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Tag Archives: 15 August

हम सब सुमन एक उपवन के – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

हम सब सुमन एक उपवन के - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

हम सब सुमन एक उपवन के एक हमारी धरती सबकी, जिसकी मिट्टी में जन्मे हम। मिली एक ही धूप हमें है, सींचे गए एक जल से हम। पले हुए हैं झूल-झूल कर, पलनों में हम एक पवन के। हम सब सुमन एक उपवन के॥ रंग रंग के रूप हमारे, अलग-अलग है क्यारी-क्यारी। लेकिन हम सबसे मिलकर ही, इस उपवन की शोभा सारी। एक हमारा माली …

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15 August Facebook Covers

15 August Facebook Covers

15 August Facebook Covers: Independence Day, observed annually on 15 August, is a National Holiday in India commemorating the nation’s independence from the British Empire on 15 August 1947. India attained independence following an Independence Movement noted for largely nonviolent resistance and civil disobedience led by the Indian National Congress (INC). Independence coincided with the partition of India, in which …

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Girija Kumar Mathur Inspirational Desh Prem Poem पंद्रह अगस्त: 1947

पंद्रह अगस्त: 1947 - गिरिजा कुमार माथुर

आज जीत की रात पहरुए सावधान रहना! खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना! प्रथम चरण है नए स्‍वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मन्‍थन से उठ आई पहली रत्‍न हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन मुक्‍ता डोर क्‍योंकि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अम्‍बुधि महान रहना पहरुए, सावधान …

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Suryakant Tripathi ‘Nirala’ Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनि

Suryakant Tripathi 'Nirala' Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनि

वर दे वीणावादिनि! वर दे। प्रिय स्वतंत्र–रव अमृत–मंत्र नव, भारत में भर दे। काट अंध–उर के बंधन–स्तर, बहा जननि ज्योतिर्मय निर्झर, कलुष–भेद–तम हर, प्रकाश भर, जगमग जग कर दे। नव गति, नव लय, ताल छंद नव, नवल कंठ, नव जलद मंद्र–रव, नव नभ के नव विहग–वृंद को, नव पर नव स्वर दे। वर दे वीणावादिनि! वर दे। ~ सूर्यकांत त्रिपाठी …

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Gopal Prasad Vyas Inspirational Patriotic Hindi Poem खूनी हस्‍ताक्षर

Gopal Prasad Vyas Inspirational Patriotic Hindi Poem खूनी हस्‍ताक्षर

Neta Ji Subhash Chandra Bose organized the Indian National Army in early 1940s to fight the foreign occupation of the country. He promised freedom for the country but demanded full dedication of the people to this end. I am thankful to an unnamed reader who sent me a scanned copy of this lovely poem. This is a remarkable poem that …

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बढ़े चलो, बढ़े चलो – सोहनलाल द्विवेदी

बढ़े चलो, बढ़े चलो - सोहन लाल द्विवेदी

न हाथ एक शस्त्र हो, न हाथ एक अस्त्र हो, न अन्न वीर वस्त्र हो, हटो नहीं, डरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो रहे समक्ष हिम-शिखर, तुम्हारा प्रण उठे निखर, भले ही जाए जन बिखर, रुको नहीं, झुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो घटा घिरी अटूट हो, अधर में कालकूट हो, वही सुधा का घूंट हो, जिये चलो, मरे चलो, …

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पुण्य पर्व पन्द्रह अगस्त – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

पुण्य पर्व पन्द्रह अगस्त - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

युग-युग की शांति अहिंसा की, लेकर प्रयोग गरिमा समस्त, इतिहास नया लिखने आया, यह पुण्य पर्व पन्द्रह अगस्त। पन्द्रह अगस्त त्योहार, राष्ट्र के चिरसंचित अरमानों का पन्द्रह अगस्त त्योहार, अनगिनित मूक-मुग्ध बलिदानों का। जो पैगम्बर पददलित देश का, शीश उठाने आया था आजन्म फकीरी ले जिसने, घर-घर में अलख जगाया था। भूमण्डल में जिसकी सानी का, मनुज नहीं जन्मा दूजा …

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15 अगस्त – मीनाक्षी भालेराव

15 अगस्त - मीनाक्षी भालेराव

जब-जब पन्द्रह अगस्त आता है, मन आंगन में रस बरसाता है। मन में नये अहसास नई उमंगें जगाता है, वीरों के गुणगान गाता है। जब-जब वीर रस बरसता है तब-तब जीवन फिर, मधुमास बन जाता है। प्रतिध्वनियों सा बज कर सोये वीरों को जगाता है। भारत माँ की शान में जीना-मरना सिखलाता है। वीरों का कोलाहल मन में देश प्रेम …

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15 अगस्त 1947 – शील

15 अगस्त 1947 - शील

आज देश मे नई भोर है – नई भोर का समारोह है। आज सिन्धु-गर्वित प्राणों में उमड़ रहा उत्साह मचल रहा है नए सृजन के लक्ष्य बिन्दु पर कवि के मुक्त छन्द-चरणों का एक नया इतिहास। आज देश ने ली स्वंत्रतता आज गगन मुस्काया। आज हिमालय हिला पवन पुलके सुनहली प्यारी-प्यारी धूप। आज देश की मिट्टी में बल उर्वर साहस …

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पतंगों का मौसम – शिव मृदुल

मौसम आज पतंगों का है, नभ में राज पतंगों का है। इन्द्रधनुष के रंगों का है, मौसम नई उमंगों का है॥ निकले सब ले डोर डोर पतंगें, सुन्दर सी चौकोर पतंगें। उड़ा रहे कर शोर पतंगें, देखो चारों ओर पतंगें॥ उड़ी पतंगें बस्ती बस्ती, कोई मंहगी, कोई सस्ती। पर न किसी में फुट परस्ती, उड़ा-उड़ा सब लेते मस्ती॥ चली डोर …

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