Home » Stories For Kids » Stories in Hindi » एक नजर – शराफत अली खान
एक नजर - शराफत अली खान

एक नजर – शराफत अली खान

जनाजे की तैयारी हो रही थी। छोटी बहू की लाश रातभर हवेली के अंदर नवाब मियां के कमरे में ही बर्फ पर रखी हुई थी। रातभर जागने से औरतों और मर्दों के चेहरे पर सुस्ती और उदासी छाई हुई थी। रातभर दूरदराज से लोग आतेजाते रहे और दुख जताने का सिलसिला चलता रहा। पूरी हवेली मानो गम में डूबी हुई थी और घर के बच्चे बूढ़ों की आंखें नम थीं। मगर कई साल से खामोश और अलगथलग से रहने वाले बड़े मियां जान यानी नवाब मियां के बरताव में कोई फर्क नहीं पड़ा था। उन की खामोशी अभी भी बरकरार थी।

उन्होंने न तो किसी से दुख जताने की कोशिश की और न ही उन से मिल कर कोई रोना रोया, क्योंकि सभी जानते थे कि पिछले 2-3 सालों से वे खुद ही दुखी थे। नवाब मियां शुरू से ऐसे नहीं थे, बल्कि वे तो बड़े ही खुशमिजाज इनसान थे। इंटर करने के बाद उन्हें अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में एलएलबी पढ़ने के लिए भेज दिया गया था। अभी एलएलबी का एक साल ही पूरा हो पाया था कि अचानक नवाब मियां अलीगढ़ से पढ़ाई छोड़ कर हमेशा के लिए वापस आ गए। घर में किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई उन से यह पूछता कि मियां, पढ़ाई अधूरी क्यों छोड़ आए? अब्बाजी यानी मियां कल्बे अली 2 साल पहले ही चल बसे थे और अम्मी जान रातदिन इबादत में लगी रहती थीं। घर में अम्मी जान के अलावा छोटे मियां जावेद रह गए थे, जो पिछले साल ही अलीगढ़ से बीए करने के बाद जायदाद और राइस मिल संभालने लगे थे। वैसे भी जावेद मियां की पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। इधर पूरी हवेली की देखरेख नौकर और नौकरानियों के भरोसे चल रही थी।

हवेली में एक बहू की शिद्दत से जरूरत महसूस की जाने लगी थी। नवाब मियां के रिश्ते आने लगे थे। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता था कि घर में नवाब मियां के रिश्ते को ले कर कोई दूर या पास का रिश्तेदार न आता हो। लेकिन अपने ही गम में डूबे नवाब मियां ने आखिर में सख्ती से फैसला सुना दिया कि वे अभी शादी करना नहीं चाहते, इसलिए बेहतर होगा कि जावेद मियां की शादी कर दी जाए। हवेली के लोग एक बार फिर सकते में आ गए। कानाफूसी होने लगी कि नवाब मियां अलीगढ़ में किसी हसीना को दिल दे बैठे हैं, मगर इश्क भी ऐसा कि वे हसीना से उस का पताठिकाना भी न पूछ पाए और वह अपने घर वालों के बुलावे पर ऐसी गई कि फिर वापस ही न लौटी। उन्होंने उस का काफी इंतजार किया, मगर बाद में हार कर वे भी हमेशा के लिए घर लौट आए। बरसों बाद हवेली जगमगा उठी। जावेद मियां की शादी इलाहाबाद से हुई। छोटी बहू के आने से हवेली में खुशियां लौट आई थीं।

छोटी बहू बहुत हसीन थीं। वे काफी पढ़ीलिखी भी थीं। नौकरचाकर भी छोटी बहू की तारीफ करते न थकते थे। मगर नवाब मियां हर खुशी से दूर हवेली के एक कोने में अपनी ही दुनिया में खोए रहते। न तो उन्हें अब कोई खुशी खुश करती थी और न ही गम उन्हें अब दुखी करता था। वे रातदिन किताबों में खोए रहते या हवेली के पास बाग में चहलकदमी करते रहते। सालभर होने को आया, मगर किसी की हिम्मत न हुई कि नवाब मियां के रिश्ते की कोई बात भी करे, क्योंकि हर कोई जानता था कि नवाब मियां जिद के पक्के हैं और जब तक उन के दिल में यादों के जख्म हरे हैं, तब तक उन से बात करना बेमानी है। अभी एक साल भी न होने पाया था कि छोटी बहू के पैर भारी होने की खबर से हवेली में एक बार फिर खुशियां छा गईं। सभी खुश थे कि हवेली में बरसों बाद किसी बच्चे की किलकारियां गूंजेंगी।

Check Also

Vipul B. Varshney Book Review: Lucknow: The City of Heritage & Culture

Vipul B. Varshney Book Review: Lucknow: The City of Heritage & Culture

Photographer: Ajaish Jaiswal Publisher: Niyogi Books Pages: 208 Price: Rs 2,500 It is an enduring …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *