव्यंजना शैली में भी रमणीयता का सौंदर्य बना रहा। विषय प्रतिपादन में तल्लीनता और भाव विचार की सघनता उनकी कविता का एक और आकर्षक तत्व है। गोपालशरण सिंह का जन्म रीवा राज्य के नयीगढी इलाके के एक जमींदार के घराने में हुआ। शिक्षा रीवा एवं प्रयाग में हुई। ये प्रयाग, इंदौर और रीवा के अनेक साहित्यिक संस्थानों से संबध्द थे। इनके मुक्तक संग्रह 'माधवी, 'सुमना, 'सागरिका और 'संचिता हैं। 'कादम्बिनी तथा 'मानवी गीत-काव्य हैं। इनकी काव्य भाषा शुध्द, सहज एवं साहित्यिक है। गोपाल शरण सिंह की शिक्षा हाईस्कूल तक हुई थी, लेकिन अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और हिन्दी चार भाषाओं के ज्ञाता थे। हैरत इस बात की है कि जब सामंतवाद अपने चरम पर था, उस समय स्वयं ठाकुर साहब ने किसानों, मजदूरों शोषितों, पीडितों और असहायों को अपनी कविता का विषय बनाया। सामंती परिवार में पैदा होकर भी ठाकुर गोपाल शरण सिंह उन सभी कुरीतियों से दूर एक मनीषी, एक आमजन की पीड़ा में छटपटाते कवि हुआ करते थे। रीवां नरेश महाराज गुलाब सिंह की कैबिनेट में जाने से उन्होंने इनकार कर दिया था। ठाकुर साहब शरीर सौष्ठव भी अद्भुत था उन्हें पहलवानी का भी शौक था। नई गढ़ी से इलाहाबद सिर्फ़ इसलिए आये ताकि बच्चों की शिक्षा-दीक्षा ठीक ढंग से हो सके। गोपाल शरण सिंह के घर पर निराला, मैथिलीशरण गुप्त महादेवी वर्मा, डॉ० रामकुमार वर्मा जैसे कवियों का आना-जाना होता था। कृतियाँ– मानवी (1938), माधवी (1938), ज्योतिष्मती (1938), संचिता (1939), सुमना(1941), सागरिका(1944), ग्रामिका (1951)। प्रबंध-काव्य– जगदालोक (प्रबंध-काव्य, 1952), प्रेमांजलि [(1953), कादम्बिनी (1954), विश्वगीत (1955)।
  • Udaybhanu Hans

    उदयभानु ‘हंस’ जन्‍म– 2 अगस्‍त 1926। शिक्षा– प्रभाकर, शास्‍त्री एवं एम.ए. (हिन्‍दी)। कार्यक्षेत्र– अध्यापन एवं लेखन। सनातन धर्म संस्‍कृत कॉलेज, मुलतान (1945-1947), रामजस कॉलेज, दिल्‍ली (1952-1953), गवर्नमेंट कॉलेज, हिसार (1954) - प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्‍त (1988)। प्रकाशित कृतियाँ– ‘उदयभानु हंस रचनावली’ दो खंड (कविता) दो खंड (गद्य)। सम्मान एवं पुरस्कार– अनेक सम्मानों व पुरस्कारों से अलंकृत। देश विदेश में कविता-पाठ के लिए आमंत्रित कवि, ‘दूरदर्शन’ के दिल्‍ली एवं जालन्‍धर केन्‍द्रों द्वारा तीस-तीस मिनट के दो ‘वृत्‍तचित्रों’ का निर्माण एवं प्रसारण, हिन्‍दी में ‘रूबाई’ के प्रवर्तक कवि 1948 ‘रूबाई सम्राट’ नाम से लोकप्रिय।
  • Umakant Malviya

    उमाकांत मालवीय का जन्म 2 अगस्त 1931 को मुंबई में हुआ उनका निधन 11नवम्बर 1982 को इलाहबाद में हुआ। शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय में हुई। इन्होंने कविता के अतिरिक्त खण्डकाव्य, निबंध तथा बालोपयोगी पुस्तकें भी लिखी हैं। काव्य-क्षेत्र में मालवीय जी ने नवगीत विधा को अपनाया। इनका मत है कि आज के युग में भावों की तीव्रता को संक्षेप में व्यक्त करने में नवगीत पूर्णतया सक्षम है। मुख्य कविता-संग्रह हैं : `मेहंदी और महावर', `देवकी', `रक्तपथ','एक चावल नेह रींधा' तथा `सुबह रक्तपलाश की'।
  • Veerbala Bhavsar

    डॉ. वीरबाला भावसार (अक्टूबर 1931 – अगस्त 2010) स्वतंत्र्ता से पूर्व जन्मे रचनाकारों की उस पीढी से है, जिन्होंने प्रयोगवाद व प्रगतिवाद के दौर में अपनी रचना-यात्र प्रारम्भ की तथा आधुनिक मुक्त छंद की कविता तक विभिन्न सोपान से गुजरते हुए कविता कामिनी के सुकुमार स्वरूप को बनाए रखा। छायावादियों की तरह का एक रूमानी संसार कविता म बसाए रखना, इस प्रकार के रचनाकारों की विशिष्टता है। इस दौर में हिन्दी साहित्य में कई बडे रचनाकारों ने गद्य गीतों की रचना की। डॉ. वीरबाला भावसार द्वारा रचित इस संकलन की कुछ कविताओं यथा ‘भोर हुई है’, ‘मैं निद्रा में थी’, ‘वैरागिनी’, ‘तुलिका हूँ’ तथा ‘बाती जलती है’ आदि को गद्य गीत या गद्य काव्य की श्रेणी में रखा जा सकता है।
  • Vinod Tiwari

    जन्म: 02 मई 1941, जन्म स्थान: महुआ डाबरा, तत्कालीन ज़िला नैनीताल (भारत), कुछ प्रमुख कृतियाँ: दर्द बस्ती का; सुबह आयेगी; मोम के बुत संपर्क: 'जय राजेश' ए-462 ,ए-सेक्टर, शाहपुरा (मानसरोवर कॉलोंनी), भोपाल (म.प्र.) 462039 दूरभाष: 0755-2420560
  • Vishnu Sharma

    Vishnu Sharma (विष्णु शर्मा) was an Indian scholar and author who is believed to have written the Panchatantra collection of fables. The exact period of the composition of the Panchatantra is uncertain, and estimates vary from 1200 BCE to 300 CE. Some scholars place him in the 3rd century BCE. Vishnu Sharma is one of the most widely translated non-religious authors in history. The Panchatantra was translated into Middle Persian/Pahlavi in 570 CE by Borzūya and into Arabic in 750 CE by Persian scholar Abdullah Ibn al-Muqaffa as Kalīlah wa Dimnah . In Baghdad, the translation commissioned by Al-Mansur, the second Abbasid Caliph, is claimed to have become “second only to the Qu’ran in popularity.” “As early as the eleventh century this work reached Europe, and before 1600 it existed in Greek, Latin, Spanish, Italian, German, English, Old Slavonic, Czech, and perhaps other Slavonic languages. Its range has extended from Java to Iceland.” In France, “at least eleven Panchatantra tales are included in the work of La Fontaine.”
  • Yogesh Samdarshi

    जन्म- १ जुलाई १९७४, जन्म स्थान: ग्राम कलंजरी, मेरठ, उत्तर प्रदेश में। शिक्षा- पत्रकारिता विषय से स्नातक। कार्यक्षेत्र - सामाजिक विषयों पर चर्चा, कविता लेखन, नाटक लेखन, कहानी लेखन, भाषण करना, नाट्य विधा से विशेष लगाव। प्रसिद्ध नाटक कार श्री ललित मोहन थापल्यल जी के सानिध्य में ७ वर्षों तक मंचों पर अभिनय। संप्रति - प्रतिष्ठित समाचार पत्र मेल टुडे में असिसिटेंट ग्राफ़िक एडिटर के पद पर कार्यरत।
  • Dr. Yogesh Sharma

    The poet is a teacher who believes in universal brotherhood. He loves humanity, social justice, secularism, woman's empowerment and nature. He believes in realism. His poems are far away from the flight of fantasy and imagination. He is very close to realism of life, society and world in his poems.

One comment

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