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शनि शिंगणापूर, अहमदनगर, महाराष्ट्र

शनि शिंगणापूर, अहमदनगर, महाराष्ट्र

लोक मान्यता है कि शिंगणापुर में देवता हैं लेकिन मंदिर नहीं। घर है लेकिन दरवाजे नहीं। भय है पर शत्रु नहीं। इन सब से हटकर शिंगनापुर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां घरों में किवाड़ नहीं होते और शनिदेव स्वयं अपने भक्तों के घरों की रक्षा करते हैं। चारों धाम भ्रमण करने पर भी न देखा होगा आपने ऐसा गांव या मंदिर। श्री शनिदेव शिंगणापूर के चमत्कारों से रू-ब-रू करवाने वाले लेखक कहते हैं की –

स्वर्गीय भाऊ बानकर की धर्मपत्नी श्रीमती रुख्मिनी देवी से वो मिलने गए और कुछ जागृत अनुभवों के विषय में उनसे जाना। इकासी वर्ष की रुख्मिनी देवी ने पन्द्रह फरवरी 2004 को बताया था की,”मुझे और मेरे स्वर्गीय पति को श्री शनिदेव के विचित्र अनुभव देखने को मिले हैं। उदाहरण के रूप में हमारे घर की जयश्री बेटी के पैर में डाले हुए पायल और नुपुर चोर ने तोड़े बाद में उसने सोने की चैन भी काटी लेकिन थोड़ी देर बाद वह खुद वापिस आया और पायल, चैन डालकर भाग गया। हमारा पूरा संयुक्य परिवार है। कहीं भी ताला नहीं, दरवाजा नहीं, सारी चीजें खुली रहती हैं लेकिन आज तक कुछ भी नुकसान नहीं हुआ। मेरी बहुओं तथा अन्य औरतों से कभी झगड़े फसाद नहीं हुए। श्री शनिदेव की कृपा से हमारा सारा सुखी तथा स्वस्थ परिवार है।”

शिंगणापूर की उम्रदराज लगभग 100 साल की श्रीमती विठदेवी कहती हैं की, ‘हमें पूरी जिंदगी भर किसी से डर नहीं था आप भी गांव में किसी के भी घर में घुसो, आपको कोई कुछ नहीं बोलेगा। उल्टा अतिथि के रूप में जलपान कराएंगे। हमारे घर में न ताला है, न बक्सा कोई चीज किसी से छिपी नहीं है। बहुओं से भी नहीं, न मेरा कभी किसी बहु से, जेठानी या देवरानी से ना नन्द-फूफी से झगडा हुआ है, हम सारे के सारे हर्ष और उल्हास के साथ रहते हैं।”

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